बिलासपुर… 25 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि समय बीत जाने मात्र से गंभीर अपराध की सजा समाप्त नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि सजा का उद्देश्य केवल अपराधी को दंडित करना नहीं, बल्कि समाज में ऐसा प्रभाव पैदा करना भी है जिससे भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लगे। हालांकि घटना को 25 वर्ष से अधिक समय बीत जाने, आरोपी के खिलाफ कोई अन्य आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने तथा जमानत की शर्तों का कभी उल्लंघन नहीं करने को देखते हुए हाईकोर्ट ने उसकी दो वर्ष की सजा घटाकर चार माह कर दी।

मामले की सुनवाई जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की एकलपीठ में हुई। अपीलकर्ता गुरु उर्फ राहुल उर्फ प्रवीण कुमार शिंदे ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

ये खबर भी पढ़ें…
एनीकट के पास सजी थी जुए की महफिल, पुलिस पहुंची तो मची भगदड़; चार जुआरी धराए
एनीकट के पास सजी थी जुए की महफिल, पुलिस पहुंची तो मची भगदड़; चार जुआरी धराए
बिलासपर... तखतपुर थाना क्षेत्र के नगोई एनीकट के पास जुए की महफिल पर पुलिस ने दबिश देकर चार जुआरियों को...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

तलवार से किया था जानलेवा हमला

अभियोजन के अनुसार 3 दिसंबर 2002 को धमतरी में दीपक कुमार ओझा और आरोपी के बीच विवाद हुआ था। विवाद के कुछ देर बाद जब दीपक अपने घर पहुंचा तो आरोपी दो अन्य लोगों के साथ मोटरसाइकिल से वहां पहुंचा और तलवार से हमला कर दिया। जान बचाने के प्रयास में पीड़ित ने हाथ आगे किया, जिससे उसकी कोहनी में गंभीर चोट आई और फ्रैक्चर हो गया।

घायल की रिपोर्ट पर धमतरी सिटी कोतवाली पुलिस ने अपराध दर्ज किया। बाद में विचारण के दौरान ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 326 के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास और ₹500 अर्थदंड की सजा सुनाई।

ये खबर भी पढ़ें…
चोरी में औजार बरामद, चाकूबाजी में खून लगा चाकू; दोनों मामलों के आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
चोरी में औजार बरामद, चाकूबाजी में खून लगा चाकू; दोनों मामलों के आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
बिलासपुर... जिले में दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई चोरी और चाकूबाजी की घटनाओं में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

हाईकोर्ट ने राहत भी दी, सिद्धांत भी स्पष्ट किया

अपील में आरोपी ने दलील दी कि पिछले 25 वर्षों से वह नियमित रूप से हर सुनवाई में उपस्थित होता रहा है, उसने जमानत का कभी दुरुपयोग नहीं किया और उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। इसलिए उसे पहले से काटी गई अवधि के आधार पर राहत दी जाए।

ये खबर भी पढ़ें…
पीएम मोदी के जन्मदिन पर पुलिस ग्राउंड में जगमगाए सवा लाख दीप
पीएम मोदी के जन्मदिन पर पुलिस ग्राउंड में जगमगाए सवा लाख दीप
बिलासपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के जन्म दिन पर बिलासपुर पुलिस ग्राउंड में आशीर्वाद का दिया कार्यक्रम के तहत 1,25,000 दिया...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

हाईकोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांत का हवाला देते हुए कहा कि सजा इतनी कठोर नहीं होनी चाहिए कि वह अनुपातहीन लगे, लेकिन इतनी हल्की भी नहीं हो सकती कि उसका निवारक प्रभाव समाप्त हो जाए।

कोर्ट ने माना कि अपराध गंभीर प्रकृति का था, इसलिए केवल पहले से बिताई गई जेल अवधि को ही सजा मान लेने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि घटना वर्ष 2002 की होने, आरोपी के साफ आपराधिक रिकॉर्ड और जमानत की शर्तों के पालन को देखते हुए सजा घटाकर चार माह कर दी गई।

30 सितंबर तक करना होगा सरेंडर

हाईकोर्ट ने आरोपी को ट्रायल के दौरान जेल में बिताए एक माह 10 दिन की अवधि का समायोजन (सेट-ऑफ) देने का निर्देश दिया। साथ ही उसका जमानत बांड निरस्त करते हुए 30 सितंबर 2026 तक ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। यदि वह निर्धारित तिथि तक सरेंडर नहीं करता है तो पुलिस को उसे गिरफ्तार कर शेष सजा भुगताने तथा हाईकोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।