बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने परिवीक्षा अवधि में कार्यरत सरकारी कर्मचारी के स्थानांतरण को लेकर अहम फैसला सुनाया है।

जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि वर्ष 2025 की राज्य स्थानांतरण नीति की धारा 6.1 में परिवीक्षा अवधि में कार्यरत कर्मचारी के स्थानांतरण पर स्पष्ट रोक है और यह प्रावधान अभी प्रभावी है। कोर्ट ने इसी आधार पर सहायक प्रबंधक संदीप पन्ना के स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया।

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मामला जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र अंबिकापुर, जिला सरगुजा में सहायक प्रबंधक के पद पर पदस्थ संदीप पन्ना से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के अनुसार, राज्य शासन ने 3 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर उनका स्थानांतरण जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी कर दिया था। इसके तीन दिन बाद 7 सितंबर को उन्हें अंबिकापुर से रिलीव भी कर दिया गया।

संदीप पन्ना ने अपने स्थानांतरण पर आपत्ति जताते हुए विभाग के समक्ष अभ्यावेदन भी प्रस्तुत किया था। याचिका में बताया गया कि वह अभी परिवीक्षा अवधि में कार्यरत हैं। ऐसे में राज्य की स्थानांतरण नीति के प्रावधानों के अनुसार उनका तबादला नहीं किया जा सकता था। इसी आधार पर उन्होंने हाई कोर्ट में स्थानांतरण और रिलीविंग आदेश को चुनौती दी।

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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एएस राजपूत ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि छत्तीसगढ़ शासन की स्थानांतरण नीति में परिवीक्षा अवधि में कार्यरत कर्मचारी के स्थानांतरण पर स्पष्ट रोक है। इसके बावजूद संदीप पन्ना का तबादला किया गया। वहीं राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता विवेक वर्मा ने स्थानांतरण आदेश को वैधानिक बताते हुए इसका बचाव किया।

मामले की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने वर्ष 2025 की स्थानांतरण नीति का अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि नीति की धारा 6.1 के तहत विशेष टिप्पणी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि परिवीक्षा अवधि में कार्यरत कर्मचारी का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा।

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हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानांतरण नीति में दिया गया यह विशेष प्रावधान अभी प्रभावी है। ऐसे में परिवीक्षा अवधि में कार्यरत याचिकाकर्ता का स्थानांतरण नीति के उक्त प्रावधान के विपरीत किया गया।

कोर्ट ने संदीप पन्ना की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य शासन के 3 सितंबर 2026 के स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र अंबिकापुर द्वारा जारी 7 सितंबर 2026 के रिलीविंग आदेश को भी रद्द कर दिया गया।