बिलासपुर… जिला शिक्षा विभाग में नियुक्ति, स्थानांतरण और युक्तियुक्तकरण के दौरान कथित मेधांधली को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा की ओर से की गई शिकायत अब सीएम हेल्पलाइन के एल-4 स्तर तक पहुंच गई है। शिकायत में बिलासपुर के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और स्थापना शाखा के बाबू की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हाईकोर्ट के आदेशों की कथित गलत व्याख्या को आधार बनाकर स्थानांतरण किए जाने और युक्तियुक्तकरण के दौरान हाईकोर्ट के निर्देशों का कथित उल्लंघन करने के आरोप भी शिकायत में उठाए गए हैं।

शिकायत में यह भी आरोप है कि पूरे मामले में कलेक्टर को अंधेरे में रखकर हाईकोर्ट के निर्देशों के विपरीत कार्रवाई की गई। नियुक्ति और स्थानांतरण से जुड़े फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अंकित गौरहा अलग-अलग मंचों पर लगातार लिखित शिकायतें करते रहे हैं। अब वही मामला सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचने के बाद शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बन गया है।

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सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों के निस्तारण के लिए अलग-अलग स्तर निर्धारित हैं। जिला शिक्षा विभाग स्तर पर एल-1, संभागीय स्तर पर एल-2 और संचालनालय स्तर पर एल-3 की कार्रवाई होती है। इसके आगे शिकायत का एल-4 स्तर तक पहुंचना उसे शासन के उच्च स्तर पर लिए जाने का संकेत माना जा रहा है। यही वजह है कि इस मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।

अंकित गौरहा की ओर से उठाए गए सवालों में सिर्फ स्थानांतरण की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि हाईकोर्ट के आदेशों की व्याख्या और उनके पालन को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। खासतौर पर युक्तियुक्तकरण के दौरान हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन हुआ या नहीं, यह जांच का अहम बिंदु बन सकता है।

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मामला अब जिला शिक्षा विभाग की सीमाओं से आगे निकल चुका है। एल-4 स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद विभागीय हलकों में भी हलचल है। शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में कितने सही साबित होते हैं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और स्थापना शाखा की भूमिका को लेकर जवाबदेही का सवाल खड़ा होना तय है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन स्तर पर इस शिकायत की जांच किस स्तर पर और किस दिशा में आगे बढ़ती है। क्योंकि मामला सिर्फ ट्रांसफर का नहीं, बल्कि हाईकोर्ट के निर्देशों की व्याख्या और उनके पालन से भी जुड़ा है।

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