कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में ‘सेवा मेरा योगदान’ अभियान के तहत निकाले गए शिक्षा दान रथ को लेकर विवाद सामने आया है। पाली विकासखंड के एक संकुल के शिक्षकों के वाट्सएप ग्रुप में 200 रुपये सहयोग राशि देने संबंधी मैसेज शेयर किए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने संकुल शैक्षिक समन्वयक (CAC) अशोक कुमार भारद्वाज को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

दरअसल, 24 सितंबर को कोरबा जिले के सभी विकासखंडों में ‘शिक्षा दान रथ’ निकाला गया था। इस अभियान का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए नागरिकों तथा इच्छुक दानदाताओं से स्वेच्छा से शैक्षणिक सामग्री एकत्र करना था। अभियान के तहत विद्यार्थियों के लिए कॉपी, पुस्तक, पाठ्यपुस्तक सहित नवोदय प्रवेश परीक्षा, नीट, जेईई, पीएससी और यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उपयोगी किताबें और अध्ययन सामग्री दान करने की अपील की गई थी।

इसी अभियान के दौरान पाली विकासखंड के एक संकुल के शिक्षकों के वाट्सएप ग्रुप में संकुल शैक्षिक समन्वयक अशोक कुमार भारद्वाज की ओर से 200 रुपये सहयोग राशि देने से संबंधित मैसेज शेयर किया गया।

मैसेज सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने इसकी जानकारी ली और अभियान के लिए राशि एकत्र करने के संबंध में जारी निर्देशों की स्थिति स्पष्ट की।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अनुसार, ‘शिक्षा दान रथ’ या ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के लिए शिक्षकों से 200 रुपये या किसी अन्य निर्धारित राशि का अनिवार्य सहयोग लेने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। अभियान में शैक्षणिक सामग्री अथवा अन्य सहयोग स्वैच्छिक रखा गया था। ऐसे में शिक्षकों से 200 रुपये सहयोग राशि से संबंधित मैसेज वाट्सएप ग्रुप में शेयर किए जाने को लेकर विभाग ने संबंधित सीएसी से स्पष्टीकरण मांगा है।

डीईओ कार्यालय की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में अशोक कुमार भारद्वाज से पूछा गया है कि शिक्षकों से सहयोग राशि लेने के संबंध में वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से मैसेज साझा करने का आधार क्या था। विभाग ने उनसे इस संबंध में अपना पक्ष और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा है।

फिलहाल विभागीय स्तर पर मामले की जांच और संबंधित अधिकारी से जवाब लेने की प्रक्रिया चल रही है। नोटिस जारी होना अपने आप में किसी अनियमितता के अंतिम रूप से सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं है। संबंधित सीएसी के जवाब और विभागीय जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।