बिलासपुर/छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शिक्षा विभाग के भीतर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला शिक्षा कार्यालय (DEO) के अंतर्गत युक्तियुक्तकरण, पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्तियों में कथित तौर पर किए गए खेल ने न केवल शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि उच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना की भी बात सामने आ रही है।

लंबे समय से फाइलों में दबे इस फर्जीवाड़े की गूंज जब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline) तक पहुंची, तब जाकर सुस्त पड़ा प्रशासनिक अमला हरकत में आया है। अब इस पूरे प्रकरण की परतों को खोलने के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच दल का गठन किया गया है, जिसे महज तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

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शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जिले में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के दौरान कलेक्टर और जिला स्तरीय समिति के निर्णयों को दरकिनार कर मनमर्जी से नियुक्तियां की गईं। आरोप है कि तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे ने उन प्रकरणों को भी स्वीकृति दे दी.

जिन्हें पूर्व के डीईओ अनिल तिवारी ने नियमों के विरुद्ध मानकर खारिज कर दिया था। बिना कलेक्टर की अनुशंसा और सहमति के, उन शिक्षकों को भी मनचाही जगहों पर पदस्थापना दे दी गई जिनके अभ्यावेदनों को जिला समिति पहले ही अमान्य कर चुकी थी। इस पूरे खेल में न केवल नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि वरिष्ठता सूची और गाइडलाइन को भी ताक पर रख दिया गया, जिससे पात्र शिक्षक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

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पदोन्नति के मामले में भी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। शिकायतकर्ता संजय कुमार पाण्डेय और यशपाल कुमार चौबे के अनुसार, दिसंबर 2024 में 162 शिक्षकों को प्रधान पाठक के पद पर पदोन्नति दी गई थी, लेकिन असली फर्जीवाड़ा मार्च 2026 में हुआ।

आरोप है कि विभाग के कुछ अधिकारियों ने पुरानी वेटिंग लिस्ट की आड़ लेकर नियमों के विरुद्ध पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इतना ही नहीं, तत्कालीन डीईओ और विधि खंड प्रभारी सुनील यादव पर आरोप है कि उन्होंने कलेक्टर के समक्ष फाइलें प्रस्तुत किए बिना ही कई अभ्यावेदनों को अपनी मर्जी से अमान्य कर दिया। इस कथित सिंडिकेट ने न केवल प्रशासनिक मर्यादाओं को लांघा, बल्कि शिक्षा विभाग की छवि को भी धूमिल किया है।

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मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत के बाद अब जांच की आंच उन अधिकारियों और बाबुओं तक पहुंच सकती है जो इस पूरे फर्जीवाड़े के सूत्रधार माने जा रहे हैं। जांच दल में हायर सेकेंडरी स्कूल बिरकोना के प्राचार्य कामेश्वर बैरागी, बैमा के प्राचार्य एसके कश्यप और बिल्हा की असिस्टेंट बीईओ दीप्ति गुप्ता को शामिल किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने स्कूल शिक्षा सचिव और डीपीआई (DPI) से मांग की है कि सभी अवैध पदोन्नति और युक्तियुक्तकरण संशोधनों को तत्काल निरस्त किया जाए और इस भ्रष्टाचार में शामिल दोषियों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।