mahashivratri 2026 jalabhishek niyam/ फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला ‘महाशिवरात्रि’ का पर्व शिव भक्तों के लिए सबसे बड़ा दिन होता है। इस दिन महादेव की विधि-विधान से पूजा करने से न केवल कष्टों का निवारण होता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि का वास भी होता है।

अक्सर भक्त श्रद्धा में शिवलिंग पर जल तो अर्पित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवपुराण (विद्येश्वर और कोटिरुद्र संहिता) में जलाभिषेक के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं? गलत दिशा या गलत तरीके से जल चढ़ाना उतना फलदायी नहीं होता जितना विधिपूर्वक किया गया अभिषेक। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का सही तरीका, शुभ मुहूर्त और विशेष मंत्र।

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महाशिवरात्रि 2026: जलाभिषेक के लिए शुभ मुहूर्त/mahashivratri 2026 jalabhishek niyam

महाशिवरात्रि पर इस बार जलाभिषेक के लिए दो विशेष समय अत्यंत लाभकारी रहने वाले हैं:

  • सुबह का मुहूर्त: सुबह 08:24 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक।

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  • शाम का मुहूर्त: शाम 06:11 बजे से रात 07:47 बजे तक।

किस दिशा में मुख करके चढ़ाएं जल?

शिवपुराण के अनुसार, दिशा का ध्यान रखना अनिवार्य है:

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  1. उत्तर दिशा (सर्वश्रेष्ठ): शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुख करके खड़ा होना चाहिए। उत्तर दिशा को भगवान शिव का बायां अंग और माता पार्वती का स्थान माना गया है। इस दिशा में मुख करना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी होता है।

  2. पूर्व दिशा से बचें: कभी भी पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित न करें। मान्यता है कि पूर्व दिशा महादेव का मुख्य प्रवेश द्वार है और इस ओर खड़े होना उनके मार्ग में बाधा डालने के समान माना जाता है।

शिवपुराण के अनुसार जलाभिषेक की चरणबद्ध विधि/mahashivratri 2026 jalabhishek niyam

भगवान शिव को जल हमेशा शांत मन से और बहुत धीरे-धीरे (धार के रूप में) अर्पित करना चाहिए। अभिषेक के लिए तांबे, चांदी या पीतल के पात्र का उपयोग करें।

जलाभिषेक का सही क्रम इस प्रकार है:

  1. भगवान गणेश: सबसे पहले जलहरी के दाईं ओर जल चढ़ाएं, यह स्थान प्रथम पूज्य गणेश जी का है। (मंत्र: ॐ गणेशाय नमः)

  2. भगवान कार्तिकेय: इसके बाद जलहरी के बाईं ओर जल अर्पित करें, जो शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय का स्थान है। (मंत्र: ॐ कार्तिकेयाय नमः)

  3. माता अशोक सुंदरी: अब जलहरी के मध्य भाग में जल चढ़ाएं, जो शिव की पुत्री अशोक सुंदरी का स्थान माना जाता है। (मंत्र: ॐ क्लीं ऐं ह्रीं अशोक सुन्दर्यै स्वाहा)

  4. माता पार्वती: फिर जलधारी के गोलाकार भाग (कटी भाग) में जल अर्पित करें। यह माता पार्वती के हस्तकमल का प्रतीक है।

  5. शिवलिंग (महादेव): अंत में शिवलिंग के ऊपर धीरे-धीरे जल की धार छोड़ें और मन में “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।

पूजा में किन चीजों को करें शामिल?mahashivratri 2026 jalabhishek niyam

जलाभिषेक के साथ-साथ महादेव को प्रसन्न करने के लिए पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से भी अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन, अक्षत (बिना टूटे चावल), भांग, मौसमी फल और मिठाई अर्पित करें।