बिलासपुर…फसल की जानकारी अब केवल कागजों में दर्ज आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी। प्रशासन खेत तक पहुंचकर यह देख रहा है कि रिकॉर्ड में दर्ज खसरा नंबर की जमीन पर वास्तव में कौन-सी फसल खड़ी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को अपर कलेक्टर वीरेंद्र बहादुर पंचभाई तहसील बिल्हा के ग्राम मोहदा पहुंचे और फसल भौतिक सत्यापन की जमीनी प्रक्रिया देखी।

मौके पर पहुंचकर उन्होंने फसल भौतिक सत्यापन ऐप में दर्ज खसरा नंबरों के आधार पर खेतों का सत्यापन देखा। संबंधित जमीन पर पहुंचकर वहां मौजूद फसल की स्थिति का मिलान किया गया। इसके साथ ही खेत की वास्तविक स्थिति को दर्ज करने के लिए उसकी लॉन्गिट्यूड और लैटिट्यूड भी ऐप में दर्ज किए जा रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर ने मौके पर काम कर रहे अधिकारियों-कर्मचारियों से सत्यापन की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने साफ कहा कि रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और खेत की वास्तविक स्थिति में अंतर नहीं होना चाहिए। मौके पर जो फसल दिखाई दे रही है, उसी के आधार पर सटीक जानकारी दर्ज की जाए, ताकि आगे तैयार होने वाला आंकड़ा जमीन की वास्तविक तस्वीर के करीब हो।

दरअसल, फसल भौतिक सत्यापन की यह प्रक्रिया खेत में खड़ी फसल को राजस्व रिकॉर्ड से जोड़ने का काम कर रही है। इसमें खसरा नंबर के आधार पर संबंधित खेत तक पहुंचकर फसल की स्थिति देखी जा रही है और जियो-लोकेशन के जरिए मौके की जानकारी भी दर्ज हो रही है। इससे फसल संबंधी आंकड़ों को अधिक सटीक और मौके की स्थिति पर आधारित बनाने की कोशिश है।

मोहदा में निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आकांक्षा त्रिपाठी, तहसीलदार, भू-अभिलेख अधीक्षक, नायब तहसीलदार, पटवारी और सर्वेयर सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।