बिलासपुर… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर देशभर में मनाए जा रहे ‘सेवा से संकल्प’ अभियान के तहत बिलासपुर में भी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पत्रकार वार्ता कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन और उनके कार्यकाल की उपलब्धियों को सामने रखा। हालांकि, प्रधानमंत्री के सेवा-संकल्प और उपलब्धियों की चर्चा से शुरू हुई पत्रकार वार्ता जल्द ही बिलासपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था, सरकारी अस्पतालों में खरीदी और आयुष्मान योजना के भुगतान जैसे स्थानीय मुद्दों पर पहुंच गई। सवाल इतने सीधे थे कि स्वास्थ्य मंत्री को अंततः जेम के जरिए हुई खरीदी से जुड़े मामले की जांच कराने का आश्वासन देना पड़ा।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों में स्वयं को जनता की सेवा के लिए समर्पित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की विदेश नीति, कूटनीति, नक्सल उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भारत की स्थिति विश्व में मजबूत हुई है। ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को करारा जवाब दिया गया है और नक्सलवाद के खिलाफ भी निर्णायक अभियान चलाया गया है।

मंत्री ने किसान, युवा और महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं का भी उल्लेख किया। जनधन योजना, उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत को सरकार की उपलब्धियों से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने आम लोगों के जीवन में बदलाव लाया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का छत्तीसगढ़ से विशेष लगाव रहा है और प्रदेश को केंद्र सरकार के सहयोग का लाभ मिला है। सड़क, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का भी उन्होंने उल्लेख किया।

लेकिन पत्रकार वार्ता का रुख तब बदल गया, जब पत्रकारों ने उपलब्धियों के साथ बिलासपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था का भी हिसाब मांगना शुरू किया। सवाल उठाया गया कि सिम्स सहित जिले के सरकारी अस्पतालों में जेम के माध्यम से करोड़ों रुपये की खरीदी हुई है। आरोप है कि कुछ मामलों में डॉक्टरों के समूह बनाकर खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई। एक ही तरह की मशीन दो बार मंगाए जाने और पुरानी मशीन को नई दर पर खरीदे जाने जैसे सवाल भी सामने रखे गए।

पत्रकारों ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन को जब ‘सेवा से संकल्प’ के रूप में मनाया जा रहा है, तब सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये की खरीदी से जुड़े ऐसे आरोपों की जांच कौन करेगा? क्या सेवा का संकल्प सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने तक भी पहुंचेगा?

शुरुआत में स्वास्थ्य मंत्री ने क्षेत्रीय स्तर के सवाल पूछे जाने पर आपत्ति जताई, लेकिन लगातार सवालों के बाद उन्होंने बिलासपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने आयुर्वेदिक अस्पताल, मल्टी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और सिम्स की सुविधाओं के विस्तार के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की बात कही। उन्होंने नए सिम्स की स्थापना का भी उल्लेख किया।

पत्रकारों ने फिर सवाल को मूल मुद्दे पर लौटाया। पूछा गया कि जब जेम के माध्यम से खरीदी में डॉक्टरों की भूमिका, करोड़ों की मशीनों की खरीदी, एक ही मशीन की दो-दो बार खरीदी और पुरानी मशीन को नई दर पर लेने जैसे आरोप सामने आ रहे हैं, तो क्या इसकी जांच होगी? लगातार सवालों के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मामले की जांच-पड़ताल कराई जाएगी।

पत्रकार वार्ता में आयुष्मान योजना भी सवालों के घेरे में रही। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आयुष्मान कार्ड के माध्यम से प्रदेश में सभी वर्गों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पर पत्रकारों ने सवाल किया कि जब सरकारी अस्पतालों में ही आयुष्मान योजना के करोड़ों रुपये के भुगतान लंबित होने की बात सामने आती है, तो निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज करने में रुचि क्यों दिखाएंगे?

अपोलो अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से इलाज शुरू कराने को लेकर भी सवाल उठा। पत्रकारों ने पूछा कि बिलासपुर के विधायक की ओर से इस संबंध में अपोलो प्रबंधन से बातचीत की गई थी, लेकिन इसका क्या परिणाम निकला? इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आयुष्मान योजना के भुगतान लगातार किए जा रहे हैं। यदि कहीं भुगतान लंबित है तो सरकारी अस्पतालों से जानकारी लेकर पता लगाया जाएगा कि भुगतान क्यों रुका है। निजी अस्पतालों के लंबित भुगतान का भी निराकरण करने की बात उन्होंने कही।

इसी बीच बिलासपुर विधायक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपोलो अस्पताल में आयुष्मान कार्ड शुरू कराने के लिए धरना-प्रदर्शन नहीं किया था, बल्कि अस्पताल प्रबंधन से मुलाकात की थी। पत्रकारों ने जब पूछा कि उस मुलाकात का परिणाम क्या निकला, तो जवाब में बताया गया कि कैंसर अस्पताल अथवा कैंसर के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड स्वीकार करने पर अपोलो ने सहमति जताई है।

पत्रकारों ने इसके बाद सवाल उठाया कि जब स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था, सरकारी अस्पतालों में भुगतान, जेम खरीदी और कथित अनियमितताओं जैसे सवालों का समाधान नहीं हो रहा है, तब ‘सेवा से संकल्प’ अभियान का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है? सवाल यह भी था कि जब सरकार एक ही है और सेवा के साथ संकल्प की बात की जा रही है, तो फिर स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों पर जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उसी संकल्प का हिस्सा होना चाहिए।

लगातार सवालों के बीच पत्रकारों ने स्वास्थ्य मंत्री से कुछ और सवाल पूछने चाहे। इस दौरान मंत्री ने जवाब देने के बजाय वहां से उठने का प्रयास किया। पत्रकारों ने तत्काल सवालों के जवाब देने की मांग की। इसके बाद कुछ देर तक सवाल-जवाब का माहौल बना रहा और अंततः पत्रकारों ने सवाल पूछना बंद कर दिया।

इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन और ‘सेवा से संकल्प’ अभियान की उपलब्धियों से शुरू हुई पत्रकार वार्ता का बड़ा हिस्सा बिलासपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था के उन सवालों में उलझ गया, जिनका सीधा संबंध आम मरीज और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था से है। जेम खरीदी में कथित गड़बड़ी की जांच कराने का स्वास्थ्य मंत्री का आश्वासन अब इस पत्रकार वार्ता का सबसे अहम निष्कर्ष बन गया है।