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Mutual Fund SIP- SIP निवेश में ये 10 गलतियां कर सकती हैं आपके रिटर्न को कमजोर, जानिए कैसे बनाएं मजबूत फाइनेंशियल भविष्य

अक्सर निवेशक एसआईपी के माध्यम से निवेश करते समय कुछ गलतियां कर देते हैं. जिसमें बाजार की गिरावट में SIP बंद करना या बहुत छोटे अंतराल के लिए निवेश करना शामिल है. लेकिन अधिकतम रिटर्न पाने के लिए समय-समय पर SIP की राशि बढ़ाना (Step-up) और लंबी अवधि तक टिके रहने काफी जरूरी है. जानकार बिना किसी फाइनेंशियल गोल के निवेश करने के नुकसान और सही फंड चुनने की सलाह देते हैं.

Mutual Fund SIP/सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश आज के समय में एक लोकप्रिय और प्रभावी तरीका बन चुका है, जो निवेशकों को अनुशासन, सुविधा और कंपाउंडिंग का लाभ देता है।

Mutual Fund SIP/हर महीने नियमित निवेश के जरिए ‘रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग’ का फायदा मिलता है, जिससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर संतुलित हो जाता है। हालांकि, कई निवेशक SIP शुरू तो करते हैं, लेकिन कुछ सामान्य गलतियों के कारण अपेक्षित रिटर्न हासिल नहीं कर पाते।

सबसे बड़ी गलती तब होती है जब निवेशक बाजार में गिरावट आने पर घबराकर SIP बंद कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गिरते बाजार में निवेश जारी रखना अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि इस दौरान कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। इसी तरह, समय के साथ SIP की रकम न बढ़ाना भी एक बड़ी चूक है। आय बढ़ने के साथ निवेश में बढ़ोतरी करने से लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।

कई निवेशक हाल ही में अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंड्स के पीछे भागते हैं, जबकि बाजार का स्वभाव चक्रीय होता है। इसलिए केवल शॉर्ट टर्म रिटर्न के आधार पर निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है। बिना स्पष्ट लक्ष्य के निवेश करना भी नुकसानदायक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे सही फंड और निवेश राशि का चयन कठिन हो जाता है।

Mutual Fund SIP/इसके अलावा, जरूरत से ज्यादा डाइवर्सिफिकेशन भी रिटर्न को प्रभावित करता है। बहुत ज्यादा फंड्स में निवेश करने से पोर्टफोलियो बिखर जाता है और उसका प्रभाव कम हो जाता है। निवेशकों को अपनी जरूरत और लक्ष्य के अनुसार सीमित और संतुलित फंड्स का चयन करना चाहिए।

एसेट एलोकेशन को नजरअंदाज करना भी एक अहम गलती है। केवल एक ही एसेट क्लास पर निर्भर रहने से जोखिम बढ़ जाता है, जबकि इक्विटी, डेट और गोल्ड जैसे विकल्पों में संतुलित निवेश से जोखिम कम किया जा सकता है। साथ ही, निवेश की नियमित समीक्षा न करना भी नुकसानदायक हो सकता है। साल में कम से कम एक बार पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूरी है ताकि खराब प्रदर्शन करने वाले फंड्स को बदला जा सके।

भावनाओं के आधार पर निवेश निर्णय लेना, जैसे बाजार गिरने पर निवेश बेच देना, लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, बिना इमरजेंसी फंड बनाए SIP शुरू करना भी जोखिम भरा है, क्योंकि अचानक जरूरत पड़ने पर निवेश तोड़ना पड़ सकता है।

Mutual Fund SIP/अंत में, अवास्तविक रिटर्न की उम्मीद रखना भी निवेशकों को निराश कर सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इक्विटी फंड्स से लंबे समय में औसतन 10-12% सालाना रिटर्न की उम्मीद रखना व्यावहारिक है।

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