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बडी खबर; हाईकोर्ट के नाम पर पोस्टिंग का खेल: बिलासपुर शिक्षा विभाग में ‘ऑर्डर’ बने सेटिंग का हथियार

डीपीआई के फैसले के बाद भी बदली पदस्थापनाएं, आदेशों में “हाईकोर्ट के निर्देशानुसार” लिखकर मनमानी

बिलासपुर..जिला शिक्षा विभाग में हाईकोर्ट के निर्देश और डीपीआई के आदेशों की आड़ लेकर शिक्षकों की पदस्थापनाएं बदले जाने का मामला सामने आया है। दस्तावेज़ बताते हैं—जहां नई पदस्थापना का कोई निर्देश नहीं था, वहीं आदेशों में हाईकोर्ट का हवाला देकर शासन के निर्देशों के खिलाफ जाते हुए शिक्षकों को मनचाही जगह भेजा गया। पूरी प्रक्रिया में एक ही पैटर्न पाया गया कि—हाईकोर्ट का निर्देश कुछ और, डीपीआई का आदेश कुछ और, और जमीन पर कार्रवाई उससे बिल्कुल अलग.

27 दिसंबर 2024 को सहायक शिक्षकों को प्रधान पाठक पद पर प्रमोशन दिया गया। यह प्रक्रिया 29 मार्च 2023 के विभागीय निर्देशों के तहत शुरू हुई। काउंसिलिंग के दौरान विवाद हुआ और पांच शिक्षक हाईकोर्ट पहुंचे। 16 अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता डीपीआई के सामने अभ्यावेदन दें। इसके बाद 4 सितंबर 2025 को डीपीआई ने सभी अभ्यावेदन खारिज करते हुए साफ कर दिया कि पहले से जारी पदस्थापनाएं ही वैध हैं। यानी—न हाईकोर्ट ने नई पोस्टिंग को कहा, न डीपीआई ने कोई संशोधन आदेश दिया।

यहीं से मामला बदलता है। डीपीआई के आदेश के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थापनाएं बदली गईं। बिना नई काउंसिलिंग के संशोधित आदेश जारी हुए और हर आदेश में “हाईकोर्ट के निर्देशानुसार” लिख दिया गया। जबकि उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसा कोई निर्देश दर्ज नहीं है। दस्तावेज़ बताते हैं कि मूल और बदली हुई पदस्थापना में साफ अंतर है।

दस्तावेज़ों में यह भी सामने आया कि जिन पांच  शिक्षकों की पदस्थापना पहले ग्रामीण स्कूलों में थी, उन्हें बाद में शहर या आसपास के स्कूलों में भेजा गया। रिकॉर्ड के अनुसार हलधर साहू, क्षिप्रा बघेल और सूरज कुमार सोनी जैसे मामलों में “हाईकोर्ट के निर्देशानुसार” लिखकर जारी आदेश, मूल पदस्थापना से अलग पाए गए। यह बदलाव सामान्य प्रक्रिया जैसा नहीं दिखता, बल्कि चयनित हस्तक्षेप की ओर इशारा करता है।

शुरुआत कुछ याचिकाकर्ताओं तक सीमित रही, लेकिन बाद में यही तरीका बड़े स्तर पर लागू हुआ। सूत्र बताते हैं कि कोर्ट जाने वाले पाँच शिक्षकों के अलावा इसी आधार पर लगभग दस अन्य शिक्षकों की भी पदस्थापनाएं बदली गईं, जहां मनचाही पोस्टिंग के अनुसार आदेश जारी किए गए। हर बार आदेश में “हाईकोर्ट के निर्देशानुसार” का उल्लेख किया गया, जबकि डीपीआई के आदेश में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था।

इसके बाद वेटिंग लिस्ट के नाम पर भी पदस्थापनाएं की गईं। तीन साल पुरानी डीपीसी का आधार लिया गया, जबकि नियम के अनुसार वेटिंग लिस्ट एक साल तक ही मान्य होती है। इसके बावजूद आदेश जारी करते समय फिर वही आधार लिखा गया—“हाईकोर्ट के निर्देशानुसार आंशिक संशोधन”।

प्रमोशन आदेश में साफ लिखा था कि समय पर जॉइन नहीं करने पर पदस्थापना स्वतः निरस्त मानी जाएगी, लेकिन ऐसे मामलों में भी बाद में संशोधन कर पोस्टिंग दी गई। यहाँ भी आदेशों में “हाईकोर्ट के निर्देशानुसार” का हवाला दिया गया, जबकि मूल निर्देश इससे अलग थे।

पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यही है कि हाईकोर्ट ने केवल अभ्यावेदन पर निर्णय लेने को कहा था और डीपीआई ने उस पर निर्णय भी दे दिया था। इसके बावजूद “हाईकोर्ट के निर्देशानुसार” लिखकर नई पदस्थापनाएं की गईं। कानूनी जानकार मानते हैं कि इस तरह आदेशों की व्याख्या बदलकर निर्णय लेना अवमानना की स्थिति तक पहुंच सकता है।

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि सभी फैसले शासन के निर्देशों के अनुसार लिए गए हैं, लेकिन दस्तावेज़ों में बार-बार हाईकोर्ट का निर्देश का हवाला देकर वास्तविक आदेशों में अंतर इस दावे पर सवाल खड़ा करता है।

सवाल सीधा है—जब न हाईकोर्ट ने नई पोस्टिंग का निर्देश दिया, न डीपीआई ने, तो फिर हाईकोर्ट के निर्देशानुसार लिखकर पदस्थापनाएं क्यों बदली गईं? एक तरफ कोर्ट और डीपीआई के आदेश, दूसरी तरफ उनके उलट फैसले—यही अंतर अब पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना है कि जिम्मेदारी तय होती है या मामला फाइलों में दबकर रह जाता है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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