बिलासपुर—- समग्र ब्राह्मण मातृशक्ति परिषद् ने सरकंडा स्थित शिव हनुमान मंदिर परिसर में भगवान परशुराम जंयति को धूम धाम से मनाया। भगवान परशु राम के अवतरण दिवस पर सभी ने समग्र समाज,जिला और प्रदेश की खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगा। विप्र महिलाओं ने बताया कि भगवान का अवतार ना केवल किसी धर्म विशेष बल्कि समग्र राष्ट्र के विकास और खुशहाली के लिए होता है। उनका जीवन ही हमारे आदर्श होता है। भगवान परशुराम सही मायनों में देश में लोकतंत्र के प्रथम दृष्टा थे। इस दौरान संगठन की महिलाओं ने बैठक जल्द ही समग्र ब्राह्मण मातृशख्ति परिषद संगठन की विस्तार किए जाने की बात कही।
 विप्र समाज की महिलाओं ने समग्र ब्राम्हण मातृशक्ति के बैनर तले भगवान परशुराम जयंति को धूमधाम से मनाने का फैसला किया। इसके पहले सभी महिलाओं ने भगवान परशुराम के छायाचित्र पर फूल माला चढ़ाकर अपना श्रद्धा सुमन भेंट किया। चर्चा के दारन बताया कि भगवान परशुराम का जन्म त्रेता युग में ठीक वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतिया में हुआ। ओजस्वी बालक भगवान परशुराम ने अपने माता पिता के सबसे योग्य और आज्ञाकारी पुत्र थे। मातृ और पितृ के लिए समर्पित भगवान राम ने हमेशा मातृभूमि को माता की संज्ञा दी । उन्होने देश की सीमाओं को निर्धारित किया। ब्राम्हण को मनसा वाचा कर्मणा के योग्य बनाया। जब जब देश पर संकट के बादल छाए..उन्होने पृथ्वी को रहने योग्य बनाया। महिलाओं ने पूजा अर्चना के बाद प्रसाद का भी वितरण किया।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए समग्र ब्राह्मण मातृशक्ति परिषद् विस्तार पर चर्चा हुई। प्रदेश संगठन विस्तार प्रमुख राही दुबे ने बताया कि परशुराम का अवतरण दिवस धूम धाम से गरिमा के साथ मनाया गया है। पूजा के बाद मंदिर के सामने प्रांगण में दीपक के आकार में सभी ने दीप प्रज्वलित किया। सभी विप्र महिलाओं ने  22 अप्रैल ‌को पहलगाम में आतंकवादी घटना को दुर्दान्त बताया। राही दुबे समेत सभी ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। 26 निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित कर आतंकवादियों के कृत्य को राक्षसी प्रवृत्ति बताया।
इस अवसर पर चंद्रकांता गौराहा, श्वेता शर्मा, उर्वशी शर्मा, रमा दीवान, निलिमा शर्मा, शशि द्विवेदी, प्रीति पांडेय, स्वीटी शर्मा, स्वाति दीवान, दुर्गा शर्मा,उमा शुक्ला,अनिता गुरुदीवान,अनिता दुबे, विभा पांडेय, गीता तिवारी, सरिता तिवारी, पुष्पा तिवारी, पुष्पा दुबे, वंदना शर्मा, मदालसा तिवारी, अल्का पांडेय समेत समाज की गणमान्य महिलाएं मौजूद थीं।