बिलासपुर..शिक्षाकर्मी आंदोलन के दौर से लेकर शिक्षक संवर्ग के रूप में अपनी पहचान बनाने तक लंबा संघर्ष देख चुके शिक्षक एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा की अगुवाई में मंगलवार को सैकड़ों शिक्षकों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया और अपनी लंबित मांगों को लेकर जिला प्रशासन के सामने गंभीरता से पक्ष रखा।

शिक्षकों के प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्टोरेट परिसर में काफी देर तक गहमागहमी बनी रही। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें केवल वेतन या पदोन्नति से जुड़ा मामला नहीं हैं, बल्कि सेवा शर्तों, पुरानी सेवा की गणना और शिक्षक संवर्ग के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न हैं। शिक्षक नेताओं ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र भी भेजा।

ये खबर भी पढ़ें…
सरकारी गाड़ी बनी निजी सवारी! मुंगेली खनिज विभाग के ड्राइवर की ‘साहब वाली छूट’ पर सवाल, रतनपुर में रोज सुबह-शाम खड़ी मिलती है सरकारी बोलेरो
सरकारी गाड़ी बनी निजी सवारी! मुंगेली खनिज विभाग के ड्राइवर की ‘साहब वाली छूट’ पर सवाल, रतनपुर में रोज सुबह-शाम खड़ी मिलती है सरकारी बोलेरो
मुंगेली..सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर नियम-कायदे भले ही स्पष्ट हों, लेकिन मुंगेली खनिज विभाग की सरकारी गाड़ी को लेकर...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने.सेवा गणना तक मांग

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने अपने ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगों को सामने रखा है। इनमें सहायक शिक्षक संवर्ग के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त कर सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख है। ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है, ऐसे में पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता समाप्त की जानी चाहिए।

ये खबर भी पढ़ें…
मां के इलाज के लिए पहुंचे थे, कुछ देर बाद मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पहुंच गई शिकायत! 4 सितंबर को जुनेजा अस्पताल में आखिर क्या हुआ?
मां के इलाज के लिए पहुंचे थे, कुछ देर बाद मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पहुंच गई शिकायत! 4 सितंबर को जुनेजा अस्पताल में आखिर क्या हुआ?
बिलासपुर...मरीज और उसके परिजन अस्पताल में इलाज और सम्मान की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन अगर डॉक्टर पर ही अभद्र...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

शिक्षकों ने पंचायत संवर्ग में प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना करते हुए पुरानी पेंशन समेत शिक्षा विभाग में लागू सभी लाभ देने की मांग भी उठाई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि अलग-अलग संवर्ग और नियुक्ति व्यवस्था के कारण वर्षों की सेवा के बावजूद शिक्षकों को सेवा लाभ के मामले में विसंगतियों का सामना करना पड़ रहा है।

केंद्रीय वेतनमान और राजपत्र संशोधन भी

ये खबर भी पढ़ें…
DEO की कुर्सी पर 18 साल की वरिष्ठता का दावा धरा रह गया! हाई कोर्ट में याचिका वापस, रामेश्वर जायसवाल का प्रभार बरकरार
DEO की कुर्सी पर 18 साल की वरिष्ठता का दावा धरा रह गया! हाई कोर्ट में याचिका वापस, रामेश्वर जायसवाल का प्रभार बरकरार
बिलासपुर... बिलासपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

मोर्चा ने सभी शिक्षक संवर्गों में लंबित वेतन विसंगति दूर करने के लिए केंद्रीय वेतनमान संरचना के आधार पर वेतन निर्धारण की मांग रखी है। इसके साथ ही 13 फरवरी 2026 को जारी छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा संबंधी राजपत्र में आवश्यक संशोधन की मांग की गई है, ताकि शिक्षक एवं प्रशासनिक संवर्ग के हितों का समुचित संरक्षण हो सके।

एक अन्य महत्वपूर्ण मांग में ऐसे शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग स्तर पर योजना बनाकर ब्रिज कोर्स के माध्यम से बीएड प्रशिक्षण सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

शिक्षाकर्मी आंदोलन की विरासत, फिर मैदान में

शिक्षकों के प्रदर्शन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि कभी शिक्षाकर्मी के रूप में अपनी सेवा शर्तों और अधिकारों के लिए आंदोलन करने वाला वही वर्ग अब शिक्षक संवर्ग में रहते हुए नई मांगों के लिए संघर्ष के मैदान में दिखाई दिया। शिक्षक नेताओं का कहना है कि आंदोलन के जरिए ही शिक्षाकर्मी संवर्ग ने समय-समय पर अपनी समस्याएं सरकार के सामने मजबूती से रखीं और कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। अब सेवा संबंधी विसंगतियों के निराकरण के लिए एक बार फिर सामूहिक आवाज उठानी पड़ रही है।

प्रदेश संयोजक संजय शर्मा ने शिक्षकों की मांगों को गंभीर बताते हुए सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपेक्षा जताई। उनका कहना है कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट रहे, लेकिन वर्षों से लंबित सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। मोर्चा ने मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक रूप देने की चेतावनी दी है।

कलेक्टर संजय अग्रवाल तक पहुंचा शिक्षकों का संदेश

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने जिला प्रशासन के सामने अपनी बात मजबूती से रखी और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रशासन को संदेश भी स्पष्ट किया कि मांगों को केवल ज्ञापन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि शासन स्तर पर उनके शीघ्र निराकरण की पहल हो।

सैकड़ों शिक्षकों की मौजूदगी और लगातार होती नारेबाजी ने प्रदर्शन को महज ज्ञापन सौंपने की औपचारिकता नहीं रहने दिया। यह प्रदर्शन शिक्षक संवर्ग के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और लंबित सेवा मांगों को लेकर सामूहिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में सामने आया। अब निगाहें शासन के अगले कदम पर हैं—मांगों पर समाधान निकलता है या शिक्षक संघर्ष मोर्चा अपने आंदोलन को अगले चरण में ले जाता है।