जशपुर/दुर्ग। (मनीष जायसवाल) टीईटी, पदोन्नति और शिक्षकों से जुड़ी दूसरी मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच मंगलवार की देर रात अचानक वार्ता की खबर सामने आई।

27 अगस्त को मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के आवास तक प्रस्तावित पदयात्रा से पहले दिन में दुर्ग-भिलाई जिला प्रशासन ने शिक्षक साझा मंच के प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाया था।

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बैठक में एडीएम दुर्ग, पुलिस प्रशासन के अधिकारियों और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि मौजूद रहे। आंदोलन और शिक्षकों की मांगों पर चर्चा के बाद शिक्षक संगठनों को वार्ता के लिए बुधवार को बुलाया गया है।

शिक्षक साझा मंच के मार्गदर्शक और छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश संयोजक मनीष मिश्रा ने बुधवार को होने वाली वार्ता को लेकर बताया कि आंदोलन के बीच इस तरह की वार्ताएं होती रहती हैं। इसे ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।

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मनीष मिश्रा का कहना है कि 27 अगस्त को मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री आवास तक प्रस्तावित पदयात्रा और इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उनके मुताबिक टीईटी पीड़ित शिक्षक अब आर-पार के मूड में हैं।

मनीष मिश्रा ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर आंदोलन में एक अलग संदेश भी देखने को मिलेगा। शिक्षक साझा मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिक्षिकाएं मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम रक्षासूत्र बांधकर शिक्षक समाज की सेवा, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा का संदेश देंगी।

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जशपुर/बगिया:(मनीष जायसवाल) छत्तीसगढ़ के शिक्षक आंदोलन में बुधवार का दिन संवाद के लिहाज से अहम रहा। दिन में स्कूल शिक्षा...
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आंदोलन को प्रदेश के दो हिस्सों में बांटकर इसकी जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग के शिक्षक स्कूल शिक्षा मंत्री के गृह निवास दुर्ग पहुंचेंगे, जबकि बिलासपुर और सरगुजा संभाग के शिक्षक मुख्यमंत्री निवास बगिया, जशपुर की ओर पदयात्रा करेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निवास बगिया तक पदयात्रा की कमान संभाल रहे मनीष मिश्रा, कौशल अवस्थी और अश्वनी कुर्रे , दिनेश नायक और आदित्य गौरव साहू का कहना है कि सरकारों ने समय-समय पर उन्हें आश्वासन दिए हैं और जरूरत पड़ने पर शिक्षक संगठनों ने भी सरकारों को अपने स्तर पर आश्वासन दिए हैं।

अब उन्हें मंत्री के साथ होने वाली वार्ता से समाधान निकलने का भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि स्कूल शिक्षा मंत्री ने अब तक शिक्षक संगठनों के साथ उस तरह बैठक नहीं की है, जिस तरह विभागीय अधिकारियों के साथ बैठकें होती हैं।

शिक्षक नेताओं ने समाधान का रास्ता भी बताया है। उनका कहना है कि सरकार सेवारत शिक्षकों के लिए विभागीय टीईटी साल में दो से तीन बार कराए, परीक्षा की तैयारी के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दे और पदोन्नति पर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय टीईटी पास करने का अवसर दे।

इसके साथ मोदी की गारंटी में शामिल सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने के लिए ठोस रोड मैप सामने आता है तो बातचीत को समाधान की दिशा मिल सकती है।

दुर्ग में स्कूल शिक्षा मंत्री के निवास तक होने वाली पदयात्रा की कमान संभाल रहे शिक्षक साझा मंच के संचालक और फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौड़ का कहना है कि आंदोलन के तीसरे चरण की तैयारी पूरी हो चुकी है। शिक्षा मंत्री की ओर से वार्ता के लिए बुलावा आया है। अब वार्ता के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।

इस बीच टीईटी को लेकर विभागीय परीक्षा, पदोन्नति में जल्दबाजी के जरिए शिक्षकों को अलग-अलग खेमों में बांटने की कोशिश और स्कूल शिक्षा विभाग की दूसरी नीतियों के विरोध में शिक्षक संगठनों ने सरकार के करीब दो साल आठ महीने के कार्यकाल में अगस्त क्रांति की मशाल जलाई है।

मंगलवार की देर रात जब स्कूल शिक्षा मंत्री के साथ बुधवार को शिक्षक संगठनों की वार्ता की खबर आई तो इसे आंदोलन के बीच सरकार की ओर से पहली बड़ी पहल के रूप में देखा गया। वार्ता के लिए शिक्षक साझा मंच से रविंद्र राठौड़, विकास राजपूत और प्रदीप पांडे, उनके समर्थन में आए एकता मंच से कृष्ण कुमार नवरंग और लेलून भारद्वाज को बुलाया गया है। शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और केदार जैन को भी वार्ता के लिए बुलावा भेजा गया है।

अगस्त क्रांति की यह मशाल 17 अगस्त को बेमेतरा से उठी थी। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, नवीन शिक्षक संघ और सर्व शिक्षक संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव कर आंदोलन के पहले चरण की शुरुआत की। इसके बाद 22 अगस्त को प्रदेश के 146 ब्लॉक में एक दिन का धरना देकर ज्ञापन सौंपा गया।

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने 25 अगस्त को प्रदेश के सभी ब्लॉक मुख्यालयों में धरना दिया, रैली निकाली और जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा।

अब 27 अगस्त की पदयात्रा सामने है। प्रशासन ने बातचीत का रास्ता खोला है, शिक्षक संगठनों ने भी वार्ता से इनकार नहीं किया है, लेकिन आंदोलन का कार्यक्रम भी यथावत रखा गया है। ऐसे में बुधवार की वार्ता पर सबकी नजर रहेगी कि बातचीत आंदोलन को नई दिशा देती है या शिक्षक संगठन अपनी पदयात्रा और अनिश्चितकालीन हड़ताल के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं।