रायपुर (मनीष जायसवाल ) । राजनीति में जो दिखाई देता है, कहानी अक्सर उससे कुछ आगे की होती है। सामने बैठक होती है, नेता मिलते हैं, आश्वासन दिए जाते हैं और तस्वीरें सामने आती हैं, लेकिन उसके पीछे कई दिनों से चल रही हलचल अपना काम कर चुकी होती है। टीईटी विवाद में बुधवार को शिक्षा मंत्री से शिक्षक संगठनों की मुलाकात को भी इसी नजरिए से देखा जा सकता है।

देर रात सत्ता पक्ष के एक विधायक की ओर से मिले संकेत ने बुधवार की सुबह तक तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी थी कि सरकार विभागीय टीईटी के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। दोपहर की बैठक ने उस संकेत को सार्वजनिक सहमति में बदल दिया।

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असल में इस मुलाकात की अहमियत विभागीय टीईटी की घोषणा से कहीं ज्यादा है। पिछले कुछ दिनों से शिक्षक आंदोलन में जो आक्रोश दिखाई दे रहा था, वह अब सरकार के राजनीतिक नेतृत्व तक पहुंचने की तैयारी में था।

शिक्षक साझा मंच ने दुर्ग में स्कूल शिक्षा मंत्री और बगिया में मुख्यमंत्री तक पदयात्रा की तैयारी कर रखी थी।

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पांचों संभागों से शिक्षकों को जोड़कर आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी थी। ऐसे समय में सरकार की ओर से बातचीत का रास्ता खोलना टकराव की दिशा बदलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

शिक्षा मंत्री के साथ हुई बातचीत में भी यही बदला हुआ माहौल दिखाई दिया। पहले शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों से मुलाकात हुई और उसके बाद शिक्षक साझा मंच के नेताओं से चर्चा हुई।

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दोनों बैठकों में करीब आधे-आधे घंटे तक बातचीत चली। शिक्षक नेताओं ने अपनी मांगें रखीं और मंत्री ने भी सरकार की ओर से अपना पक्ष सामने रखा। शिक्षक साझा मंच के नेताओं ने जब आश्वासन को सार्वजनिक रूप से दर्ज कराने की इच्छा जताई तो मंत्री ने कैमरे के सामने अपनी बात कही। इस तरह बातचीत कमरे के भीतर रह जाने के बजाय शिक्षकों तक पहुंच गई।

मुलाकात के दौरान शिक्षा मंत्री ने वरिष्ठ शिक्षकों को लेकर भी भरोसा दिलाया। शिक्षक नेताओं के मुताबिक उन्होंने कहा कि सरकार वरिष्ठ शिक्षकों के साथ खड़ी है और उनके अनुभव को महत्व दिया जाएगा। यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टीईटी का विवाद अब उन शिक्षकों तक पहुंच गया है जो नियुक्ति के बाद लंबे समय से स्कूलों में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

और पदोन्नति के लिए भी उनका यह बायन अहम है। संभवत यह विषय उनके ध्यान में आ गया है कि पदोन्नति की वजह से वरिष्ठ शिक्षक जो टेट पास नहीं है वह प्रभावित हो रहे है।

उनके लिए यह परीक्षा महज एक नई शैक्षणिक योग्यता पूरी करने का विषय नहीं, सेवा की निरंतरता और वरिष्ठता से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।

मंत्री ने बातचीत का सिलसिला आगे जारी रखने की बात भी कही। उन्होंने शिक्षक संगठनों से कहा कि संवाद रुकना नहीं चाहिए और कम से कम महीने में एक बार मिलकर चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि कई बातें सरकार तक पहुंच नहीं पातीं, बातचीत से समस्याएं सामने आती हैं और उनके समाधान का रास्ता भी निकलता है। यह बात उस समय आई है जब सरकार और शिक्षकों के बीच टीईटी को लेकर दूरी लगातार बढ़ रही थी। ऐसे में संवाद की यह पेशकश अपने आप में राजनीतिक संकेत रखती है।

शिक्षक नेताओं रविंद राठौड़, प्रदीप पांडे और विकास राजपूत का कहना था कि वे एकतरफा आश्वासन लेकर लौटना नहीं चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने शिक्षा मंत्री से अपनी बात वीडियो में रखने का आग्रह किया। मंत्री का वीडियो सामने आने के बाद सरकार के रुख को लेकर शिक्षकों के बीच चल रही अनिश्चितता कुछ कम हुई है।

हालांकि यह कहानी अभी पूरी नहीं हुई है। विभागीय टीईटी कराने की सहमति सामने आ गई है, लेकिन आदेश और प्रक्रिया अभी बाकी है। तारीख क्या होगी, पात्रता का दायरा क्या रहेगा, पाठ्यक्रम कैसा होगा और परीक्षा किस तरीके से होगी, इन सवालों के जवाब आने बाकी हैं। प्रमोशन में टीईटी की अनिवार्यता पर विधि विभाग की राय भी आगे की दिशा तय करेगी।

शिक्षक साझा मंच ने भी आंदोलन खत्म नहीं किया है। गुरुवार को दुर्ग, बस्तर और रायपुर संभाग की महिला शिक्षिकाएं स्कूल शिक्षा मंत्री को राखी बांधने पहुंचेंगी। मंत्री ने दोपहर 12 बजे दुर्ग में शिक्षकों से मिलने का समय दिया है। इसी दिन बगिया में मुख्यमंत्री से भी शिक्षक नेताओं की मुलाकात प्रस्तावित है। अजय गुप्ता और मनीष मिश्रा के नेतृत्व में शिक्षक नेता मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। महिला शिक्षक मुख्यमंत्री को रक्षा सूत्र बांधने भी पहुंचेंगी। यानी आंदोलन और संवाद दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।

यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू है। एक ओर शिक्षक सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे थे, दूसरी ओर सरकार ने बातचीत की मेज पर जगह बना दी। एक ओर आंदोलन में आक्रोश था, दूसरी ओर अब संवाद के जरिए उसी आक्रोश की धार को कम करने की कोशिश दिखाई दे रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने फिलहाल सरकार और शिक्षकों के बीच बढ़ी कड़वाहट को संवाद की मिठास में बदलने की कोशिश की है। विभागीय टीईटी की सहमति ने शिक्षकों के बीच तत्काल राहत का भाव जरूर पैदा किया है। कई दिनों से चल रहे आंदोलन में आक्रोश कुछ कम होता दिखाई दे रहा है। हो सकता है कि विभागीय टेट साल में दो से तीन बार हो जाए।लेकिन मिठास कितनी देर टिकती है, इसका फैसला अभी बाकी है। यह मिठास सरकारी आदेश में कब दिखाई देती है, विभागीय टीईटी की प्रक्रिया कब जमीन पर उतरती है और प्रमोशन में टीईटी को लेकर सरकार क्या रास्ता निकालती है, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल इतना जरूर है कि टीईटी के बहाने सरकार और शिक्षकों के बीच जो कड़वाहट बढ़ रही थी, उसमें बुधवार की मुलाकात ने थोड़ी नरमी जरूर ला दी है।