जशपुर/बगिया:(मनीष जायसवाल) छत्तीसगढ़ के शिक्षक आंदोलन में बुधवार का दिन संवाद के लिहाज से अहम रहा। दिन में स्कूल शिक्षा मंत्री के साथ हुई बैठकों में विभागीय टीईटी को लेकर सरकार का सकारात्मक रुख सामने आया और इसके बाद शिक्षक नेताओं का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुनकुरी स्थित गृह निवास बगिया पहुंचा। यहां मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से सीधे बातचीत की और टीईटी से प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर भरोसा दिया।

 

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शिक्षक नेताओं की मुख्यमंत्री से मुलाकात रात करीब 11 बजे हुई। बगिया में पहले से ही लोगों की भीड़ थी। इसके बावजूद मुख्यमंत्री शिक्षकों से कमरे में बैठकर मिलने पहुंचे। इस दौरान तीन महिला शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने राखी का उपहार देते हुए टीईटी की अनिवार्यता से पैदा हुई स्थिति के बीच शिक्षकों को सेवा सुरक्षा का भरोसा दिया। शिक्षिकाओं के लिए यह मुलाकात राखी के रिटर्न गिफ्ट जैसी रही।

 

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आज की वार्ता में छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश संयोजक मनीष मिश्रा, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी कुर्रे, कौशल अवस्थी, महासचिव गौरव साहू, अनुशासन समिति के दिनेश नायक, जिला अध्यक्ष अजय गुप्ता, टिकेश्वर भोई, उत्तम पैकारा, सीमा गुप्ता, सरस्वती जगत, गायत्री देवता, संतोष जाटवार, भरत यादव, प्रेम शंकर यादव, पंकज बेहरा सहित कई शिक्षक नेता मौजूद रहे।

 

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मनीष मिश्रा, अश्वनी कुर्रे और कौशल अवस्थी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों की मांगें उनके ध्यान में थीं और उन्होंने इस विषय में स्कूल शिक्षा मंत्री को आवश्यक निर्देश भी दिए थे। शिक्षक नेताओं ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में करीब 82 हजार शिक्षक ऐसे हैं जो टीईटी की अनिवार्यता से प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिया कि किसी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होगा। विभागीय परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों को पात्रता हासिल कराने का रास्ता तैयार किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो इसके लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी। आवश्यकता के अनुसार विभागीय टीईटी समय पर आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अंतिम शिक्षक तक के साथ खड़ी है।

 

पदोन्नति के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मामला न्यायालय से जुड़ा हुआ है और इसमें तकनीकी पहलू भी हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वरिष्ठ शिक्षकों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी और इस मामले में ऐसा रास्ता निकाला जाएगा, जिससे वरिष्ठ शिक्षकों के साथ न्याय हो।

 

मनीष मिश्रा ने सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के सामने रखा और इसे मोदी की गारंटी तथा भाजपा के संकल्प पत्र से जोड़ते हुए मांग दोहराई। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकल्प पत्र में किए गए वादे पूरे होंगे और सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति भी दूर की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए संकल्पित है।

 

कौशल अवस्थी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने शिक्षक नेताओं से कहा कि शिक्षा मंत्री के साथ मुलाकात के बाद बगिया आकर उन्होंने अच्छा किया। इससे एक साथ संवाद का अवसर मिला और यह संवाद सार्थक दिशा में आगे बढ़ेगा।

 

बुधवार की यह मुलाकात उस समय हुई, जब शिक्षक आंदोलन सरकार के सामने अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने की तैयारी में था। पांचों संभागों से शिक्षकों को जोड़कर आंदोलन को मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र बगिया और स्कूल शिक्षा मंत्री के निवास तक ले जाने की रणनीति तैयार हो चुकी थी। ऐसे समय में मुख्यमंत्री का शिक्षक नेताओं से सीधे मिलना और सेवा सुरक्षा को लेकर भरोसा देना आंदोलन के माहौल में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

 

बगिया की मुलाकात दिन में स्कूल शिक्षा मंत्री के साथ हुई बैठकों की अगली कड़ी भी रही। यानी एक ही दिन में शिक्षकों की बात विभागीय स्तर से लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंची। इससे टीईटी को लेकर बने तनाव के बीच बातचीत का रास्ता खुला है।

 

उधर जशपुर में दिनभर प्रशासन और शिक्षक नेताओं के बीच संवाद चलता रहा। मनीष मिश्रा सहित शिक्षक नेताओं से जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारी कई बार मिले। कभी रोड मैप को लेकर चर्चा हुई तो कभी आंदोलन स्थल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बातचीत हुई।

 

बगिया में आंदोलन की कमान मनीष मिश्रा, कौशल अवस्थी और अश्वनी कुर्रे जैसे अनुभवी शिक्षक नेताओं के हाथ में थी। सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने भूपेश बघेल सरकार के पांच साल के कार्यकाल में भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के जरिए अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई थी। यही वजह रही कि प्रशासनिक स्तर पर बातचीत के साथ आंदोलन की रणनीति भी लगातार आगे बढ़ती रही।

 

मुख्यमंत्री की ओर से शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता और हितों की अनदेखी नहीं किए जाने के भरोसे के बाद आंदोलन के तेवर में भी नरमी दिखाई दी। फेडरेशन की ओर से प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने बताया कि स्कूल शिक्षा मंत्री को राखी बांधने और मुलाकात का कार्यक्रम यथावत रहेगा। मुख्यमंत्री के बगिया में शिक्षकों से मिलने और वहां संवाद होने के बाद मुख्यमंत्री निवास से जुड़ा कार्यक्रम स्थगित किया गया है।

 

कुल मिलाकर बुधवार को सरकार और शिक्षकों के बीच टकराव की स्थिति से बातचीत की दिशा में बदलाव दिखाई दिया। टीईटी की अनिवार्यता से पैदा हुई चिंता के बीच मुख्यमंत्री का सेवा सुरक्षा का भरोसा शिक्षकों के लिए बड़ा संदेश रहा। अब इस संवाद को विभागीय टीईटी, सेवा सुरक्षा, पदोन्नति और वेतन विसंगति जैसे मुद्दों पर ठोस निर्णय और आदेश में बदलना सरकार के सामने अगला कदम होगा।