बिलासपुर…औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर पुलिस की पहल अब उद्योग जगत के सहयोग से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। पुलिस कप्तान राजनेश सिंह को जिला उद्योग संघ ने कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पत्र सौंपते हुए उद्योगों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत बताई है। संघ ने कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन, दोपहिया से आने-जाने वालों के लिए हेलमेट, महिला कर्मचारियों की नाइट शिफ्ट में सुरक्षा, आपात स्थिति में तत्काल पुलिस सहायता और औद्योगिक सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच जैसे मुद्दों को न केवल प्रमुखता से उठाया है। बल्कि पुलिस के साथ कदम से कदम मिलाते हुए अभियान का समर्थन किया है.।

25 अगस्त को जारी पत्र में जिला उद्योग संघ ने औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा तथा कल्याण के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है। पत्र में सड़क दुर्घटनाओं से बचाव के लिए दोपहिया से आने-जाने वाले कर्मचारियों को हेलमेट उपलब्ध कराने और उसका इस्तेमाल अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है। हेलमेट की राशि किस्तों में लेने की व्यवस्था का विकल्प भी रखा गया है।

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औद्योगिक सुरक्षा के इस पूरे विषय में कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन महत्वपूर्ण बिंदु बनकर सामने आया है। संघ ने कारखानों में काम करने वाले स्थानीय और बाहरी कर्मचारियों का शत-प्रतिशत पुलिस वेरिफिकेशन कराने की सलाह दी है। साथ ही दुर्घटना अथवा किसी आपात स्थिति में तत्काल पुलिस सहायता मिल सके, इसके लिए पहले से व्यवस्था रखने पर जोर दिया गया है।

पुलिस कप्तान राजनेश सिंह ने सुरक्षा के व्यापक नजरिए को रेखांकित करते हुए कहा कि औद्योगिक संस्थानों में सुरक्षा का मतलब केवल मशीनों से होने वाले हादसों को रोकना नहीं है। वहां काम करने वाला हर कर्मचारी सुरक्षित महसूस करे, उसकी पहचान सत्यापित हो, कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन हो और आपात स्थिति में मदद उस तक समय पर पहुंचे, सुरक्षा व्यवस्था की सफलता इसी से तय होती है। खासकर महिला कर्मचारियों की नाइट शिफ्ट को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि पुलिस का प्रयास अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है। जोखिम की पहचान पहले हो और उद्योग प्रबंधन, कर्मचारी तथा पुलिस मिलकर उसे कम करें, यही प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था है। कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन, सीसीटीवी, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा, हेलमेट का इस्तेमाल और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था औपचारिकताएं नहीं, बल्कि सुरक्षा के बुनियादी मानक हैं।

महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष जोर

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उद्योग संघ ने महिला कर्मचारियों की नाइट शिफ्ट को भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा माना है। पत्र में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, नाइट शिफ्ट में पर्याप्त सुरक्षा और सुरक्षा समितियों के गठन की सलाह दी गई है। औद्योगिक इकाइयों में अलग-अलग समय पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कार्यस्थल के साथ-साथ पूरे परिसर की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

मशीनरी और विद्युत उपकरणों की जांच भी जरूरी

पत्र में मशीनरी, क्रेन और विद्युत उपकरणों के संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करने तथा अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच की सलाह दी गई है। संघ ने समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट कराने को भी जरूरी बताया है। यानी सुरक्षा को केवल दुर्घटना रोकने तक सीमित न रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर है, जिसमें संभावित खतरे पहले ही सामने आ जाएं।

पुलिस और उद्योग के बीच समन्वय पर जोर

औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े इन सुझावों में पुलिस और उद्योग प्रबंधन की साझा भूमिका भी सामने आती है। कर्मचारी सत्यापन से लेकर आपात स्थिति में पुलिस सहायता और संदिग्ध गतिविधियों की समय पर सूचना तक कई ऐसे बिंदु हैं, जिनमें दोनों पक्षों के बीच सीधा समन्वय जरूरी है।

पुलिस कप्तान ने भी इसी समन्वय को सुरक्षा व्यवस्था का अहम आधार बताते हुए कहा कि उद्योगों में सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस अकेले नहीं निभा सकती। उद्योग प्रबंधन की अपनी जिम्मेदारी है और कर्मचारियों की भी। पुलिस और उद्योग जगत के बीच समन्वय किसी घटना के समय ही नहीं, बल्कि नियमित सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होना चाहिए।