TET Teachers -श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सरकारी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से छूट देने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया है। शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू की ओर से लाए गए इस प्रस्ताव में 31 अक्टूबर 2019 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने के लिए केंद्र सरकार से कानून में जरूरी संशोधन करने का आग्रह किया गया है। प्रस्ताव में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के माध्यम से आवश्यक कानूनी कदम उठाने की मांग भी की गई है।

शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि TET का मुद्दा केवल परीक्षा देने या नहीं देने तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों की गरिमा और उनके मनोबल से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पूरे देश में संबंधित शिक्षकों के लिए TET की आवश्यकता सामने आई है, लेकिन जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस मामले में कानूनी रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुकी है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में RTE अधिनियम के तहत आने वाले स्कूलों में TET को शिक्षक की न्यूनतम योग्यता से संबंधित आवश्यकता माना था। बाद में मई 2026 में समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान TET योग्यता हासिल करने की समयसीमा को 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाया गया।

विधानसभा में पारित प्रस्ताव में केंद्र से RTE अधिनियम, 2009 की धारा 23 में आवश्यक संशोधन करने की मांग की गई है। हालांकि, यह प्रस्ताव अपने आप में TET से छूट प्रदान करने वाला अंतिम कानूनी आदेश नहीं है। प्रस्ताव पर अंतिम कार्रवाई केंद्र सरकार और संबंधित वैधानिक प्रक्रिया के तहत होगी।

इसी बीच जम्मू-कश्मीर के उच्च शिक्षण संस्थानों की लाइब्रेरियों में मौजूद किताबों की जांच का मामला भी विधानसभा में चर्चा का विषय रहा। सरकार के मुताबिक करीब 21.82 लाख पुस्तकों और प्रकाशनों की जांच की गई, जिनमें से 4,767 पुस्तकों को संचलन से हटाया गया। इनमें 518 प्रतिबंधित पुस्तकें शामिल हैं, जबकि 1,752 पुस्तकों को विशेषज्ञ जांच के लिए भेजा गया है।

सरकार ने विधानसभा में कहा कि पुस्तकों की जांच के लिए स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ मानदंड अपनाए गए हैं। सरकार के अनुसार उच्च शिक्षा संस्थानों में ऐसा शैक्षणिक वातावरण होना चाहिए, जो संवैधानिक मूल्यों, अकादमिक स्वतंत्रता, आलोचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और देश की संप्रभुता, एकता एवं अखंडता के प्रति सम्मान को बढ़ावा दे।

किताबों पर उठे सवालों के संबंध में शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि किसी पुस्तक पर प्रतिबंध या उसे हटाए जाने की स्थिति में संबंधित प्रक्रिया के लिए गठित समिति के सदस्य जवाबदेह होंगे। इस मुद्दे पर विधानसभा में विपक्ष की ओर से पुस्तकों के नाम, लेखकों और उन्हें हटाने के आधार को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

वहीं डिप्टी मुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और यहां के लोगों के हित से जुड़े सरकार के विधायी कदमों का समर्थन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा में पारित प्रत्येक विधेयक और प्रस्ताव का अपना महत्व है।

चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर चौधरी ने कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी संस्था से देश के लोगों का विश्वास जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आयोग पर लगाए गए आरोपों पर स्पष्टता जरूरी है। उनके मुताबिक यदि संवैधानिक संस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं तो संबंधित संस्था को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

चौधरी ने इस दौरान भाजपा से जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने के पुराने वादे को लेकर भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर भाजपा से जवाब मांगती रहेगी।