Pension rule।रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शासकीय कर्मचारियों को 25 वर्ष की अर्हकारी सेवा पूर्ण करने पर पूर्ण पेंशन प्रदान करने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ शासन के अधीन कार्यरत शासकीय सेवकों के पेंशन संबंधी प्रावधानों में आवश्यक सुधार करते हुए 25 वर्ष की अर्हकारी सेवा पूर्ण करने पर पूर्ण पेंशन प्रदान किए जाने की व्यवस्था लागू किए जाने की आवश्यकता है।

वर्तमान समय में शासकीय सेवा में नियुक्त होने वाले अधिकांश कर्मचारी लगभग 25 से 30 वर्ष की आयु में नियमित शासकीय सेवा में प्रवेश करते हैं। ऐसी स्थिति में यदि किसी कर्मचारी को 30 से अधिक वर्षों की सेवा पूर्ण करने के बाद ही पूर्ण पेंशन का लाभ प्राप्त होता है, तो अपेक्षाकृत कम आयु में शासकीय सेवा में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों और देर से नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के बीच पेंशन लाभ की दृष्टि से असमानता उत्पन्न होती है।

केंद्र सरकार द्वारा पेंशन व्यवस्था में 20 वर्ष की अर्हकारी सेवा को महत्वपूर्ण आधार मानते हुए प्रावधान किए गए हैं। केंद्र की व्यवस्था का उद्देश्य यह भी है कि दीर्घ अवधि तक शासकीय सेवा करने वाले कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के पश्चात पर्याप्त सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो।

छत्तीसगढ़ शासन में भी कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा, सेवा शर्तों में समानता तथा सेवानिवृत्ति के पश्चात सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की दृष्टि से इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना आवश्यक है।

यह मांग कर्मचारियों को किसी अतिरिक्त अथवा अनुचित लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि दीर्घकालीन शासकीय सेवा करने वाले कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा तथा केंद्र एवं राज्य की सेवा शर्तों में यथासंभव समानता स्थापित करने के उद्देश्य से की जा रही है।

  • 25 वर्ष की अर्हकारी सेवा पूर्ण करने वाले शासकीय कर्मचारियों को पूर्ण पेंशन का लाभ प्रदान करने हेतु छ.ग. पेंशन नियमों में आवश्यक नियमों में संशोधन किया जाए।
  • इस संबंध में वित्त विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों की समिति गठित कर केंद्र सरकार के प्रावधानों का अध्ययन कराया जाए।
  • वर्तमान एवं भविष्य के शासकीय कर्मचारियों को इस व्यवस्था का लाभ प्रदान करने हेतु आवश्यक शासनादेश, नियम जारी किया जाए।
  • पेंशन व्यवस्था में किसी भी प्रकार की विसंगति न रहे, इसके लिए सभी विभागों एवं संवर्गों में समान रूप से लागू किए जाने का निर्णय लिया जाए।