NEET-PG 2025/नीट-पीजी 2025 परीक्षा के क्वालीफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल में कटौती के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की गई।

रिपोर्ट में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की मौजूदा पर्सेंटाइल आधारित व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत वर्ष 2027 से नीट-पीजी और नीट-सुपर स्पेशियलिटी (नीट-एसएस) में पर्सेंटाइल आधारित प्रणाली की जगह रैंक आधारित प्रणाली लागू करने की बात कही गई है।

अदालत को बताया गया कि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। हालांकि, नई व्यवस्था से जुड़े नियमों को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केवल खाली सीटों को भरने के उद्देश्य से पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा के न्यूनतम योग्यता मानकों में ढील नहीं दी जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सभी पक्षों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं को रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि नीट-पीजी परीक्षा का आयोजन नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) की ओर से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में किया जाता है।

नीट-पीजी 2025 की परीक्षा 3 अगस्त 2025 को एक ही शिफ्ट में सुबह 9 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक आयोजित की गई थी।

इसका परिणाम 3 सितंबर 2025 को घोषित किया गया था। परीक्षा के एडमिट कार्ड 31 जुलाई 2025 को जारी किए गए थे, जबकि परीक्षा शहर चुनने और उसमें सुधार करने के लिए विंडो 13 से 17 जून 2025 तक सक्रिय रही थी।

नीट-पीजी के जरिए देश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन), एमएस (मास्टर ऑफ सर्जरी) और पीजी डिप्लोमा जैसे स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों की पात्रता और रैंक निर्धारित की जाती है। ऐसे में कट-ऑफ में बदलाव और प्रस्तावित नई रैंक आधारित व्यवस्था का असर मेडिकल पीजी में प्रवेश की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।