बिलासपुर… जाना था जापान, पहुंच गए चीन… यह पुराना गाना बिलासपुर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सटीक बैठ रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां रायपुर में आयोजित प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को पेंड्रा भेज दिया गया। शिक्षक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आदेश पर पेंड्रा पहुंच भी गए, लेकिन वहां जाकर पता चला कि प्रशिक्षण तो रायपुर में चल रहा है। ठंड के बीच महिला शिक्षकों को बच्चियों के साथ पेंड्रा पहुंचने और फिर देर शाम बिलासपुर लौटने की परेशानी उठानी पड़ी। विभागीय गलती से हुई इस फजीहत के बाद उम्मीद थी कि जिम्मेदारी तय होगी, लेकिन हुआ उलटा। अब प्रशिक्षण में एक दिन अनुपस्थित रहने के नाम पर शिक्षकों का वेतन काटने का आदेश जारी हो गया है। यानी गलती आदेश बनाने और जारी करने वालों की, लेकिन सजा उन शिक्षकों को मिल रही है जिन्होंने विभाग के निर्देश का पालन किया।

मामला प्रदेश के व्याख्याताओं के विषयवार प्रशिक्षण से जुड़ा है। राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, रायपुर में 2 से 6 नवंबर तक प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। बिलासपुर जिले के व्याख्याताओं को भी इसमें शामिल होना था। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्रशिक्षण शुरू होने के एक दिन पहले शाम को आदेश जारी किया गया। आरोप है कि आदेश में प्रशिक्षण स्थल को लेकर स्पष्ट और सही जानकारी नहीं दी गई। जब परेशान व्याख्याताओं ने कार्यालय से संपर्क किया तो उन्हें डाइट पेंड्रा पहुंचने के लिए कहा गया। शिक्षक आदेश के मुताबिक पेंड्रा पहुंच गए, लेकिन वहां पता चला कि प्रशिक्षण रायपुर में है। ऐसे में उन्हें वापस बिलासपुर लौटना पड़ा और अगले दिन रायपुर के लिए रवाना होना पड़ा।

ठंड में बच्चियों के साथ पेंड्रा पहुंचीं शिक्षिकाएं

इस पूरे मामले का सबसे पीड़ादायक पहलू महिला शिक्षिकाओं की परेशानी है। पेंड्रा में इन दिनों अच्छी ठंड पड़ रही है। ऐसे मौसम में महिला शिक्षिकाओं का बच्चियों के साथ प्रशिक्षण के लिए पेंड्रा पहुंचना और वहां जाकर यह पता चलना कि वास्तविक प्रशिक्षण स्थल रायपुर है, किसी परेशानी से कम नहीं था। विभाग के आदेश पर भरोसा करके निकलीं शिक्षिकाओं को पेंड्रा से वापस बिलासपुर लौटना पड़ा। देर शाम तक उनकी आवाजाही और समय की बर्बादी हुई। जिन बच्चियों को साथ लेकर वे निकली थीं, उन्हें भी इस अनावश्यक सफर की परेशानी झेलनी पड़ी।

सवाल यह है कि प्रशिक्षण स्थल की जानकारी देने में विभाग थोड़ी सी सावधानी बरतता तो महिला शिक्षिकाओं और उनके परिवारों को इस परेशानी से बचाया जा सकता था। लेकिन विभागीय समन्वय की कमी ने शिक्षकों को ऐसी स्थिति में डाल दिया, जहां न केवल उनका समय और पैसा बर्बाद हुआ, बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानी भी उठानी पड़ी। अब इसी एक दिन की अनुपस्थिति का आर्थिक नुकसान भी उन्हें झेलना पड़ रहा है।

अपने ही आदेश में पेंड्रा लिखे होने की जानकारी

इस पूरे मामले में सहायक संचालक (शिक्षा) वर्षा शर्मा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण की जिम्मेदारी उनके पास होने के बावजूद जब शिक्षकों ने गलत स्थान पर भेजे जाने को लेकर उनसे संपर्क किया तो उन्होंने कई शिक्षकों के फोन नहीं उठाए। कुछ शिक्षकों से बातचीत में उन्होंने आदेश में किसी तरह की त्रुटि से इनकार किया। बाद में उनका कहना था कि यह आदेश कैसे जारी हो गया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राचार्यों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सभी संबंधित शिक्षकों को कार्यमुक्त कर प्रशिक्षण संस्थान भेजा जाए।

लेकिन सवाल यह है कि जब प्रशिक्षण की प्रभारी अधिकारी वर्षा शर्मा हैं तो प्रशिक्षण स्थल का सही उल्लेख सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? जिस आदेश के आधार पर शिक्षकों को पेंड्रा भेजा गया, उसमें पेंड्रा का उल्लेख कैसे हो गया? और सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि वर्षा शर्मा ने अपने पक्ष में व्हाट्सऐप पर जो आदेश साझा किया, उसमें तो स्थान का जिक्र ही नहीं है.. फिर पेंड्रा इस स्थान का जिक्र कैसे सामने आ गया। यानी जिस दस्तावेज को दिखाकर वह अपनी बात स्पष्ट कर रही थीं, उसी में प्रशिक्षण स्थल को लेकर सवाल मौजूद हैं।

उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए यह भी कहा कि लोगों को केवल विभाग की कमजोरियां दिखाई देती हैं, जबकि विभाग कितना काम करता है, इस पर किसी का ध्यान नहीं जाता। लेकिन इस मामले में सवाल विभाग के दूसरे कामों का नहीं, बल्कि एक ऐसे आदेश का है, जिसने शिक्षकों को गलत जगह पहुंचा दिया। प्रशिक्षण की प्रभारी अधिकारी को ही यदि यह जानकारी नहीं है कि आदेश में पेंड्रा कैसे दर्ज हो गया तो फिर विभाग में जवाबदेही किसकी है?

भृत्य के हाथों तैयार हुआ प्रशिक्षण का आदेश

विभागीय सूत्रों के मुताबिक प्रशिक्षण से संबंधित आदेश कार्यालय में पदस्थ भृत्य दिनेश श्रीवास ने तैयार किया था। सूत्रों का दावा है कि जिला स्तर पर प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य का प्रभार अघोषित रूप से उन्हीं के पास है। यदि यह जानकारी सही है तो यह जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में शिक्षकों की सूची, कार्यमुक्ति और प्रशिक्षण स्थल का निर्धारण जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में होना चाहिए। आदेश तैयार करने से लेकर उसे जारी करने तक की प्रक्रिया में गलती पकड़ने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी? क्या आदेश जारी होने से पहले उसकी जांच नहीं की गई?

डीपीआई का वेतन कटौती आदेश, भुगतान शिक्षक करेंगे!

मामले में विडंबना यह है कि अब डीपीआई की ओर से एक दिन का वेतन काटने का आदेश जारी हो चुका है। शिक्षक विभाग के निर्देश पर पेंड्रा पहुंचे थे, लेकिन प्रशिक्षण रायपुर में होने के कारण वे निर्धारित समय पर वहां उपस्थित नहीं हो सके। इसके बावजूद अनुपस्थिति का आर्थिक दंड उन्हें भुगतना पड़ रहा है। दिवाली से ठीक पहले वेतन कटौती का आदेश शिक्षकों के लिए दोहरी परेशानी लेकर आया है। एक दिन का समय और यात्रा में हुई परेशानी अलग, ऊपर से वेतन में कटौती।

संदीप पांडेय बोले- लापरवाही की जांच कराएंगे

जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय ने कहा कि बिलासपुर से पेंड्रा गए सभी शिक्षक फिलहाल प्रशिक्षण संस्थान पहुंच चुके हैं। उनका एक दिन का वेतन काटने का आदेश जारी हुआ है, क्योंकि वे एक दिन प्रशिक्षण संस्थान में उपस्थित नहीं हो सके थे। प्रशिक्षण के लिए गलत स्थान का उल्लेख कैसे हो गया और यह लापरवाही किस स्तर पर हुई, इसकी जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी।

अब सवाल जवाबदेही का

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शिक्षक विभागीय आदेश के मुताबिक पेंड्रा पहुंचे तो उनकी अनुपस्थिति के लिए उन्हें जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है? प्रशिक्षण प्रभारी वर्षा शर्मा को आदेश में पेंड्रा लिखे होने की जानकारी नहीं, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आदेश तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल और दूसरी तरफ डीपीआई का वेतन कटौती आदेश। अधिकारी अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारी से किनारा कर रहे हैं, जबकि नुकसान शिक्षकों को उठाना पड़ रहा है।

महिला शिक्षकों और बच्चियों की परेशानी को देखते हुए यह केवल प्रशासनिक चूक का मामला नहीं रह जाता, बल्कि संवेदनशीलता और जवाबदेही का भी सवाल बन जाता है। अब देखना होगा कि जिला शिक्षा अधिकारी की जांच में गलती की जिम्मेदारी तय होती है या फिर इस पूरे मामले में भी शिक्षक ही विभागीय लापरवाही की कीमत चुकाते रहेंगे।