बिलासपुर।छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में कार्यरत सहायक प्राध्यापकों को बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2010 की अधिसूचना के तहत दिए गए आर्थिक लाभ की राशि को वर्ष 2024 की नई अधिसूचना के आधार पर वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अंतरिम रोक लगा दी है।

कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक संबंधित सहायक प्राध्यापकों से विवादित राशि की वसूली के लिए कोई दबावपूर्ण कार्रवाई न की जाए। हालांकि, जिन कर्मचारियों से राशि पहले ही वसूल की जा चुकी है, उन्हें इस अंतरिम आदेश से तत्काल राहत नहीं मिलेगी।

चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने सहायक प्राध्यापकों की ओर से दायर सात अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

याचिकाकर्ताओं में कोरबा, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़, जांजगीर-चांपा और मुंगेली सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों के सरकारी कॉलेजों में पदस्थ सहायक प्राध्यापक शामिल हैं।

मामले के अनुसार, राज्य सरकार ने 30 मार्च 2010 की अधिसूचना के तहत सहायक प्राध्यापकों को आर्थिक लाभ दिया था। बाद में 25 जून 2024 को नई अधिसूचना जारी कर पहले दिए गए लाभ की राशि की वसूली की कार्रवाई शुरू की गई। इस फैसले को चुनौती देते हुए सहायक प्राध्यापकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कीं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय वर्ष 2010 की अधिसूचना प्रभावी थी और उसी के प्रावधानों के अनुसार उन्हें आर्थिक लाभ मिला था।

उनका यह भी तर्क है कि लाभ प्राप्त करने के लिए किसी तरह की धोखाधड़ी या गलत जानकारी देने का आरोप नहीं है। ऐसे में बाद में जारी वर्ष 2024 की अधिसूचना के आधार पर पहले से दिए गए लाभ की राशि की वसूली करना उचित नहीं है।

सुनवाई के दौरान सहायक प्राध्यापकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज परांजपे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के विनियम की धारा 9.2 के आधार पर 30 मार्च 2010 की अधिसूचना में बदलाव किया गया था, लेकिन यह अधिसूचना 25 जून 2024 तक प्रभावी रही।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी प्रावधान की व्याख्या और उसमें किए गए संशोधन के कानूनी प्रभाव अलग-अलग होते हैं।

राज्य सरकार की ओर से मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा गया। इसके बाद हाईकोर्ट ने विवाद को विचारणीय मानते हुए सभी सात अपीलों को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।

डिवीजन बेंच ने अगली सुनवाई तक संबंधित सहायक प्राध्यापकों से विवादित राशि की वसूली के लिए दबावपूर्ण कार्रवाई नहीं करने का अंतरिम निर्देश दिया है। मामले में अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।