बिलासपुर…मरीज और उसके परिजन अस्पताल में इलाज और सम्मान की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन अगर डॉक्टर पर ही अभद्र व्यवहार कर उन्हें अस्पताल से बाहर निकालने का आरोप लगे तो सवाल केवल एक व्यक्ति के व्यवहार तक सीमित नहीं रहता। बिलासपुर के जुनेजा सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल को लेकर मुख्यमंत्री के नाम पहुंची एक शिकायत ने स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर ऐसा ही गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।

शिकायतकर्ता आफताब अहमद खान ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में जुनेजा सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल के डॉ. राकेश जुनेजा पर अपनी वृद्ध मां के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करने और उन्हें अस्पताल से बाहर जाने के लिए कहने का आरोप लगाया है। शिकायत में घटना की तारीख 4 सितंबर 2026 बताई गई है। शिकायत की एक प्रति के साथ उसी दिन इलाज के लिए भेजे गए मेडिकल कार्ड की जानकारी भी संलग्न होने का उल्लेख है।

शिकायत के मुताबिक, 2 और 3 सितंबर 2026 को आफताब अहमद खान अपनी माता श्रीमती मखमूर जहां, पत्नी स्वर्गीय श्री एन.ए. खान, के आंख के मोतियाबिंद के ऑपरेशन की काउंसिलिंग के लिए जुनेजा सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल पहुंचे थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि काउंसलर ने उन्हें बताया कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन अस्पताल में प्रतिदिन होता है और अगले दिन सुबह 10 बजे आने के लिए कहा गया।

इसके बाद 4 सितंबर को सुबह करीब 10 बजे आफताब अपनी मां को लेकर ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंचे। शिकायत के अनुसार, वे रिसेप्शन के सामने बैठे थे, तभी अंदर से डॉ. राकेश जुनेजा के अपने स्टाफ से कथित तौर पर ऊंची आवाज में बात करने की आवाज आने लगी। इसके बाद डॉक्टर रिसेप्शन के बाहर आए और शिकायतकर्ता के मुताबिक उन्होंने उनके और उनकी मां के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया तथा उन्हें तीन बार बाहर जाने के लिए कहा।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस दौरान डॉक्टर ने कथित तौर पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे उसकी मां आहत हुईं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब उसने डॉक्टर से इस व्यवहार को लेकर सवाल किया और कहा कि वे इलाज कराने आए हैं, तो डॉक्टर ने कथित तौर पर “What is this behaviour” जैसी टिप्पणी की। जवाब में शिकायतकर्ता ने डॉक्टर से उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठाया और कहा कि यदि मरीज अथवा उसके परिजन से इस तरह बात की जाती है तो अस्पताल से बाहर जाने को कहा जा रहा है।

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में यह भी कहा है कि वह उक्त घटना के कथित व्यवहार की पुष्टि के लिए अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाकर जांच करा सकते हैं। यही बिंदु शिकायत को और गंभीर बनाता है, क्योंकि आरोपों की वास्तविकता कैमरों की रिकॉर्डिंग से काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।

ऐसा व्यवहार मरीजों के साथ न हो’— हस्तक्षेप की मांग

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि डॉ. राकेश जुनेजा और अस्पताल के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। शिकायत में स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से भी मामले में कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह और उनकी मां ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं और किसी मरीज के साथ ऐसा कथित व्यवहार नहीं होना चाहिए।

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायत मुख्यमंत्री के नाम पहुंची है और शिकायतकर्ता ने अपनी पीड़ा सीधे शासन के सामने रखी है। मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज होने के बाद चर्चा में आया है, लेकिन अब तक इस शिकायत पर सार्वजनिक रूप से कोई ठोस कार्रवाई या जांच सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इस शिकायत को केवल एक सामान्य शिकायत मानकर आगे बढ़ेगा या आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगा?

मरीज के आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम फैसला जांच के बाद ही होगा। लेकिन शिकायत में घटना की तारीख, समय, अस्पताल का नाम, संबंधित डॉक्टर का नाम और सीसीटीवी फुटेज से सत्यापन की मांग जैसे स्पष्ट बिंदु मौजूद हैं। इसलिए मामले को दबाने के बजाय इसकी निष्पक्ष जांच ही सबसे उचित रास्ता दिखाई देता है।

अब निगाह इस बात पर है कि मुख्यमंत्री के नाम पहुंची इस शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन क्या कदम उठाते हैं—और क्या 4 सितंबर की कथित घटना की सीसीटीवी फुटेज निकालकर सच सामने लाया जाएगा?