Ravi Bhoi-चर्चा है कि छत्तीसगढ़ के एक मंत्री का बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में जाना लगभग तय हो गया है। मंत्री जी को पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं ने इसके संकेत भी दे दिए हैं। कहते हैं कि पार्टी के बड़े नेताओं के संकेत मिलने के बाद मंत्री जी ने सात जुलाई को विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं हुए और न ही आठ जुलाई को कैबिनेट की बैठक में गए। कहा जा रहा है कि विधायक दल और कैबिनेट की बैठक में मंत्री की गैरहाजिरी पर राज्य के एक बड़े नेता ने संज्ञान लिया और मंत्री जी से साफ़-साफ़ लहजे में समझाया कि अभी तो आप विधायक और मंत्री हैं। राष्ट्रीय टीम में नियुक्ति नहीं होते तक राज्य की जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। मंत्री और विधायक के नाते कैबिनेट और विधायक दल में बैठक में उन्हें जाना होगा। कैबिनेट और विधायक दल की बैठक में मंत्री जी का न जाना उनकी नाराजगी का संकेत है या ख़ुशी का, यह चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि राज्य के बड़े नेता की समझाइस के बाद मंत्री जी विधानसभा में अपने विभागों के सवालों का जवाब भी देंगे और सरकार के कामों में हिस्सेदार भी। खबर है कि मंत्री जी को नितिन नबीन की टीम में महामंत्री बनाया जा रहा है। सुनने में आ रहा है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन जल्द ही अपनी टीम का ऐलान करने वाले हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिमंडल का पुनर्गठन करेंगे। केंद्र में बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ पर नजर दौड़ाई जाएगी। हल्ला है कि विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए सभी मंत्रियों से इस्तीफे ले लिए जाएंगे। इसके बाद नए सिरे से मंत्रिमंडल बनाया जाएगा। चर्चा है कि साय मंत्रिमंडल में पुनर्गठन के साथ राज्य में उपमुख्यमंत्री का पद ही खत्म न कर दिया जाय।

साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आएगा
कहते हैं कि विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस राज्य के विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। बताते हैं विधानसभा सत्र के पहले दिन 13 जुलाई को कांग्रेस इसकी सूचना सदन में देगी। विष्णुदेव साय की सरकार को ढाई साल से ज्यादा समय हो गए हैं। यह पहला मौका है, जब कांग्रेस साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रही है। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से 17 जुलाई 2026 तक चलेगा। 5 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल 5 बैठकें होंगी, जिसमें प्रश्नोत्तर, वित्तीय मामलों और अन्य शासकीय विधेयकों पर चर्चा के साथ सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस हो सकती है। माना जा रहा है कि मानसून सत्र छोटा भले है, पर धमाकेदार होगा। कांग्रेस नकटी गांव को उजाड़ने से लेकर खाद संकट, बिजली बिल में बढ़ोतरी अन्य मुद्दों में सरकार को घेरने की कोशिश करेगी।

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पद भी गया और पैसा भी डूबा
स्कूल शिक्षा विभाग के एक जूनियर प्रिंसिपल साहब धन बल से जिला शिक्षा अधिकारी बन गए थे , पर हाईकोर्ट के ऐसा डंडा पड़ा कि पद भी चल गया और पद के लिए जो पैसा दिया था, वह भी डूब गया। कहते हैं की प्रिंसिपल साहब ने एक साहब को 15 पेटी दक्षिणा दिए थे। प्रिंसिपल साहब को डीईओ बनाए जाने के खिलाफ उनके दो सीनियर हाईकोर्ट चले गए। सीनियर के रहते जूनियर प्रिंसिपल को डीईओ का चार्ज देने को हाईकोर्ट ने गलत माना और पोस्टिंग रद्द कर दी, तो प्रिंसिपल साहब का पद चला गया। अब प्रिंसिपल साहब ने पद के लिए जिसे दक्षिणा दी थी, उसने भी लौटाने से मना कर दिया। प्रिंसिपल साहब उसका कुछ बाल बांका भी नहीं कर पाएंगे, क्योंकि दक्षिणा लेने वाले एक आईएएस और एक मंत्री का खासमखास बताए जाते हैं। अब प्रिंसिपल साहब की जग हसाई हो रही है, सो अलग।

छत्तीसगढ़ के मंत्रालय में खटपट
सामान्य प्रशासन विभाग की उप सचिव अंशिका पांडे को लेकर छत्तीसगढ़ के मंत्रालय में इन दिनों खटपट चल रहा है। डिप्टी कलेक्टर अंशिका पांडे के खिलाफ मंत्रालय के कर्मचारियों ने मोर्चा खोल लिया है। अंशिका पांडे को मंत्रालय से बाहर भेजने के लिए मंत्रालय कर्मचारी संघ ने मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा है। कहते हैं एक जमाने में मंत्रालय में सचिवालयीन सेवा के कर्मचारियों का दबदबा था। तब गिने-चुने डिप्टी कलेक्टर हुआ करते थे। पहले डिप्टी कलेक्टर फील्ड में ज्यादा रहते थे। अब मंत्रालय में डिप्टी कलेक्टरों की संख्या तीन दर्जन से अधिक बताई जाती है। ये अवर सचिव और उप सचिव के तौर पर महत्वपूर्ण विभागों में तैनात हैं। अंशिका पांडे जीएडी के साथ लोक निर्माण विभाग की उप सचिव है। जीएडी की उप सचिव के रूप में अंशिका पांडे मंत्रालय स्टाफ की पोस्टिंग देखती है। कहते हैं अंशिका पांडे की सिफारिश पर मंत्रालय के स्टाफ को जल्दी-जल्दी इधर-उधर कर दिया जाता है। यह मंत्रालय के कर्मचारियों को नहीं भा रहा है। कहा जा रहा है कि अंशिका पांडे काफी दिनों से एक ही काम देख रही है। यही विवाद की जड़ है।

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छोटे जिलों के ही एसपी बदले
सरकार ने लंबे इंतजार के बाद 12 जिलों के एसपी बदले, किसी बड़े जिले को डिस्टर्ब नहीं किया। बिलासपुर, दुर्ग, जशपुर समेत कुछ अन्य जिलों के एसपी डीआईजी बनने के बाद भी वहीं बने रहे। कोरिया के एसपी का हटना तय था। भाजपा नेता को जिंदा जलाने की घटना के बाद भी कोरिया एसपी को रूटीन ट्रांसफर में हटाने का फैसला चर्चा का विषय है। बलौदाबाजार-भाटापारा की एसपी भावना गुप्ता काफी दिनों से अवकाश पर चल रही थीं। अब जाकर उन्हें पुलिस मुख्यालय में एआईजी बनाया गया। अभी तक प्रभारी एसपी के जिम्मे बलौदाबाजार-भाटापारा जिला था। इस ट्रांसफर में सारंगढ़ -बिलाईगढ़ जिले को एसपी मिल गया। सरकार ने फील्ड में पदस्थ कुछ आईपीएस को पीएचक्यू लाया है। माना जा रहा है जल्द ही पीएचक्यू में भी फेरबदल होगा।

आखिर रामगोपाल ने किया सरेंडर
कहते हैं कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल ने अचानक सरेंडर नहीं किया, उनके सरेंडर करने की प्लानिंग तो एक महीने से चल रही थी। कोल, चावल और गलत तरीके से पार्टी फंड जुटाने जैसे कई आरोपों से घिरे रामगोपाल अग्रवाल करीब तीन साल से लापता थे। जानकारों का कहना है कि रामगोपाल अग्रवाल ने नेपाल में अज्ञातवास बिताया। रामगोपाल अग्रवाल कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष हैं और भूपेश बघेल के राज में नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। कोषाध्यक्ष के नाते सरकार में दखलंदाजी ज्यादा थी।

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प्रिंसिपल पोस्टिंग में खेला
चर्चा है कि राज्य के कई कालेजों में प्रिंसिपल की पोस्टिंग में खेला चल रहा है। जुगाड़-पानी फिट नहीं बैठने के कारण कई कालेज प्रभारी प्राचार्य के भरोसे चल रहे हैं। रायपुर के छत्तीसगढ़ और डिग्री गर्ल्स कालेज ही प्रभारी प्राचार्य के भरोसे हैं। नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है, अब सरकार कब पूर्णकालिक प्राचार्यों की पोस्टिंग करेगी, इसका लोगों को इंतजार है।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)