बिलासपुर…मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आदिवासी होने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बयान ने छत्तीसगढ़ की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है।

बैज ने बिलासपुर में कहा कि विष्णुदेव साय आदिवासी हैं ही नहीं, वे खुद को वनवासी कहते हैं। उनके मुताबिक, यदि साय आदिवासी होते तो आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज को शुभकामनाएं देते और संदेश जारी करते। बैज ने सवाल उठाया कि आखिर आदिवासी दिवस पर मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज को शुभकामनाएं क्यों नहीं दीं।

बैज के इस बयान पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और बिल्हा विधायक भाजपा के वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक ने तीखा पलटवार किया।

उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को आदिवासी होने के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। कौशिक ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता जानती है कि विष्णुदेव साय कौन हैं और उनकी सामाजिक पहचान क्या है।

कौशिक ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन नेताओं के अपने राजनीतिक गढ़ में ही कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा, वे अब मुख्यमंत्री की पहचान पर सवाल उठा रहे हैं।

उन्होंने इशारा करते हुए कहा कि दीपक बैज बस्तर क्षेत्र से आते हैं और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव सरगुजा संभाग से। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बस्तर और सरगुजा दोनों ही आदिवासी बहुल इलाकों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

यही वजह है कि साय की आदिवासी पहचान को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गई है।

कांग्रेस जहां मुख्यमंत्री द्वारा आदिवासी दिवस पर शुभकामना नहीं दिए जाने को लेकर सवाल खड़े कर रही है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री की सामाजिक पहचान पर अनावश्यक टिप्पणी बता रही है।

बैज के बयान ने एक तरफ मुख्यमंत्री की आदिवासी पहचान को बहस के केंद्र में ला दिया है, तो कौशिक के जवाब ने कांग्रेस के आदिवासी क्षेत्रों में चुनावी प्रदर्शन को मुद्दा बना दिया है। अब दोनों दलों के बीच यह सवाल राजनीतिक तौर पर और कितना तूल पकड़ता है, इस पर नजर रहेगी।