रायपुर। छत्तीसगढ़ में गुरुवार और शुक्रवार को जमकर बारिश हुई। बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती सिस्टम कमजोर पडने से कई राज्यों समेत प्रदेश में भी बारिश का दौर चल रहा है। मूसलाधार बारिश से जन जीवन अस्त-व्यस्त है। बरसात के चलते आज प्रदेश के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया।

इंद्रावती, महानदी और शिवनाथ जैसी नदियां उफान पर हैं। बस्तर में इंद्रावती नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गरियाबंद, बस्तर और दुर्ग जैसे जिलों में बाढ़ जैसे हालात के कारण फंसे हुए यात्रियों व लोगों का सुरक्षित स्थानों पर रेस्क्यू किया गया।

धमतरी में गंगरेल बांध का जलस्तर बढ़ने से उसके गेट खोले गए हैं, जिससे महानदी में पानी छोड़ा जा रहा है। मुंगेली और बालोद के बांध भी ओवरफ्लो हो गए हैं।

वहीँ, रायपुर में खारुन नदी का पानी महादेवघाट पुल के ऊपर तक आ जाने से यातायात प्रभावित हुआ। अमलेश्वर, पाटन से रायपुर आने-जाने वाले ग्रामीण इलाकों का संपर्क टूट गया है।

इधर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने बाढ़ से प्रभावित जिलों के कलेक्टर्स से बात की और स्थिति का जायजा लिया।

गंगरेल बांध के भर जाने के बाद 14 गेट खोल दिए गए हैं। गंगरेल बांध का पानी महानदी में पानी छोड़ा जा रहा है। पानी छोड़े जाने से नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने लगी है। प्रशासन ने नदी किनारे के गांवों में हाई अलर्ट जारी किया है। लोगों को नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

महादेव घाट मार्ग पर जलस्तर बढ़ने से आवागमन बाधित है। महादेवघाट पुल से 2 फीट ऊपर पानी आ गया है और कई नदी-नाले उफान पर हैं। पुलगांव शिवनाथ नदी में जल के बढे हुए स्तर के कारण सुरक्षा के दृष्टिकोण से गणेश विसर्जन नहीं किया जा रहा है। नागरिकों से पुलिस ने अपील है कि महादेव घाट मार्ग का उपयोग न करते हुए आवागमन के लिए मुख्य मार्ग अथवा तरीघाट मार्ग का उपयोग करें। पुलगांव स्थित शिवनाथ नदी के पुल के पास जल बहाव बढ़ने के कारण सुरक्षा के दृष्टिकोण से वहाँ गणेश विसर्जन नहीं किया जा रहा है।

दुर्ग के डांडेसरा में दो बाड़ियों में फंसे हुए तीन लोगों को SDRF की टीम द्वारा सकुशल बाहर निकाला गया। वहीँ, ग्राम भरदा स्थित ईट भट्टा एवं बाड़ियों के लगभग 210 मजदूर व बच्चों को ईट भट्टा के मालिक, ग्राम सरपंच एवं हल्का पटवारी के सहयोग से बाहर निकाल कर शासकीय प्राथमिक शाला भवन में रहने खाने व अन्य आवश्यक भट्टा मालिक, सरपंच द्वारा किया जा रहा है।

ग्राम दनिया के पास शिवनाथ नदी पुल नीचे जलशोधन टावर में आपरेटर पत्नि सहित फंसे थे, जिन्हें NDRF टीम द्वारा रेस्क्यू कर निकाला गया।

नारायणपुर में बाढ़ में फंसे ग्रामीण की बचाई गई जान

थाना धौड़ाई क्षेत्रांतर्गत ग्राम तारागांव में नदी किनारे बंधे बैल को खोलने गए ग्रामीण के बाढ़ के पानी में फंस जाने की सूचना पुलिस को मिली थी।ग्राम तारागांव निवासी गोपी पटेल, पिता राम पटेल 50 वर्ष बैल को खोलने के दौरान अचानक बढ़े बाढ़ के पानी के बीच फंस गए थे। सूचना मिलते ही नगर सेना की बाढ़ बचाव टीम एवं थाना धौड़ाई पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

एसडीओपी छोटेडोंगर मनोज मंडावी व जिला सेनानी नगर सेना मनोहर लाल चौहान, थाना प्रभारी धौड़ाई पीयूष कटियार के नेतृत्व में टीम ने साहस और तत्परता के साथ कार्रवाई करते हुए बाढ़ के बीच फंसे गोपी पटेल को सुरक्षित रेस्क्यू कर बाहर निकाला। समय पर की गई त्वरित कार्रवाई से ग्रामीण की जान बचाई जा सकी।

जगदलपुर में बाढ़ पीड़ितों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में जुटा प्रशासन

बस्तर क्षेत्र में भारी बारिश के चलते उत्पन्न बाढ़ की स्थिति के बीच स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार मुस्तैद होकर पीड़ितों की सेवा में लगा हुआ है। बाढ़ प्रभावित नागरिकों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. मैत्री सहित शहरी स्वास्थ्य विभाग की टीम और स्थानीय मितानिनों ने जगदलपुर शहर के विभिन्न राहत शिविरों का सघन दौरा किया। स्वास्थ्य दल ने भगत सिंह वार्ड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भैरमगंज हायर सेकेंडरी स्कूल, पंचपथ तथा प्रवीरचंद्र वार्ड के पनारापारा हायर सेकेंडरी स्कूल में बने शिविरों में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान शिविरों में शरण लिए हुए बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा मौसमी बीमारियों व संक्रमण से बचाव के लिए जरूरतमंद मरीजों को मौके पर ही आवश्यक दवाइयों का निशुल्क वितरण किया गया।

इसी क्रम में नगरनार क्षेत्र में भी राहत एवं बचाव कार्य तत्परता से जारी हैं, जहां नदी बोड़ना गांव के जलभराव से प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित निकालकर नगरनार स्थित शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर में पहुंचाया गया है। यहां ठहरे सभी प्रभावितों की सेहत की जांच कर उन्हें तुरंत दवाइयां दी गईं, ताकि विषम परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की संक्रामक बीमारी के फैलाव को समय रहते रोका जा सके। स्वास्थ्य टीमें लगातार सभी शिविरों की निगरानी कर रही हैं और प्रभावितों को स्वच्छ पेयजल, ओआरएस एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जा रही है।