CG Bilaspur High Court/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती के मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए शासन के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के सचिव डी. राहुल वेंकट को अदालत के आदेश की अवहेलना करने पर अवमानना नोटिस जारी किया है।

यह पूरा विवाद नर्सिंग कॉलेजों में डिमांस्ट्रेटर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर शत-प्रतिशत महिला आरक्षण को असंवैधानिक करार दिए जाने के बावजूद, पुरुषों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू न करने से जुड़ा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए पांच सप्ताह बाद की तिथि निर्धारित की है।

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मामले की पृष्ठभूमि में जाएं तो छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने 8 दिसंबर 2021 को सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में सीधी भर्ती के लिए एक विज्ञापन निकाला था। इस विज्ञापन में भर्ती नियमों का हवाला देते हुए यह शर्त रखी गई थी कि इन पदों पर केवल महिला अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकती हैं।

इस नियम को लैंगिक भेदभाव और समानता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए अभय कुमार किस्पोट्ता, डॉ. अजय त्रिपाठी और अन्य अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जब नर्सिंग पाठ्यक्रमों (B.Sc. और M.Sc. नर्सिंग) में पुरुष और महिला दोनों को समान रूप से प्रवेश दिया जाता है, तो अध्यापन के क्षेत्र में पुरुषों को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना तर्कसंगत नहीं है।

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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि अस्पतालों में मरीजों की देखभाल के लिए महिलाओं का विशेष कौशल होता है और संविधान का अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने की शक्ति देता है।

हालांकि, हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इन तर्कों को अपर्याप्त मानते हुए करीब तीन साल पहले ही 100% महिला आरक्षण के नियम को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि इन पदों पर पुरुषों को भी शामिल करते हुए भर्ती प्रक्रिया नए सिरे से संचालित की जाए।

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अदालत के आदेश के बाद भी विभाग की उदासीनता का आलम यह रहा कि आदेश के महज 6 दिन बाद ही पीएससी ने शासन को संशोधित विज्ञापन जारी करने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन उस पर कोई अमल नहीं हुआ।

हद तो तब हो गई जब नियमित भर्ती प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डालकर, 22 जून 2026 को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने उन्हीं पदों के लिए संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने इसे अदालत के आदेश की सीधी अवमानना बताते हुए दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।