VSK App/रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति और उससे जुड़े वेतन भुगतान के नए आदेश ने राज्य के शिक्षा जगत में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा 27 जुलाई 2026 को जारी किए गए निर्देश, जिसमें VSK ऐप के जरिए दर्ज उपस्थिति को ही वेतन का आधार बनाने की बात कही गई है, उसके खिलाफ शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।

VSK App/सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने इस आदेश को पूरी तरह अव्यावहारिक और दमनकारी बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की है। संगठन ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि तकनीकी खामियों की वजह से किसी भी शिक्षक का वेतन काटा गया, तो पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

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फेडरेशन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बसंत कौशिक और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि वे शिक्षा के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विभाग एक ऐसी तकनीकी व्यवस्था को अनिवार्य बना रहा है जो खुद अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं है।

संगठन के अनुसार, छत्तीसगढ़ के लगभग 52 हजार स्कूलों के ढाई लाख शिक्षक जब एक ही समय पर ऐप पर उपस्थिति दर्ज करने का प्रयास करते हैं, तो सिस्टम का सर्वर ओवरलोड होकर क्रैश हो जाता है। शिक्षकों को अक्सर “Server Error 500” और “Failed to Login” जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण समय पर स्कूल पहुंचने के बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती।

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तकनीकी समस्याओं का जिक्र करते हुए फेडरेशन ने बताया कि बस्तर, सरगुजा और जशपुर जैसे दूरस्थ आदिवासी अंचलों में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति बेहद खराब है। कई बार ऐप गलत लोकेशन दिखाता है या GPS काम नहीं करता, जिससे शिक्षक को ऐप पर ‘अनुपस्थित’ मान लिया जाता है।

इसके अलावा, पुराने एंड्रॉयड फोन में ऐप के बार-बार हैंग होने और डेटा सिंक न होने की समस्या भी आम है। संगठन का तर्क है कि जब स्कूलों में विधिवत भौतिक उपस्थिति पंजी (रजिस्टर) रखी जाती है, जिस पर संस्था प्रमुख के हस्ताक्षर होते हैं, तो उस वैधानिक रिकॉर्ड को दरकिनार कर केवल एक त्रुटिपूर्ण ऐप के भरोसे वेतन रोकना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है।

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शिक्षकों का कहना है कि वे प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर अपने कर्तव्य स्थल पर पहुंचते हैं और अध्यापन के साथ-साथ मिड-डे मील, छात्रवृत्ति और अन्य महत्वपूर्ण विभागीय कार्यों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में सिस्टम की विफलता की सजा शिक्षकों को देना उनके परिवार और उनके मनोबल के साथ खिलवाड़ है।

फेडरेशन ने सरकार से मांग की है कि DPI के आदेश के विवादित बिंदु को तत्काल स्थगित किया जाए और जब तक ऐप की सभी खामियां दूर नहीं हो जातीं, तब तक भौतिक उपस्थिति पंजी को ही वेतन का अंतिम प्रमाण माना जाए। साथ ही, उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए शिक्षक प्रतिनिधियों को शामिल कर एक उच्चस्तरीय समिति बनाने की भी अपील की है।