buying property is expensive/भोपाल। मध्य प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ आम लोगों को बड़ा आर्थिक झटका लगने जा रहा है। एक अप्रैल से प्रदेश में मकान और जमीन खरीदना महंगा हो जाएगा। केंद्रीय मूल्यांकन समिति ने जिला स्तर से प्राप्त प्रस्तावों को मंजूरी देते हुए कलेक्टर गाइडलाइन दरों में औसतन 16 प्रतिशत तक वृद्धि का जो फैसला लिया है, वह लागू हो जाएगा। इस निर्णय का सीधा असर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर पड़ेगा, जिससे खरीदारों को अब पहले से अधिक कीमत चुकानी होगी।

उल्लेखनीय है कि महानिरीक्षक पंजीयन अमित तोमर की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेशभर की गाइडलाइन दरों की विस्तृत समीक्षा की गई थी। जिसमें कि प्रदेश में करीब 1.05 लाख लोकेशन में से 65,300 स्थानों पर गाइडलाइन दरें बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इन दरों का निर्धारण पिछले पांच वर्षों के रजिस्ट्री ट्रेंड, स्थानीय बाजार की परिस्थितियों और जनप्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर किया गया है। कलेक्टर गाइडलाइन दरें किसी भी संपत्ति की न्यूनतम सरकारी कीमत तय करती हैं, जिसके आधार पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क निर्धारित होता है।

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buying property is expensive/ऐसे में इन दरों में वृद्धि का मतलब है कि अब हर प्रॉपर्टी सौदे में खरीदारों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इसका असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देखने को मिलेगा, लेकिन तेजी से विकसित हो रहे शहरों और प्राइम लोकेशनों पर इसका प्रभाव ज्यादा पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत केवल जमीन और मकानों की कीमत ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि पक्के मकानों के निर्माण की लागत में भी इजाफा किया गया है। करीब पांच साल बाद निर्माण लागत में संशोधन करते हुए इसे 1000 रुपये प्रति वर्गमीटर तक बढ़ा दिया गया है।

buying property is expensive/दरअसल, इससे उन संपत्तियों की रजिस्ट्री और महंगी हो जाएगी, जिनका मूल्यांकन निर्माण लागत के आधार पर किया जाता है। पहले से ही महंगे हो चुके सीमेंट, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री के बीच यह बढ़ोतरी आम लोगों के लिए घर बनाना और कठिन बना सकती है।

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वहीं इस बार एक बड़ा बदलाव यह भी किया गया है कि प्रीमियम अपार्टमेंट को सामान्य फ्लैट्स से अलग श्रेणी में रखा गया है। जिन अपार्टमेंट में स्विमिंग पूल, क्लब हाउस, जिम और गेमिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, उनकी गाइडलाइन दर सामान्य मल्टीस्टोरी इमारतों की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक निर्धारित की गई है।

इससे लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट में निवेश करने वालों को ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा। हालांकि सरकार ने कुछ वर्गों को राहत देने की भी कोशिश की है। कच्चे मकान और टीन शेड की निर्माण लागत में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को राहत मिलेगी। यह कदम उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो सीमित संसाधनों में आवास की व्यवस्था करते हैं।

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विशेषज्ञों में मृणाल शास्त्री का मानना है कि गाइडलाइन दरों में इस बढ़ोतरी का असर रियल एस्टेट बाजार पर भी पड़ेगा। अचानक बढ़ी दरों के कारण प्रॉपर्टी की मांग में कुछ समय के लिए कमी आ सकती है, खासकर मध्यम वर्गीय खरीदारों के बीच। वहीं निवेश के उद्देश्य से संपत्ति खरीदने वाले लोग भी अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकते हैं।

सरकार का तर्क है कि यह संशोधन बाजार मूल्य के अनुरूप किया गया है। कई क्षेत्रों में लंबे समय से गाइडलाइन दरों में बदलाव नहीं हुआ था, जिससे वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी दरों के बीच बड़ा अंतर आ गया था। इस अंतर को खत्म करने और रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। साथ ही, इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद भी जताई जा रही है, जिससे विकास कार्यों को गति मिलेगी।buying property is expensive