रायपुर… छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए रिक्त शैक्षणिक पदों को अतिथि व्यवस्था से भरने का रास्ता साफ हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नियुक्तियां छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता नीति, 2024 (यथा संशोधित 2026) के प्रावधानों के अनुसार होंगी। वित्त विभाग ने भी संशोधित नीति को 17 अगस्त 2026 को मंजूरी दे दी है।

प्राध्यापक, ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी होंगे

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नई व्यवस्था के तहत शासकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में रिक्त प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी के पदों पर अतिथि व्यवस्था की जा सकेगी। इसके अलावा शिक्षण सहायक तथा ग्रंथालय एवं क्रीड़ा सहायक के लिए भी अतिथि व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है। इससे नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने तक संस्थानों में शिक्षण और अकादमिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी।

व्याख्याताओं को 50 हजार रुपये मानदेय

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सरकार ने अतिथि व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पदों के लिए कार्य दिवस के आधार पर मानदेय तय किया है। अतिथि व्याख्याताओं को 2 हजार रुपये प्रतिदिन, अधिकतम 50 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। अतिथि ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी को 1,600 रुपये प्रतिदिन, अधिकतम 40 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।

इसी तरह अतिथि शिक्षण सहायक के लिए 1,400 रुपये प्रतिदिन और अधिकतम 35 हजार रुपये प्रतिमाह, जबकि अतिथि ग्रंथालय एवं क्रीड़ा सहायक के लिए 1,200 रुपये प्रतिदिन और अधिकतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित किया गया है।

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पीजी में 55 प्रतिशत अंक जरूरी

अतिथि व्याख्याता पद के लिए शैक्षणिक अर्हता विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के 2018 के नियमों के अनुरूप रहेगी। स्नातकोत्तर स्तर पर सामान्य अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक जरूरी होंगे। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत की छूट के साथ न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की पात्रता रखी गई है।

आयु सीमा भी निर्धारित कर दी गई है। अतिथि व्याख्याता के लिए अधिकतम आयु 65 वर्ष, जबकि ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी के लिए अधिकतम आयु 62 वर्ष रहेगी।

अंग्रेजी माध्यम कॉलेजों के लिए अलग शर्त

स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालयों में अतिथि व्यवस्था से नियुक्त होने वाले अभ्यर्थियों के लिए अंग्रेजी भाषा में अध्यापन और संवाद की दक्षता अनिवार्य होगी। यानी संबंधित विषय की शैक्षणिक योग्यता के साथ अंग्रेजी माध्यम में प्रभावी ढंग से पढ़ाने की क्षमता भी चयन का अहम आधार बनेगी।

नौकरी मिलेगी, नियमितीकरण का हक नहीं

आदेश में सरकार ने एक महत्वपूर्ण शर्त भी स्पष्ट कर दी है। अतिथि व्यवस्था के तहत होने वाली नियुक्ति भविष्य में नियमितीकरण का आधार नहीं बनेगी। चयनित अभ्यर्थी को कार्यभार ग्रहण करते समय शपथ पत्र देना होगा कि उसके खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण लंबित नहीं है और वह किसी अन्य सरकारी या अर्ध-सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं है।

पढ़ाई के साथ कॉलेज के दूसरे काम

अतिथि व्याख्याताओं की जिम्मेदारी केवल कक्षा में अध्यापन तक सीमित नहीं रहेगी। संस्था प्रमुख के निर्देश पर उन्हें परीक्षा, प्रवेश प्रक्रिया, नैक मूल्यांकन और सांस्कृतिक गतिविधियों सहित महाविद्यालय की अन्य शैक्षणिक एवं अकादमिक गतिविधियों में भी सहयोग करना होगा। काम संतोषजनक नहीं मिलने पर उनकी सेवाएं तत्काल समाप्त की जा सकेंगी।

चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की सूची संबंधित विश्वविद्यालय या महाविद्यालय की वेबसाइट और सूचना पटल पर प्रकाशित की जाएगी। नए दिशा-निर्देशों से प्रदेश के सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में रिक्त पदों के कारण प्रभावित हो रही शैक्षणिक व्यवस्था को अस्थायी रूप से सहारा मिलने की उम्मीद है।