बेमेतरा।शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसकी शुरुआत बेमेतरा से हो गई है। सोमवार को शिक्षक संगठनों के प्रदेश और जिला पदाधिकारियों के साथ साजा, नवागढ़ और बेमेतरा विधानसभा क्षेत्र से बड़ी संख्या में शिक्षक जिला मुख्यालय पहुंचे। संयुक्त शिक्षक मोर्चे ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर TET, पदोन्नति, सेवा सुरक्षा और जिले की लंबित समस्याओं पर तत्काल निर्णय की मांग की।

ज्ञापन में सेवारत शिक्षकों के लिए साल में कम से कम दो बार विशेष विभागीय TET कराने की मांग प्रमुख रही। इसके साथ 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त रखने, वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति करने और TET उत्तीर्ण करने के लिए 1 सितंबर 2028 तक समय देने की मांग की गई। मार्च 2026 में पदोन्नति सूची जारी होने के बाद 11 अगस्त के आदेश में काउंसलिंग के लिए अचानक TET की जानकारी मांगे जाने का भी शिक्षकों ने विरोध किया।

ये खबर भी पढ़ें…
प्रधान पाठक पद पर पदोन्नति, DEO ने मांगी शिक्षकों की गोपनीय चरित्रावली
प्रधान पाठक पद पर पदोन्नति, DEO ने मांगी शिक्षकों की गोपनीय चरित्रावली
बलौदाबाजार-भाटापारा। जिले में सहायक शिक्षक एवं सहायक शिक्षक एलबी संवर्ग के शिक्षकों को प्रधान पाठक प्राथमिक शाला के पद पर...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

शिक्षकों ने जिले की स्थानीय समस्याएं भी ज्ञापन में रखीं। सत्र 2025-26 के पात्र शिक्षकों को मुख्यमंत्री शिक्षक अलंकरण पुरस्कार नहीं मिलने, बालवाड़ी केंद्रों का लंबित मानदेय जारी करने और विभागीय सूचनाओं के समय पर संप्रेषण के लिए सूचना तंत्र दुरुस्त करने की मांग की गई। संगठनों ने चेताया कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आगे की रणनीति तय की जाएगी।

ज्ञापन के बाद टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा ने सरकार की कार्यशैली को लेकर खुलकर बात रखी। उनका कहना है कि शिक्षकों के बीच आक्रोश है और इसकी बड़ी वजह सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच संवाद की कमी है।

ये खबर भी पढ़ें…
कोण्डागांव में 20 अगस्त को रोजगार मेला, 63 पदों पर भर्ती का अवसर
कोण्डागांव में 20 अगस्त को रोजगार मेला, 63 पदों पर भर्ती का अवसर
कोण्डागांव : जिले के शिक्षित युवक-युवतियों को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला रोजगार...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

स्कूल शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक की, स्कूलों का निरीक्षण किया, शिक्षकों से बात भी की और ज्ञापन के दौरान शिक्षक नेताओं से मुलाकात भी हुई, लेकिन अभी तक सभी शिक्षक संगठनों की सामूहिक बैठक बुलाकर बैठकर बातचीत नहीं हुई।

सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश संयोजक मनीष मिश्रा बताते हैं कि शिक्षकों की कई समस्याएं ऐसी हैं जिन्हें बातचीत से दूर किया जा सकता है। विभागीय TET का रास्ता भी बातचीत से निकाला जा सकता है। अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रहे लोगों के लिए विज्ञान प्रयोगशाला सहायक जैसे पदों पर प्रदेश स्तर पर व्यवस्था बनाकर समाधान निकाला जा सकता है।

ये खबर भी पढ़ें…
पीएमश्री विद्यालयों में अंशकालिक संगीत प्रशिक्षक भर्ती, आवेदन 27 अगस्त तक
पीएमश्री विद्यालयों में अंशकालिक संगीत प्रशिक्षक भर्ती, आवेदन 27 अगस्त तक
बिलासपुर : जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा के अंतर्गत जिले के 10 पीएमश्री विद्यालयों में अंशकालिक संगीत प्रशिक्षक की सेवाएं...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

शिक्षक नेता मनीष मिश्रा का कहना है कि सरकार को करीब पौने तीन साल पूरे होने जा रहे हैं और एक साल बाद चुनावी मोड़ शुरू हो जाएगा। सरकार अगर मानती है कि उसने मोदी की गारंटी लागू की जाएगी तो उसका लाभ शिक्षकों तक पहुंचाने में इतनी देरी क्यों हो रही है।

उन्होंने डॉ. रमन सिंह की सरकार के समय शिक्षा कर्मियों के लिए लिए गए फैसलों के बारे में बताया कि संविलियन एक ऐतिहासिक निर्णय था। उनका मानना है कि अगर सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने का फैसला संविलियन के साथ या कुछ दिन बाद ही ले लिया गया होता तो शिक्षकों के बीच सरकार को लेकर अलग संदेश जाता। तब लगता कि सरकार ने आंदोलन को महत्व दिया है।

संविलियन को लेकर उन्होंने उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि आज बहुत से लोग मानते हैं कि शिक्षकों के आंदोलन और बड़े वोट बैंक के प्रभाव ने संविलियन की राह बनाई। उन्होंने तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि संविलियन की घोषणा उनकी मौजूदगी में हुई थी। वे नहीं होते तो शायद संविलियन भी नहीं होता।

युक्ति युक्तकरण को लेकर मनीष मिश्रा ने सरकार के दावे पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि प्रदेश के 33 जिलों में युक्तियुक्तकरण अलग-अलग तरह की गड़बड़ियां लेकर आया। 23 शिक्षक संगठनों ने मिलकर इसकी खामियां सामने रखीं, लेकिन सरकार ने उस पर ध्यान नहीं दिया।

TET के मुद्दे पर मनीष मिश्रा सबसे ज्यादा मुखर दिखाई दिए। उन्होंने बताया कि 1 सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई राज्य सरकारों ने पुनर्विचार याचिका के जरिए राहत मांगने का रास्ता अपनाया। 29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 65 से अधिक Review Petitions का निपटारा किया, जिनमें राज्य सरकारों के साथ शिक्षक संगठन और व्यक्तिगत शिक्षक भी शामिल थे।

उनका कहना है कि ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार ने सेवारत शिक्षकों की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका क्यों नहीं दाखिल की। अब SLP दायर किए जाने की बात कही जा रही है तो सरकार को उसकी जानकारी भी शिक्षकों के सामने रखनी चाहिए।

मनीष मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का उल्लेख किया जिसमें सेवारत शिक्षकों को TET उत्तीर्ण करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक समय दिया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि TET परीक्षा समय-समय पर और अधिमानतः साल में दो बार आयोजित की जाए, ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सके।

इसी आधार पर उनका कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने साल में दो बार TET कराने की बात कही है तो फिर छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए विभागीय TET क्यों नहीं कराई जा रही। शिक्षकों को आम परीक्षार्थियों के साथ परीक्षा में बैठने की व्यवस्था करने के बजाय सरकार अपने स्तर पर विशेष TET करा सकती है।

मनीष मिश्रा बताते हैं कि शिक्षकों की मांग TET से छूट की नहीं है। मांग यह है कि पुराने सेवारत शिक्षकों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे उनकी सेवा, वरिष्ठता और पदोन्नति सुरक्षित रहे। इसके लिए सरकार शिथिल व्यवस्था बना सकती है। उन्होंने पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विभागीय TET के बाद भी पदोन्नति का मामला कानूनी विवाद में फंसा है, इसलिए छत्तीसगढ़ को परीक्षा के साथ उसकी वैधानिक स्थिति भी साफ करनी चाहिए। तमिलनाडु की तरह सेवारत शिक्षकों के लिए TET का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।

स्कूल शिक्षा मंत्री के उस बयान को लेकर भी मनीष मिश्रा ने जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट में TET मामले को लेकर सरकार की ओर से गुहार लगाने की बात कही गई है। उनका कहना है कि अगर सरकार ने याचिका दायर की है तो उसकी केस डायरी, मांग और वर्तमान स्टेटस शिक्षकों के सामने रखा जाना चाहिए।

उनका कहना है कि नीति बनाने वाले भले गिनती में कम हों, लेकिन उन नीतियों को जमीन पर लागू करने वाले और उनकी खामियों को पहचानने वाले लाखों शिक्षक हैं। नीति बनाने वालों के हाथ में कलम भले कुछ ही लोगों के पास हो, लेकिन उस कलम से लिखी हर इबारत को पढ़ने और उसका असर झेलने वाले लाखों शिक्षक हैं। इसलिए नीति बनाते समय यह नहीं मानना चाहिए कि उसे कोई देख नहीं रहा। व्यवस्था की असली परीक्षा कागज पर नहीं, उन लोगों के बीच होती है जो रोज उसे लागू करते हैं।

बेमेतरा का यह कार्यक्रम फिलहाल एक ज्ञापन है, लेकिन इसके पीछे शिक्षकों का बढ़ता असंतोष साफ दिखाई दे रहा है। अब देखना यह है कि सरकार इन मांगों को एक और ज्ञापन मानकर आगे बढ़ती है या शिक्षकों के साथ बैठकर बातचीत का रास्ता खोलती है।

कार्यक्रम में आज के रैली धरना प्रदर्शन में रविन्द्र राठौर प्रान्त अध्य्क्ष,मनीष मिश्रा प्रान्तीय संयोजक, विकास राजपूत प्रान्त अध्य्क्ष नवीन शिक्षक संघ, मोहम्मद यासीर इरफ़ान प्रान्तीय प्रवक्ता,सर्व शिक्षक संघ, देवेंद्र हरमुख उपा अध्य्क्ष छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन , बसन्त कौशिक कार्यकारी प्रान्त अध्य्क्ष , अश्वनी कुर्रे, कार्यकारी प्रान्त अध्य्क्ष कौशल अवस्थी, सिराज बख्स कार्यकारी प्रान्त अध्य्क्ष ,आदित्य गौरव प्रदेश महासचिव ,प्रेम नारायण शर्मा जिला अध्य्क्ष कवर्धा ,अशोक कुमार धुर्वे प्रान्तीय मीडिया प्रभारी ,पोखन साहू जिला अध्य्क्ष बेमेतरा ,चन्द्र शेखर पटेल,अजय यादव,गंगाधर दुबे,बाबूलाल गोयल,चन्द्रशेखर पटेल, गेंदराम वर्मा,ओम नारायण साहू,राजा वर्मा,दीपक राजपूत, पुरनेन्द्र तिवारी,मनीष पाटील सुनील साहू श्रीमती सुकन्या राजपूत,सुनीता साहू, नुतेश्वर चंद्राकर आदि सैकड़ो शिक्षक उपस्थित हुए