Cg news।छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने वित्त मंत्री ओपी चौधरी को स्मरण पत्र लिखा है। फेडरेशन ने विधानसभा चुनाव के दौर में भाजपा द्वारा घोषणा पत्र में शामिल बातों का जिक्र करते हुए लिखा है, घोषणा पत्र में लिखी बातों को अमल करने का अब समय आ गया है।

फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक ने लिखा है, शासकीय सेवकों को उनके पूर्ण शासकीय सेवाकाल में 3 उच्च वेतनमान का लाभ उपलब्ध कराने के प्रावधान किये गये हैं।

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इस निर्देश के अनुसार 30 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण होने के उपरांत तृतीय समयमान वेतनमान देय किया गया है। इस ज्ञापन के माध्यम से हम कमशः 8 वर्ष, 16 वर्ष, 24 वर्ष व 30 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर चार स्तरीय समयमान वेतनमान लागू करने का अनुरोध कर रहे हैं।

तीन स्तरीय वेतनमान की वर्तमान व्यवस्था शासकीय सेवकों को उनके पूर्ण सेवाकाल में न्यायोचित लाभ प्रदान नहीं कर सकती है।

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छत्तीसगढ़ राज्य 1 नवम्बर 2000 को अस्तित्व में आया था। ये राज्य मध्यप्रदेश का लगभग 26 प्रतिशत भाग ही है। प्रदेश में मध्यप्रदेश की तुलना में शासकीय अमला कम है एवं शासकीय अमले को विभिन्न संवर्गों में उच्च स्तरीय पद कम संख्या में स्वीकृत होने के कारण पदोन्नति के अवसर भी बेहद सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।

राज्य गठन के उपरांत कतिपय विभागों को छोड़कर अधिकांश विभागों ने अपने संभाग स्तरीय सेटअप को समाप्त कर दिया है, जबकि मध्यप्रदेश में अभी भी प्रायः सभी विभागों में संभाग स्तरीय सेटअप विद्यमान है।

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संभाग स्तरीय कार्यालय न होने से विभाग में उच्च स्तर से लेकर चतुर्थ स्तर तक के शासकीय सेवकों के पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित हो गये हैं। छत्तीसगढ़ राज्य वित्तीय दृष्टि से समृद्ध है। अतः समयमान वेतनमान का लाभ उपलब्ध कराने में विशेष कठिनाई नहीं होना चाहिए।

शासकीय सेवकों को समयमान वेतनमान का लाभ मिलने से न केवल उनका आर्थिक स्तर उन्नत होता है, बल्कि पदोन्नति के लिए अवांछित प्रतिस्पर्धा में भी कमी आती है और आर्थिक स्तर उन्नत होने से उनमें मानसिक संतोष पनपता है, जिसके फलस्वरूप वे उत्साह के साथ जनसेवा के कार्यों को संपन्न कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के उपरांत राज्य में मध्यप्रदेश से आये हुए अधिकांश शासकीय सेवक सेवानिवृत हो चुके हैं अथवा सेवानिवृत्ति की ओर हैं। राज्य को गठित हुए 22 वर्ष का समय व्यतीत हो चुका है। ऐसी स्थिति में 30 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण होने पर तीसरा समयमान वेतनमान दिये जाने की स्थिति या तो निर्मित ही नहीं हो रही है।

या फिर ऐसे समय पर निर्मित हो रही है, जबकि शासकीय सेवक लगभग सेवानिवृत्ति की कगार पर हैं। अतः वे इस तृतीय समयमान वेतनमान का वास्तविक लाभ व आनंद नहीं उठा पा रहे हैं। चार स्तरीय वेतनमान लागू करने से बहुत अधिक वित्तीय भार नहीं बढ़ेगा।

यदि चार स्तरीय वेतनमान क्रमशः 8, 16, 24 व 30 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर लागू किया जाता है तो निश्चित रूप से प्रत्येक शासकीय सेवक को मन में यह संतुष्टि महसूस होगी कि उन्हें यदि पदोन्नति प्राप्त नहीं होती है।

तो भी उनका आर्थिक नुकसान नहीं होगा, जिसके फलस्वरूप वे शासन को एक जिम्मदार नियोक्ता के रूप में देखते हुए समर्पित भाव से कार्य करेंगे। वहीं दूसरी ओर यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो शासकीय सेवक पदोन्नति प्राप्त होने अथवा न होने के इंतजार में हताशा व निराशा की भावना के साथ कार्य करते हैं, जो कि एक संवेदनशील नियोक्ता होने के रूप में शासन भी नहीं चाहता है।

छत्तीसगढ़ राज्य में समय पर पदोन्नति की कार्यवाही भी होना प्रायः कठिन पाया गया है। मुख्यतः इसमें नवीन राज्य होने के कारण प्रशासकीय प्रक्रिया का ठोस व त्वरित गति न पा पाना कारण रहा है।

इसके साथ ही यह भी देखने में आया है कि शासकीय सेवकों की गोपनीय चरित्रावलियां बहुत लम्बे समय तक न लिखे जाने अथवा मतांकन सही न होने के कारण प्रक्रियागत विलंब से लंबित रही हैं।

जिसके फलस्वरूप भी पदोन्नति की कार्यवाही बाधित होती है एवं समय पर पदोन्नति नहीं मिल पाती है।

यदि चार स्तरीय वेतनमान प्रदान किया जाता है तो पदोन्नति समय पर न होने के असंतोष को भी सटीक तरीके से कम किया जा सकता है एवं कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया जा सकता है।

यह उल्लेखनीय है कि वर्तमान सरकार के निर्वाचन के पूर्व जारी किये गये घोषणा पत्र में चार स्तरीय वेतनमान..को लागू करने का वादा किया गया है।

भाजपा सरकार ने शासकीय सेवकों को समय पर पदोन्नति प्राप्त न होने की स्थिति को देखते हुए ही कर्मचारियों के कल्याण की दृष्टि से इसे अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था और अब वही सरकार शासन में है।

राज्य शासन के घोषणा पत्र के वादों को पूर्ण करने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासकीय विभागों की होती है। यदि इसे नहीं किया गया तो निर्वाचित सरकार का घोषणा पत्र में किया गया वादा प्रभावित होगा एवं कर्मचारियों की सोच पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

अतः उक्त न्यायसंगत तर्कों को ध्यान में रखते हुए जनकल्याणकारी सरकार तथा वित्त विभाग के संवेदनशील अधिकारियों से छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ये उम्मीद करता है कि इस विषय पर वित्त विभाग द्वारा तत्परतापूर्वक पहल की जाकर 8 वर्ष, 16 वर्ष, 24 वर्ष तथा 30 वर्ष में चार स्तरीय समयमान वेतनमान लागू करने के निर्देश प्रसारित किये जायेंगे ।