8th pay commission/ देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। आठवां केंद्रीय वेतन आयोग इस समय राज्य सरकारों के साथ विचार-विमर्श और बातचीत के अपने आखिरी दौर में है। नए वेतन ढांचे को लेकर कर्मचारी यूनियनों और पेंशनर्स की ओर से भारी-भरकम मांगें सामने आई हैं, लेकिन केंद्र और राज्यों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ (Fiscal Burden) को देखते हुए आयोग ‘फिटमेंट फैक्टर’ तय करने के मामले में काफी सावधानी बरत सकता है।

8th pay commission/शुरुआती चर्चाओं से संकेत मिल रहे हैं कि वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए आयोग फिटमेंट फैक्टर को पिछले यानी 7वें वेतन आयोग द्वारा अपनाए गए 2.57 मल्टीप्लायर के आसपास ही सीमित रख सकता है, जबकि कर्मचारी संगठन इसे और ज्यादा बढ़ाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।

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8th pay commission/केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन संशोधन (Sallary Revision) की पूरी प्रक्रिया में फिटमेंट फैक्टर ही सबसे अहम हिस्सा होता है। यह वह फॉर्मूला या मल्टीप्लायर है, जिससे मौजूदा बेसिक पे (मूल वेतन) और पेंशन को गुणा करके नया वेतन स्तर निर्धारित किया जाता है।

मामले से जुड़े एक सीनियर सरकारी अधिकारी के अनुसार, आयोग की अब तक की प्रक्रिया मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर की एक व्यावहारिक रेंज तय करने, राज्यों से मिले सुझावों का मिलान करने और नए वेतन-पेंशन ढांचे से पड़ने वाले वित्तीय असर का सटीक आकलन करने पर केंद्रित हो गई है।

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एक तरफ जहां सरकार वित्तीय अनुशासन को लेकर सतर्क है, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय कर्मचारियों और उनके संगठनों ने आयोग के सामने काफी ऊंची मांगें रखी हैं। यूनियनों की ओर से सौंपे गए मांगपत्र में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.83 करने की मांग की गई है।

कर्मचारियों का तर्क है कि अगर सरकार 3.83 के इस मल्टीप्लायर को स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर सीधे 69,000 रुपये प्रति माह हो जाएगी।

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वेतन आयोग को मेमोरेंडम (मांगपत्र) सौंपने की औपचारिक प्रक्रिया 15 जून को पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। इसके साथ ही कर्मचारी यूनियन्स, पेंशनर्स एसोसिएशन और अन्य सभी हितधारकों (Stekholders) की तरफ से मांगें दर्ज कराने का दौर पूरा हो गया है। अब आयोग इन मांगों की बारीकी से समीक्षा कर रहा है।

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसी बड़ी राज्य सरकारों से जो वित्तीय आंकड़े और प्रतिक्रियाएं मिली हैं, उनका अध्ययन किया जा रहा है। इससे पहले आयोग की टीम दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर वहां के स्थानीय हितधारकों के साथ व्यापक बैठकें कर चुकी है। बाकी बचे राज्यों से बातचीत पूरी होने के बाद, पैनल अपनी अंतिम रिपोर्ट का आधिकारिक ड्राफ्ट तैयार करने से पहले सभी इनपुट को एक साथ समेकित (Consolidate) करेगा।

8th pay commission – न्यूनतम सैलरी की मांग के बीच ‘फिटमेंट फैक्टर’ पर फूंक-फूंक कर कदम रख रही सरकार, जानें क्या है तैयारी

अगर पिछले वेतन आयोग के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने की सिफारिश की थी। इस फैसले के बाद केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक पे 7,000 रुपये से बढ़कर सीधे 18,000 रुपये (राउंड फिगर में 17,990 रुपये) हो गई थी।

हालांकि, इस बढ़ोतरी से सरकारी खजाने पर बड़ा असर पड़ा था। आंकड़ों के मुताबिक, इस वेतन संशोधन के कारण केंद्र सरकार का राजस्व खर्च वर्ष 2015-16 के 4.8 फीसदी से बढ़कर वर्ष 2016-17 में जीडीपी का 9.9 फीसदी तक पहुंच गया था। यही वजह है कि 8वें वेतन आयोग के सामने इस बार कर्मचारियों को संतुष्ट करने के साथ-साथ देश की आर्थिक सेहत और राज्यों के बजट को सुरक्षित रखने की एक बहुत बड़ी दोहरी चुनौती है।