बिलासपुर…नगर निगम बिलासपुर की व्यापार विहार स्थित बेशकीमती जमीन के आवंटन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सिविल लाइन थाने में दायर परिवाद में पूर्व महापौर रामशरण यादव, तत्कालीन नगर निगम अधिकारियों और कुछ अन्य लोगों पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेकर टेंडर प्रक्रिया प्रभावित करने और शासकीय दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन का लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की एफआईआर दर्ज कर ईओडब्ल्यू, एसीबी और ईडी जैसी एजेंसियों से जांच कराने की मांग की है। दूसरी ओर, रामशरण यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी छवि खराब करने की साजिश बताया है। मामले में कोर्ट परिवाद के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

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परिवाद में लगाए गए गंभीर आरोप

परिवादकर्ता अनुपम तिवारी का आरोप है कि वर्ष 2021-22 में व्यापार विहार स्थित लगभग 7500 वर्गफीट के प्लॉट के आवंटन के दौरान टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि शासकीय रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ कर प्लॉट का स्वरूप बदला गया, जिससे करीब 5301 वर्गफीट अतिरिक्त भूमि का लाभ दिलाने का प्रयास हुआ। शिकायत में दावा किया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की कथित रिश्वत का लेन-देन हुआ।

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परिवाद में तत्कालीन नगर निगम अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। साथ ही पूर्व महापौर के कार्यकाल में एमआईसी और सामान्य सभा से पारित अन्य जमीनों और दुकानों के आवंटन की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।

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ईडी, ईओडब्ल्यू और एसीबी से जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच ईडी, ईओडब्ल्यू और एसीबी जैसी एजेंसियों से कराने, एफआईआर दर्ज करने और कथित रूप से शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस कथित गड़बड़ी से शासन और नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का प्रयास हुआ।

रामशरण यादव बोले- ‘पूरी प्रक्रिया नियमों से होती है’

पूर्व महापौर रामशरण यादव ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नगर निगम में किसी भी जमीन के आवंटन का फैसला अकेला महापौर नहीं करता। आयुक्त टेंडर जारी करते हैं, उसके बाद मामला एमआईसी और फिर सामान्य सभा में जाता है। पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होती है।

उन्होंने कहा कि जिस जमीन को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसका आवंटन कभी पूरा ही नहीं हुआ। तत्कालीन कलेक्टर ने पूरी प्रक्रिया निरस्त कर दी थी और जमीन आज भी नगर निगम के नाम पर दर्ज है। जब जमीन का हस्तांतरण ही नहीं हुआ तो रिश्वत लेने का सवाल ही नहीं उठता।

छवि खराब करने की कोशिश, मानहानि का दावा करूंगा’

रामशरण यादव ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता शहर के कई लोगों के खिलाफ लगातार शिकायतें करता है और ब्लैकमेलिंग के जरिए वसूली का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि यह शिकायत भी उनकी राजनीतिक छवि खराब करने की कोशिश है। उनका दावा है कि इस मामले की जांच वर्ष 2023 में पहले ही हो चुकी है। इसलिए अब वे झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि का दावा करेंगे।

कोर्ट परिवाद पर पुलिस ने शुरू की जांच

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि कोर्ट के आधार पर दायर परिवाद पुलिस के पास आया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान पूर्व महापौर रामशरण यादव का बयान भी दर्ज किया गया है। अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद ही होगी पुष्टि

फिलहाल यह मामला परिवाद और जवाब तक सीमित है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय द्वारा नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।