
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न से जुड़े गंभीर मामलों में कार्रवाई करते हुए तीन सरकारी कॉलेजों के तीन सहायक प्रोफेसरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
शिक्षा सचिव राकेश कंवर की ओर से जारी अलग-अलग आदेशों में इन मामलों में आरोप साबित होने के बाद केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत बड़ी सजा देते हुए तुरंत प्रभाव से सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। विभाग के अनुसार यह कार्रवाई संस्थानों की गरिमा और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
जिला हमीरपुर के सिद्धार्थ राजकीय महाविद्यालय नादौन में तैनात सहायक प्रोफेसर (रसायन विज्ञान) डॉ. अनिल कुमार को एक छात्रा के साथ प्रयोगशाला में कथित यौन उत्पीड़न के मामले में बर्खास्त किया गया है।
विभागीय आदेश के अनुसार 14 नवंबर 2024 को बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा ने लिखित शिकायत दी थी कि रसायन विज्ञान की प्रैक्टिकल कक्षा के दौरान आरोपी शिक्षक ने उसके साथ बार-बार अनुचित तरीके से शारीरिक संपर्क किया। शिकायत कॉलेज प्राचार्य के माध्यम से उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजी गई थी, जिसके बाद जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोप सिद्ध पाए जाने पर उन्हें सेवा से हटाने का आदेश जारी किया गया।
इसी तरह शिमला के जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय लोहराब में तैनात सहायक प्रोफेसर (कत्थक नृत्य) पवन कुमार को भी छात्रा से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामले में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार सातवें सेमेस्टर की एक छात्रा ने आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष शिकायत दी थी कि शिक्षक पिछले कई महीनों से उसका उत्पीड़न कर रहे थे। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि जनवरी 2024 में उसे न्यू शिमला स्थित अपने घर ले जाकर उसके साथ जबरन अभद्र व्यवहार करने की कोशिश की गई, जिससे छात्रा मानसिक रूप से प्रभावित हुई। मामले की जांच और विभागीय कार्रवाई के बाद आरोप गंभीर पाए जाने पर उन्हें सेवा से हटाने का निर्णय लिया गया।
तीसरा मामला शिमला के राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय चौड़ा मैदान से जुड़ा है, जहां सहायक प्रोफेसर (गणित) डॉ. वीरेंद्र शर्मा के खिलाफ छात्रा से अनुचित व्यवहार और जबरन संपर्क स्थापित करने की कोशिश के आरोप लगे थे।
विभागीय आदेश के अनुसार दिसंबर 2021 में बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा ने शिकायत दी थी कि आरोपी शिक्षक ने पहले उसे निजी संदेश भेजे और बाद में मिलने के लिए बुलाकर अपने आवास ले जाने के बाद उसके साथ जबरन शारीरिक संपर्क बनाने का प्रयास किया। छात्रा के विरोध करने पर वह वहां से निकलने में सफल रही। इस मामले में भी जांच पूरी होने के बाद आरोप सिद्ध पाए गए और उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
उच्च शिक्षा विभाग ने तीनों मामलों में कहा है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए नियमों के तहत सेवा से बर्खास्तगी की बड़ी सजा दी गई है और यह सजा सामान्यतः भविष्य में सरकारी सेवा के लिए अयोग्यता भी मानी जाएगी। विभाग का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित वातावरण बनाए रखना और सार्वजनिक विश्वास को मजबूत करना है।





