93 केंद्रों पर सेट, सरकंडा में व्यवस्था कटघरे में: छात्र को कार्डियक अरेस्ट, पेपर 20 मिनट देर से मिला; बाहरी पर्यवेक्षक पर छात्रा के गंभीर आरोप

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल की राज्य पात्रता परीक्षा रविवार को पूरे प्रदेश में आयोजित हुई। बिलासपुर में परीक्षा के लिए 93 केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा दो पालियों में हुई। पहली पाली सुबह 10 से 11.15 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 से 4.15 बजे तक आयोजित की गई। जिले में दोनों पालियों में कुल 25 685 प्रतिभागियों को परीक्षा देनी थी। पहली पाली में 20598 प्रतिभागी उपस्थित रहे, जबकि 5087 अनुपस्थित रहे। दूसरी पाली में 20508 प्रतिभागियों ने परीक्षा दी और 5177 प्रतिभागी अनुपस्थित रहे।

नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर भवानी शंकर साव ने परीक्षा को शांतिपूर्ण और सफल बताया। उनके अनुसार परीक्षा के दौरान किसी बड़ी गड़बड़ी की शिकायत नहीं मिली। हालांकि, इसी दावे के बीच शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आत्मानंद स्कूल, सरकंडा में सामने आए अलग-अलग घटनाक्रमों ने परीक्षा व्यवस्था और केंद्र प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

परीक्षा देकर निकला प्रतिभागी, अचानक गिर पड़ा

दूसरी पाली की परीक्षा समाप्त होने के बाद एक प्रतिभागी अपना बैग लेने जा रहा था। इसी दौरान वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। केंद्र अध्यक्ष प्राचार्य पी. मंडल और वहां मौजूद शिक्षकों ने तत्काल 112 को सूचना दी। प्रतिभागी की हालत गंभीर देख केंद्र प्रबंधन ने एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय उसके दो साथियों के साथ ऑटो से उसे सिम्स भेजने का फैसला किया।

सिम्स में भर्ती के दौरान जानकारी सामने आई कि प्रतिभागी को कार्डियक अरेस्ट आया था। फिलहाल उसकी हालत ठीक बताई जा रही है। केंद्र अध्यक्ष के.पी. मंडल ने बताया कि 112 के पहुंचने में देरी हो रही थी और प्रतिभागी की स्थिति को देखते हुए निजी वाहन से उसे तत्काल सिम्स भेजा गया।

नोडल अधिकारी भवानी शंकर साव ने भी घटना की जानकारी मिलने की पुष्टि की। उन्होंने माना कि परीक्षा केंद्रों पर मेडिकल टीम की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस घटना को ध्यान में रखते हुए आगे परीक्षा केंद्रों पर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

20 मिनट देर से बांटे गए प्रश्नपत्र का आरोप

इसी केंद्र पर पहली पाली में कुछ कमरों में प्रश्नपत्र निर्धारित समय से करीब 20 मिनट देर से बांटे जाने की शिकायत भी सामने आई है। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि परीक्षा सुबह 10 बजे शुरू होनी थी, लेकिन उसे प्रश्नपत्र 10.20 बजे दिया गया।

छात्रा ने केंद्र अध्यक्ष पी. मंडल के सामने शिकायत दर्ज कराई। केंद्र अध्यक्ष ने उसे मामले की शिकायत सीधे नोडल अधिकारी और व्यावसायिक परीक्षा मंडल के कार्यालय में करने की सलाह दी। केंद्र प्रबंधन का कहना है कि उसके अलावा किसी अन्य प्रतिभागी ने प्रश्नपत्र देर से मिलने की शिकायत नहीं की।

लेकिन बाद में यह भी जानकारी सामने आई कि प्रश्नपत्र में देरी और छात्रा के साथ कथित गलत हरकत की शिकायत लेकर करीब 15 से 20 छात्र जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनका दावा है कि कलेक्टर स्थित संबंधित कार्यालय बंद होने के कारण उनकी शिकायत दर्ज नहीं हो सकी। हालांकि, नोडल अधिकारी ने ऐसी किसी शिकायत की जानकारी होने से इनकार किया है।

बाहरी पर्यवेक्षक पर छात्रा का गंभीर आरोप

सबसे गंभीर मामला दूसरी पाली में सामने आया। परीक्षा देने वाली एक छात्रा ने एक पर्यवेक्षक पर उसके साथ गलत तरीके से स्पर्श करने का आरोप लगाया है। छात्रा का दावा है कि पर्यवेक्षक ने परीक्षा के दौरान उसके साथ मोलेस्टेशन किया। छात्रा के अनुसार जब वह बाथरूम की ओर गई तो उक्त पर्यवेक्षक उसके पीछे तक आया और परीक्षा समाप्त होने के ठीक पहले तक उसका पीछा करता रहा।

छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि उसने परीक्षा केंद्र में मौजूद शिक्षकों के सामने अपनी शिकायत रखी, लेकिन तत्काल कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। छात्रा का कहना है कि वह इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंचाना चाहती थी और इसी सिलसिले में अन्य छात्रों के साथ कलेक्टर कार्यालय भी गई, लेकिन कार्यालय बंद होने के कारण शिकायत नहीं हो सकी।

यह आरोप फिलहाल छात्रा के बयान पर आधारित है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। छात्रा ने कहा है कि वह मामले की शिकायत कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से करेगी।

अतिशेष शिक्षक, बाहर से पर्यवेक्षक क्यों?

इस पूरे घटनाक्रम में परीक्षा केंद्र पर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है। शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आत्मानंद स्कूल, सरकंडा में अतिशेष शिक्षकों की संख्या अधिक होने की जानकारी के बावजूद परीक्षा के लिए बाहरी स्कूलों से पर्यवेक्षक बुलाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

केंद्र से जुड़े लोगों के अनुसार बाहरी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी के कारण केंद्र अध्यक्ष और स्कूल प्रबंधन को उन्हें नियंत्रित करने तथा परीक्षा व्यवस्था के अनुरूप काम कराने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सवाल यह है कि जिस स्कूल में पर्याप्त संख्या में अतिशेष शिक्षक मौजूद हैं, वहां परीक्षा ड्यूटी के लिए बाहरी शिक्षकों की जरूरत क्यों पड़ी?

यह सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसी स्कूल में करीब एक वर्ष पहले इंजीनियरिंग परीक्षा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से नकल का मामला सामने आया था। उस प्रकरण के बाद परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था और मानकों में बदलाव किए गए थे। इसके बाद भी उसी केंद्र में बाहरी पर्यवेक्षकों की तैनाती और अब एक पर्यवेक्षक पर छात्रा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप ने व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पिछली घटना के बाद भी नहीं बदली व्यवस्था?

शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आत्मानंद स्कूल सरकंडा पहले भी परीक्षा संबंधी विवादों के कारण चर्चा में रहा है। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से नकल का मामला सामने आने के बाद परीक्षा केंद्रों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता बरती गई थी। ऐसे में अब उसी केंद्र में प्रश्नपत्र देर से मिलने की शिकायत, मेडिकल सहायता में देरी और बाहरी पर्यवेक्षक पर छात्रा के गंभीर आरोप सामने आना कई सवालों को जन्म देता है।

खास सवाल यह है कि जब संबंधित स्कूल में अतिशेष शिक्षकों की मौजूदगी है तो परीक्षा के लिए बाहरी शिक्षकों को पर्यवेक्षक बनाकर भेजने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से पहले उनके बारे में पर्याप्त जानकारी और पृष्ठभूमि की जांच की गई थी? और यदि किसी पर्यवेक्षक पर छात्रा ने परीक्षा के दौरान गलत व्यवहार का आरोप लगाया है तो केंद्र स्तर पर उसकी शिकायत को तत्काल गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया?

अधिकारियों ने कहा, शिकायत मिली तो होगी जांच

नोडल अधिकारी भवानी शंकर साव ने प्रतिभागियों और कथित छात्रा द्वारा लगाए गए आरोपों की जानकारी होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि यदि ऐसी कोई शिकायत सामने आती है तो मामले की जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।

जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडे ने भी कहा कि सरकंडा केंद्र में क्या घटनाक्रम हुआ, इसकी जानकारी केंद्र अध्यक्ष से ली जाएगी। प्रश्नपत्र देर से बांटे जाने के मामले में भी उन्होंने जानकारी लेने की बात कही। वहीं छात्रा के साथ यदि किसी तरह की गलत हरकत हुई है तो उसकी भी जांच की जाएगी।

फिलहाल प्रतिभागी को समय पर सिम्स पहुंचाए जाने के बाद उसकी हालत ठीक बताई जा रही है। लेकिन दूसरी ओर प्रश्नपत्र वितरण में कथित देरी, मेडिकल सुविधा की अनुपलब्धता और छात्रा के एक बाहरी पर्यवेक्षक पर लगाए गए गंभीर आरोपों ने परीक्षा की व्यवस्थाओं को सवालों के घेरे में ला दिया है। अब इन शिकायतों की जांच और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरकंडा केंद्र में परीक्षा व्यवस्था वास्तव में कितनी सुरक्षित और व्यवस्थित थी।