VSK App/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन, जिला सरगुजा ने वीएसके ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर वेतन आहरण एवं कम उपस्थिति पर वेतन कटौती संबंधी निर्देशों का कड़ा विरोध किया है। संगठन के जिला अध्यक्ष कमलेश सिंह ने कहा कि जब तक वीएसके ऐप की तकनीकी खामियों का पूर्ण निराकरण नहीं हो जाता, तब तक केवल ऐप के आधार पर किसी भी शिक्षक का वेतन काटना न तो न्यायसंगत है और न ही व्यवहारिक।

कमलेश सिंह ने कहा कि सरगुजा जिले सहित प्रदेश के अनेक विद्यालय आज भी मोबाइल नेटवर्क, जीपीएस, लोकेशन और सर्वर संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

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विशेष रूप से दूरस्थ, पहाड़ी और पहुंचविहीन क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों में समय पर विद्यालय पहुंचने के बावजूद कई शिक्षकों की उपस्थिति वीएसके ऐप में दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर वेतन कटौती करना शिक्षकों के साथ अन्याय होगा।

उन्होंने कहा कि बारिश के दिनों में सरगुजा के कई ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में लगातार कई दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। बिजली नहीं रहने से मोबाइल फोन चार्ज करना भी संभव नहीं हो पाता, जिससे ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में अतिरिक्त कठिनाई आती है।

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ऐसे हालात में शासन को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यवहारिक व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने मैनपाट के प्राथमिक शाला करमहा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आज भी शिक्षक किताबों को कंधे पर रखकर नदी पार करते हुए विद्यालय पहुंचते हैं। जब बुनियादी सुविधाएं और आवागमन की समुचित व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है, तब केवल ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू कर वेतन कटौती करना उचित नहीं कहा जा सकता।

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उन्होंने कहा कि पहले आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाए, उसके बाद वीएसके जैसे डिजिटल सिस्टम को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने भी कहा कि शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था के विरोधी नहीं हैं, लेकिन तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण ऐप के आधार पर आर्थिक दंड देना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि पहले वीएसके ऐप की सभी तकनीकी समस्याओं का समाधान किया जाए तथा पूरे प्रदेश में एक समान, विश्वसनीय और पारदर्शी बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की जाए।

जिला अध्यक्ष कमलेश सिंह सहित जिला पदाधिकारी काजेश घोष, रामबिहारी गुप्ता, लव गुप्ता, सुरित राजवाड़े, संजय चौबे, अरविंद सिंह, अमित सिंह, अनिल तिग्गा, प्रशांत चतुर्वेदी, रमेश यागिक एवं संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने शासन से मांग की कि विद्यालयों में संधारित उपस्थिति पंजी का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए तथा तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं होने की स्थिति में किसी भी शिक्षक का वेतन काटने अथवा रोकने की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से निरस्त की जाए।

संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि तकनीकी खामियों को दूर किए बिना वेतन कटौती जैसी कार्रवाई जारी रही तो शिक्षकों के हित में लोकतांत्रिक एवं संगठनात्मक स्तर पर प्रभावी आंदोलन किया जाएगा।