सिर्फ चालान से नहीं, जान से खेल रहे लोग: पुलिस का बड़ा अलर्ट
अलार्म बंद, जिंदगी बंद: सीट बेल्ट-हेलमेट में लापरवाही पर ट्रैफिक पुलिस की सख्त चेतावनी

बिलासपुर…सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते आंकड़ों और उनके विश्लेषण के बाद यातायात पुलिस बिलासपुर ने वाहन चालकों के लिए सख्त सुरक्षा संदेश जारी किया है। स्पष्ट किया गया है कि सीट बेल्ट और हेलमेट केवल नियम नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाले अनिवार्य सुरक्षा उपकरण हैं, जिनकी अनदेखी सीधे जान जोखिम में डाल रही है।
यातायात पुलिस ने विशेष रूप से चेताया है कि वाहन में दिए गए सेफ्टी फीचर्स से छेड़छाड़ गंभीर लापरवाही है। कई वाहन चालक सीट बेल्ट के अलार्म से बचने के लिए उसे पीछे मोड़कर लॉक कर देते हैं, जिससे दुर्घटना के समय एयरबैग सही तरीके से काम नहीं कर पाता। पुलिस ने इसे खतरनाक प्रवृत्ति बताते हुए तत्काल सुधार की जरूरत जताई है।
तकनीकी जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि सीट बेल्ट में प्री-टेंशनर और फोर्स लिमिटर जैसे सिस्टम होते हैं, जो टक्कर के समय शरीर को सुरक्षित स्थिति में रखते हैं और एयरबैग के साथ समन्वय बनाकर चोट की गंभीरता को कम करते हैं। इनका सही उपयोग न होने पर वाहन में लगे अन्य सुरक्षा उपकरण भी बेअसर हो जाते हैं।
चार पहिया वाहनों में पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए भी सीट बेल्ट अनिवार्य है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। यही स्थिति दोपहिया वाहन चालकों में हेलमेट को लेकर भी देखी जा रही है।
यातायात पुलिस ने साफ किया है कि हॉफ फेस हेलमेट सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। फुल फेस आईएसआई मार्क हेलमेट ही सिर और चेहरे की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करता है। दुर्घटनाओं की समीक्षा में यह भी सामने आया है कि हेलमेट न पहनना और तेज रफ्तार, दोनों मिलकर मौत का बड़ा कारण बन रहे हैं।
पुलिस ने यह भी रेखांकित किया कि सड़क दुर्घटनाएं केवल एक व्यक्ति की नहीं, पूरे परिवार की त्रासदी बन जाती हैं। अधिकांश मामलों में हादसे का शिकार परिवार का जिम्मेदार सदस्य होता है, जिसके बाद आर्थिक और मानसिक संकट खड़ा हो जाता है।
मोटरयान अधिनियम के तहत हेलमेट और सीट बेल्ट नहीं पहनने पर 500 तक का जुर्माना और दोबारा उल्लंघन पर दंड बढ़ाने का प्रावधान है। इसके बावजूद नियमों का पालन अक्सर सिर्फ पुलिस की मौजूदगी तक सीमित रह जाता है, जो चिंता का विषय है।
यातायात पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि “ट्रैफिक सेंस” विकसित करें और नियमों का पालन केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए करें। लगातार जागरूकता अभियान, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से लोगों में जिम्मेदार ड्राइविंग की आदत विकसित करने की कोशिश जारी है।





