कूड़े में फेंकी गई शिक्षा: चांदो स्कूल में गणवेशों का ढेर, जिम्मेदार तंत्र बेनकाब
बच्चों तक नहीं पहुंचा हक, कागजों में पूरी हुई योजना—टीएल बैठक की मॉनिटरिंग पर भी उठे सवाल

बलरामपुर…( पृथ्वी लाल केशरी) कुसमी विकासखंड के शासकीय कन्या प्राथमिक शाला चांदो परिसर में जो तस्वीर सामने आई है, वह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की विफलता को उजागर करती है। यहां सत्र 2024-25 के लिए आए स्कूल गणवेश कचरे के ढेर में फेंके मिले—कुछ खुले, कुछ अब भी बंडल में बंद। जिन बच्चों के लिए ये गणवेश खरीदे गए, वे अब भी इंतजार में हैं, और उनका हक कूड़े में सड़ रहा है।
योजनाएं कागज पर, हकीकत कचरे में
राज्य सरकार शिक्षा के नाम पर योजनाएं चला रही है, प्रवेश उत्सव पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, मंचों से बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर इसके उलट है। चांदो स्कूल का मामला साफ संकेत देता है कि योजनाएं कागजों में पूरी हो जाती हैं, लेकिन लाभार्थियों तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं।
जिम्मेदारी से बचते अधिकारी, वही पुराना जवाब
जब इस गंभीर लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किया गया, तो जवाब भी वही पुराना—“मामले की जानकारी नहीं थी, जांच के बाद कार्रवाई होगी।” यह जवाब खुद सिस्टम की कार्यशैली को उजागर करता है, जहां निगरानी तंत्र सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है।
टीएल बैठक पर सवाल: सिर्फ दिखावा?
हर सप्ताह होने वाली टीएल बैठक में योजनाओं की समीक्षा होती है, विभागीय प्रमुख प्रगति रिपोर्ट पेश करते हैं। ऐसे में सवाल सीधा है—क्या इस मामले की जानकारी कभी दी गई? अगर नहीं, तो यह मॉनिटरिंग की विफलता है। अगर दी गई, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? दोनों ही स्थिति में जिम्मेदारी तय होना तय है।
कार्रवाई की मांग: सिर्फ जांच नहीं
यह मामला सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से बच्चों का अधिकार कूड़े में पहुंचा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। निलंबन और विभागीय जांच के साथ जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
नजर अब प्रशासन पर
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं—क्या यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में जाएगा, या फिर इस बार जिम्मेदारी तय होगी? जवाब कार्रवाई में दिखेगा, बयान में नहीं।





