Lalita Ghat Aarti: काशी विश्वनाथ मंदिर के ललिता घाट पर भी हो रही गंगा आरती, शामिल हो सकेंगे श्रद्धालु
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद ललिता घाट का महत्व तेजी से बढ़ा है। मंदिर से सीधे गंगा तट तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि को देखते हुए यहां आरती को विशेष रूप से भव्य स्वरूप दिया गया है। अब यह आयोजन दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट की तर्ज पर दिव्यता का अनुभव कराएगा।

Lalita Ghat Aarti/वाराणसी।वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दैनिक पूजन के साथ अब एक नई परंपरा जुड़ गई है। चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन 19 मार्च से मंदिर के गंगा द्वार ललिता घाट पर अब हर दिन शाम के समय भव्य गंगा आरती का आयोजन शुरू किया गया है। यह आयोजन मंदिर प्रशासन द्वारा विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ कराया जा रहा है, जिसमें सात आचार्य शामिल होते हैं।

Lalita Ghat Aarti/मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं को एक और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है, ताकि वे बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ मां गंगा की आरती का लाभ भी एक ही जगह पर ले सकें। इससे पहले प्रशासन की ओर से नमो घाट सहित शहर के अन्य घाटों पर भी गंगा आरती आयोजित की जाती रही है।

बता दे कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद ललिता घाट का महत्व तेजी से बढ़ा है। मंदिर से सीधे गंगा तट तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि को देखते हुए यहां आरती को विशेष रूप से भव्य स्वरूप दिया गया है। अब यह आयोजन दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट की तर्ज पर दिव्यता का अनुभव कराएगा।

Lalita Ghat Aarti/आरती के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। वीआईपी श्रद्धालुओं के लिए अलग से समर्पित क्षेत्र बनाया गया है, जहां सोफा और कुर्सियों की व्यवस्था है, ताकि वे बिना किसी बाधा के आरती देख सकें।

मंदिर प्रशासन के अनुसार गंगा आरती का आयोजन रोज करीब साढ़े छः बजे किया जाएगा। श्रद्धालु और पर्यटक घाट पर पहुंचकर इस दिव्य आरती का दर्शन कर सकेंगे। प्रशासन ने बताया कि आरती के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की जाएंगी, ताकि सभी लोग शांतिपूर्वक इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हो सकें।

साथ ही सामान्य श्रद्धालुओं के लिए घाट की सीढ़ियों को भी व्यवस्थित किया गया है। सुरक्षा, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
मंदिर प्रशासन का मानना है कि इससे उन लोगों को भी आरती देखने का अवसर मिलेगा, जो भीड़ के कारण पहले हिचकते थे। इसके अलावा, गंगा में नौकाओं के जरिए आरती देखने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी, जिसके लिए विशेष बोट प्वाइंट बनाए गए हैं।

बता दे कि काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित सबसे प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक है। यह वाराणसी, उत्तर प्रदेश में स्थित है। यह मंदिर पवित्र नदी गंगा के पश्चिमी तट पर स्थित है, और बारह ज्योतिर्लिंगस में से एक है।मुख्य देवता विश्वनाथ या विश्वेश्वर नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ है ब्रह्मांड के शासक है। वाराणसी शहर को काशी भी कहा जाता है। इसलिए मंदिर को काशी विश्वनाथ मंदिर कहा जाता है।




