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जग्गी हत्याकांडः अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सजा पर रोक

नई दिल्ली। राम अवतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। उनकी आजीवन कारावास की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है । इस मामले में हाई कोर्ट ने अमित जोगी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और सरेंडर करने कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाई है।

मीडिया की खबरों के मुताबिक अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं लगाई थी। पहली याचिका सीबीआई से संबंधित अपील दायर करने के मामले में थी। दूसरी याचिका में उन्होंने हाई कोर्ट के मुख्य फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट के इस फैसले में अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को इस मामले की सुनवाईन जस्टिस विक्रम नाथ ,जस्टिस मेहता और विजय बिश्नोई की बेंच में  हुई। खबरों के मुताबिक कोर्ट ने आदेश में कहा है कि विवादित फैसले के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के एक अन्य आदेश पर भी रोक लगाई है। जिसमें सीबीआई को अपील करने की अनुमति दी गई थी और अमित जोगी को 31 मार्च से पहले जमानत बांड और जमानत पेश करने का निर्देश दिया गया था।

इस मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस मेहता ने अमित जोगी की सुनवाई किए बिना उच्च न्यायालय द्वारा फैसला सुनाए जाने पर सवाल उठाया। अमित जोगी की ओर से मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी पेश हुए । वहीं सतीश जग्गी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और गोपाल शंकर नारायणन उपस्थित हुए।

गौर तलब है कि 4 जून 2003 को राम अवतार जग्गी को गोली मार दी गई थी। 2007 में निचली अदालत ने अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया और अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। इस फैसले के खिलाफ सीबीआई ने हाई कोर्ट में याचिका पेश की थी। इसी तरह सतीश जग्गी ने भी एक अन्य याचिका में बरी करने के आदेश को चुनौती दी थी। 2011 में बिलासपुर हाईकोर्ट में सीबीआई की अपील को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया था। 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस राय से असहमति जताते हुए हाई कोर्ट को सीबीआई की अपील पर गुण दोष के आधार पर निर्णय देने का निर्देश दिया था । इसके बाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए अमित जोगी को षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार, प्रमुख योजनाकार और प्रेरक शक्ति मानते हुए उन्हें सजा सुनाई थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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