मतदाता सूची में ‘कट’ का खेल?: 200 से ज्यादा नाम हटे, कांग्रेस ने कलेक्टर से मांगी तत्काल बहाली
कांग्रेस नेताओं ने की कलेक्टर से शिकायत बताया बीएलओ ने की लापरवाही

बिलासपुर नगर निगम वार्ड क्रमांक 29 संजय नगर उप चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कांग्रेस नेताओं ने वार्ड में 200 से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का आरोप का आरोप लगाया है। इस बात को लेकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के सामने सख्त आपत्ति दर्ज कराई है।
कलेक्टर कार्यालय में सीधी शिकायत
जिला कांग्रेस अध्यक्ष शहर सिद्धांशु मिश्रा की अगुवाई में नेताओं का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर संजय अग्रवाल से मिला। आरोप रखा गया कि नगर निगम नामावली 2026 के भाग संख्या 6 और 8 की प्रारंभिक सूची में करीब 201 मतदाताओं के नाम “त्रुटि” बताकर हटा दिए गए। इसे सीधे तौर पर मताधिकार पर चोट और संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया गया।
गलत वार्ड मानकर हटाए गए नाम?
मिश्रा ने स्पष्ट किया कि संबंधित मतदाता लंबे समय से वार्ड 29 में निवास कर रहे हैं और नियमित मतदान करते आए हैं। आशंका जताई गई कि बीएलओ स्तर पर गड़बड़ी हुई है और मतदाताओं को वार्ड 28 का मानकर उनके नाम हटा दिए गए। 22 अप्रैल को पटवारी हल्का और संबंधित अधिकारियों की टीम ने घर-घर जाकर सत्यापन भी किया, लेकिन इसके बावजूद सूची से नाम विलोपित कर दिए गए।
पहले भी दर्ज हो चुकी आपत्ति, नहीं हुआ सुधार
17 अप्रैल को ही कांग्रेस ने संबंधित विभाग में दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर दी थी। साथ ही 2025 की नगरीय निकाय चुनाव की नामावली और मतदाताओं के क्रमांक को प्रमाण के तौर पर सौंपा गया। इसके आधार पर दावा किया गया कि जिन लोगों के नाम काटे गए हैं, वे वैध और पुराने मतदाता हैं।
चुनाव से पहले नाम जोड़ने की मांग, जांच की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट मांग रखी कि मई में संभावित पार्षद चुनाव से पहले सभी हटाए गए मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े जाएं। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग भी की गई।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी से बढ़ा दबाव
कलेक्टर से मुलाकात के दौरान नगर निगम नेता प्रतिपक्ष भारत कश्यप, सिबली मिराज समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने मतदाता सूची और आपत्ति पत्र सौंपकर तत्काल सुधार की अपील की।
मामला सिर्फ सूची का नहीं, भरोसे का भी
यह विवाद केवल नाम काटे जाने तक सीमित नहीं दिख रहा। चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप ने प्रशासनिक पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। निगाह इस पर है कि प्रशासन कितनी तेजी से सुधार करता है और मतदाताओं का भरोसा बहाल कर पाता है।





