महिला आरक्षण या परिसीमन? सवालों में घिरे कौशिक, जवाब गोल—प्रेस वार्ता में नहीं सुलझी गुत्थी
विधेयक पर BJP का बचाव, विपक्ष पर हमलावर तेवर; लेकिन पत्रकारों के सीधे सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं

बिलासपुर … भारतीय जनता पार्टी कार्यालय बिलासपुर में महिला आरक्षण संशोधन को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल को महिलाओं के लिए ऐतिहासिक बताया, लेकिन जैसे ही सवाल विधेयक की असली प्रकृति—महिला आरक्षण या परिसीमन—पर आया, तस्वीर धुंधली नजर आई। प्रेस वार्ता में दावे बड़े रहे, लेकिन सीधे सवालों पर जवाब ठोस नहीं दिखे।
महिलाओं की भागीदारी का दावा
कौशिक ने कहा कि देश की आधी आबादी महिलाओं की है और उन्हें नीति निर्धारण में भागीदारी दिलाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया। उनका कहना रहा कि इस कानून से लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित होगा, जिससे महिलाओं का प्रतिनिधित्व और नेतृत्व दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने छत्तीसगढ़ में पंचायत और नगरीय निकायों में 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक आरक्षण के उदाहरण भी गिनाए और इसे सफल मॉडल बताया।
विपक्ष पर तीखा हमला, पुराने मामलों का जिक्र
प्रेस वार्ता में कांग्रेस और विपक्षी दलों पर सीधा हमला किया गया। कौशिक ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर दुष्प्रचार किया और महिलाओं के अधिकारों को रोकने का काम किया। शाहबानो प्रकरण और तीन तलाक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष का इतिहास महिलाओं के मुद्दों पर विरोध का रहा है और इस बार भी वही रुख सामने आया।
मुख्य सवाल: महिला या परिशीमन बिल
पत्रकारों ने जब यह सीधा सवाल उठाया कि 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक और हालिया सत्र में लाए गए बिल में क्या अंतर है, और गृह मंत्री के परिसीमन वाले बयान के बाद वास्तविक स्थिति क्या है—तो कौशिक स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
उन्होंने बार-बार एक ही लाइन दोहराई—इससे महिलाओं को अधिकार मिलेगा, सीटें बढ़ेंगी, लोकतंत्र मजबूत होगा।
लेकिन यह नहीं बताया कि सदन में लाया गया बिल वास्तव में महिला आरक्षण था या परिसीमन से जुड़ा विधेयक, जिससे सवाल और गहराता गया।
298 बनाम 278: आंकड़ों पर फंसा सवाल
प्रेस वार्ता में सबसे तीखा मोड़ तब आया जब वोटिंग के आंकड़े सामने रखे गए। पत्रकारों ने पूछा—जब एनडीए के पास सदन में 298 सदस्य हैं, तो बिल के पक्ष में सिर्फ 278 वोट ही क्यों पड़े? आखिर 20 वोट कहां गए? क्या अपने ही सदस्यों ने साथ नहीं दिया?
इस सवाल पर कौशिक असहज नजर आए और गोलमोल जवाब देते हुए कहा—“सभी सहयोगी दलों का पूरा समर्थन मिला है, विपक्ष ने साथ नहीं दिया।”
हालांकि 298 में से 278 पर ही वोट रुक जाने की वजह पर कोई सीधा जवाब नहीं मिला, और यह सवाल पूरी प्रेस वार्ता में बना रहा।
मेयर का पक्ष: ‘महिलाओं के सम्मान की पहल
महापौर पूजा विधानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव रखा ताकि उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सम्मान मिल सके। उन्होंने कहा कि यह महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन विपक्ष ने इसका समर्थन नहीं किया।
योजनाओं का जिक्र, राजनीतिक संदेश
प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र सरकार की योजनाओं—शौचालय निर्माण, उज्ज्वला, आवास और बैंकिंग सुविधाओं—का भी जिक्र हुआ। इन्हें महिलाओं के सशक्तिकरण से जोड़ते हुए बताया गया कि इन पहलों से सामाजिक स्थिति में बदलाव आया है।
दावे मजबूत, लेकिन सवाल कायम
पूरी प्रेस वार्ता में महिला सशक्तिकरण और अधिकारों की बात जोरदार तरीके से रखी गई, लेकिन विधेयक की वास्तविक प्रकृति और वोटिंग के आंकड़ों पर उठे सवाल अनुत्तरित ही रहे। महिला आरक्षण और परिसीमन के बीच की रेखा साफ नहीं हो सकी—और यही इस पूरी बहस का सबसे बड़ा और अनसुलझा सवाल बनकर सामने आया।





