रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी)…पुलिस थाना मार्ग पर बालक प्राथमिक शाला और किशोर न्याय बोर्ड के सामने करीब 46 साल से लोगों की प्यास बुझा रहा सार्वजनिक हैंडपंप इन दिनों निर्माण कार्य के चलते बंद है। आरोप है कि हाईस्कूल मैदान के मरम्मत कार्य में लगे ठेकेदार ने इसी सार्वजनिक जलस्रोत का इस्तेमाल निर्माण के लिए शुरू कर दिया है। इससे स्कूली बच्चों, छात्राओं और राहगीरों की परेशानी बढ़ गई है।

वर्ष 1980 से स्थापित यह हैंडपंप आसपास के लोगों के लिए लंबे समय से सार्वजनिक पेयजल का साधन रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसका उपयोग आम लोगों के लिए बंद हो गया। आरोप है कि हैंडपंप से निर्माण स्थल तक पानी पहुंचाया जा रहा है।

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 पानी चाहिए तो जनता का हैंडपंप क्यों?

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के लिए पानी की आवश्यकता है तो अलग से बोरिंग या अन्य व्यवस्था की जा सकती थी। सवाल यह है कि जिस जलस्रोत का इस्तेमाल स्कूली बच्चों और राहगीरों के लिए होता रहा, उसे निर्माण कार्य के लिए क्यों रोक दिया गया।

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खासकर स्कूल आने-जाने वाले बच्चों के लिए यह स्थिति परेशानी वाली है। आसपास कन्या शाला और बालक प्राथमिक शाला होने के कारण दिनभर इस सार्वजनिक हैंडपंप का इस्तेमाल होता रहा है।

नगर पालिका को जानकारी थी या नहीं?

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मामले में नगर पालिका परिषद की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सार्वजनिक हैंडपंप बंद होने और उसके पानी का निर्माण कार्य में इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में यह जानना जरूरी है कि इसकी अनुमति किसने दी।

यदि नगर पालिका को इसकी जानकारी थी तो सार्वजनिक जलस्रोत के इस्तेमाल की अनुमति किन शर्तों पर दी गई? और यदि अनुमति नहीं दी गई थी तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

स्थानीय स्तर पर ठेकेदार को प्रभावशाली संरक्षण मिलने की चर्चाएं भी हैं। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नगर पालिका परिषद और संबंधित ठेकेदार का आधिकारिक पक्ष भी सामने नहीं आया है।

जांच में साफ हो सकता है पूरा मामला

अब मामले की जांच से ही स्थिति स्पष्ट होगी कि हैंडपंप तकनीकी कारण से बंद है या निर्माण कार्य के लिए उसका इस्तेमाल हो रहा है। यह भी सामने आना जरूरी है कि सार्वजनिक जलस्रोत के इस्तेमाल के लिए कोई अनुमति ली गई है या नहीं।

स्थानीय लोगों ने हैंडपंप को तत्काल आम लोगों के लिए बहाल करने और पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य चलता रहे, लेकिन इसके लिए वर्षों से जनता के इस्तेमाल में रहे पेयजल स्रोत को बंद करना उचित नहीं है।

मामला अब नगर पालिका के साथ जिला प्रशासन की निगरानी पर भी है। 46 साल पुराने सार्वजनिक हैंडपंप के बंद होने की वजह और उसके पानी के इस्तेमाल की अनुमति—इन दो सवालों का जवाब ही पूरे विवाद की असली तस्वीर सामने ला सकता है।