hathras police : हाथरस किडनैपिंग केस से खुला ऑन-डिमांड बच्चा चोरी गैंग का राज, 7 राज्यों तक फैला नेटवर्क

hathras police : उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक मासूम बच्चे के अपहरण की घटना ने एक बड़े और चौंकाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया है। इस केस की गहराई से जांच करते हुए पुलिस ने एक अंतरराज्यीय ‘ऑन-डिमांड’ बच्चा चोरी गैंग का पर्दाफाश किया है, जो सुनियोजित तरीके से बच्चों की तस्करी करता था और सुंदरता व डिमांड के आधार पर उन्हें लाखों रुपये में बेचता था।
hathras police : हाथरस के जागेश्वर कॉलोनी में रहने वाले प्रिंस गोस्वामी के तीन वर्षीय बेटे कविश के अचानक लापता होने के बाद यह मामला चर्चा में आया। 9 मई की शाम को कविश घर के बाहर खेल रहा था और तभी उसका अपहरण हो गया। शुरुआत में इसे सामान्य गुमशुदगी माना गया, लेकिन जब बच्चा नहीं मिला तो पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से सघन जांच शुरू की। 500 से ज्यादा कैमरे खंगालने के बाद मोनू पाठक नामक व्यक्ति बच्चा ले जाता दिखा, जो अपनी पत्नी नेहा शर्मा के साथ आगरा होते हुए आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा भाग गया।
हाथरस पुलिस ने करीब 1760 किलोमीटर का सफर तय कर विजयवाड़ा में 100 से ज्यादा होटलों की तलाशी ली और आखिरकार एक होटल में दोनों को ट्रैक कर गिरफ्तार कर लिया। बच्चे को भी सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। इस मामले ने उस गैंग की परतें खोल दीं, जो सात राज्यों में सक्रिय था और बच्चों की डिमांड के हिसाब से सौदे करता था।
पुलिस जांच में सामने आया कि इस गैंग में आंध्र प्रदेश के मल्लिकार्जुन, मैदी पाटला और सुब्बा लक्ष्मी जैसे आरोपी भी शामिल हैं। यही नहीं, कई हॉस्पिटल स्टाफ—जैसे वार्ड बॉय और नर्सें—भी इस गिरोह से जुड़ी थीं। ये लोग ग्राहकों की जानकारी और बच्चों की डिमांड गैंग तक पहुंचाते थे।
हाथरस से अगवा कविश का सौदा 1.80 लाख रुपये में तय हुआ था। गैंग बच्चों की कीमत उनकी सुंदरता और ग्राहक की आर्थिक हैसियत के आधार पर तय करता था। नवजात शिशुओं के सौदे 5 लाख रुपये तक पहुंचते थे।
पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि गिरफ्तार दक्षिण भारतीय आरोपियों से पूछताछ के लिए तेलुगु ट्रांसलेटर की व्यवस्था की जा रही है। आगे रिमांड पर लेकर गैंग के पूरे नेटवर्क, फिक्सिंग प्राइस प्रक्रिया और अन्य सदस्यों की जानकारी इकट्ठा की जाएगी।





