सूरजपुर (मनीष जायसवाल ) किसी भी आपराधिक मामले में FIR दर्ज होना जांच की शुरुआत होती है। घटना की सच्चाई सामने लाने और आरोपी की भूमिका को सबूतों के जरिए सामने लाने में पुलिस की जांच की अहम भूमिका होती है..। सूरजपुर जिले के हत्या के एक मामले में पुलिस की जांच और जुटाए गए सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले की अच्छी जांच के लिए जिला पुलिस अधीक्षक ने जांच अधिकारी को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया है।

मिली जानकारी के मुताबिक मामला नवंबर 2024 का है। पुलिस के अनुसार 14 नवंबर की रात मृतक खेम साय घर नहीं आया था। अगले दिन 15 नवंबर को दोपहर करीब डेढ़ बजे वह शराब के नशे में घर पहुंचा। उस समय उसकी पत्नी सुशीला पैकरा खाना खा रही थी। खेम साय ने उसके साथ गाली-गलौज की और अपने पुत्र भुवन पैकरा को बुलाने के लिए कहा। इसके बाद सुशीला घर के बाहर नीम के पेड़ के पास चली गई। वहां उसका पति भी पहुंच गया और दोनों के बीच विवाद होने लगा। और विवाद बढ़ता देख सुशीला वहां से घर की ओर चली गई। इसी दौरान करीब 2 बजे भुवन पैकरा वहां पहुंचा। पुलिस के मुताबिक पिता से विवाद के बाद उसने टांगा से खेम साय पर हमला कर दिया। हमले में खेम साय वहीं गिर गया और उसकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलने पर मनराखन पैकरा की रिपोर्ट पर मर्ग कायम किया गया। इसके बाद चौकी चेन्द्रा, थाना झिलमिली में अपराध क्रमांक 129/24 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) में मामला दर्ज किया गया।

मामले की जांच चौकी चेन्द्रा के तत्कालीन एएसआई लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता ने की। पुलिस ने 16 नवंबर 2024 को आरोपी भुवन पैकरा को गिरफ्तार किया और हत्या में इस्तेमाल टांगा भी बरामद कर लिया। जांच के दौरान पुलिस ने जरूरी सबूत जुटाए और उनके आधार पर अदालत में आरोप पत्र पेश किया गया।

मामले की सुनवाई सूरजपुर के सत्र न्यायालय में हुई। अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक राजू दास ने पैरवी की। सत्र न्यायाधीश थॉमस एक्का ने 11 अगस्त 2026 को मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने मामले की परिस्थितियों और सामने आए सबूतों के आधार पर आरोपी भुवन पैकरा, पिता खेम साय पैकरा, उम्र 19 वर्ष, निवासी ग्राम रैसरी, चौकी चेन्द्रा को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का दोषी माना। अदालत ने उसे आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

मामले में पुलिस की जांच इसलिए भी अहम रही कि घटना के अगले ही दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया गया। इसके बाद पुलिस ने घटना से जुड़े सबूत और परिस्थितियों को जोड़ते हुए अदालत में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के दौरान इन्हीं सबूतों के आधार पर मामला सजा तक पहुंचा।

अच्छी जांच और मजबूत सबूत जुटाने के लिए पुलिस अधीक्षक सूरजपुर योगेश कुमार पटेल (भापुसे) ने तत्कालीन एएसआई और वर्तमान एसआई लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

विवेचक को मिले इस पुरस्कार की तह तक जाएं तो यह बात सामने आती है कि पुलिस की जिम्मेदारी किसी आरोपी को गिरफ्तार करने के साथ खत्म नहीं होती..। असली चुनौती घटना की पूरी कड़ी समझने, जरूरी सबूत जुटाने और उन्हें अदालत के सामने सही तरीके से रखने की होती है। इस मामले में पुलिस की अच्छी जांच इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी। ऐसी जांच पीड़ित को न्याय दिलाने में मदद करने के साथ समाज में यह भरोसा भी मजबूत करती है कि अपराध के बाद कानून अपना रास्ता तय करता है।