Cg news।बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला शिक्षा विभाग (DEO Office) में बहुचर्चित युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति फर्जीवाड़े को लेकर नए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) संदीप पाण्डेय ने सख्त प्रशासनिक रुख अपनाया है.

महीनों से विभागीय फाइलों में दबे इस बड़े मामले में नए डीईओ ने अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए गड़बड़ी के मुख्य कर्ताधर्ता माने जा रहे न्यायालयीन शाखा के क्लर्क (लिपिक) सुनील यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

डीईओ संदीप पाण्डेय के इस साहसिक और कड़े कदम से शिक्षा विभाग के भ्रष्ट सिंडिकेट और महकमे में हड़कंप मच गया है.

उल्लेखनीय है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के खुलासे के लिए त्रि-सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था. जांच टीम द्वारा तैयार की गई पुख्ता व विस्तृत रिपोर्ट को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से विधिवत दंडात्मक कार्रवाई हेतु संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को प्रेषित किया गया था:

जांच रिपोर्ट जमा हुए एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद संचालनालय स्तर से दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही थी.

उच्च कार्यालय से कार्रवाई में हो रहे विलंब को देखते हुए नए जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को ठंडे बस्ते में जाने देने के बजाय खुद मोर्चा संभाला. चूंकि तृतीय श्रेणी कर्मचारी (क्लर्क) डीईओ के अनुशासनात्मक अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए उन्होंने बिना वक्त गंवाए निलंबन आदेश जारी कर दिया.

जांच रिपोर्ट में स्पष्ट उजागर हुआ था कि पदोन्नति और युक्तियुक्तकरण के नियमों की धज्जियां उड़ाने में न्यायालयीन शाखा की मुख्य भूमिका रही है।

सक्षम समिति और कलेक्टर द्वारा खारिज किए गए युक्तियुक्तकरण के प्रकरणों में सांठगांठ कर बैकडोर से मनमाने आदेश तैयार कराए गए.

पदोन्नति की तय शर्तों के तहत समयसीमा में कार्यभार ग्रहण न करने पर जो पदस्थापना स्वतः निरस्त हो चुकी थी, उन्हें महीनों बाद संशोधित कर चहेतों को लाभ पहुंचाया गया.

पुरानी व निष्प्रभावी प्रतीक्षा सूची से नियमों को ताक पर रखकर बिना डीपीसी (DPC) व काउंसलिंग के सीधे कनिष्ठों को उपकृत करने की फाइलें तैयार की गईं.

अवैध आदेशों को सही ठहराने के लिए विभागीय नस्ती (Files) में बिलासपुर हाई कोर्ट के ऐसे कथित निर्देशों का हवाला जोड़ा गया, जो न्यायालय द्वारा कभी जारी ही नहीं किए गए थे.