बिलासपुर। लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों के वेतन और नियुक्ति संबंधी विवाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक आदेश से राहत की स्थिति बनी है। श्रवण कुमार सिंह बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले में अदालत ने 13 मई 2019 के वसूली आदेश को निरस्त करते हुए 8 सितंबर 2017 से नियमित वेतनमान बहाल करने का निर्देश दिया है। आदेश में तीन महीने के भीतर ग्रेड-2 में पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करने का भी निर्देश दिया गया है।

मामला 2013 के बाद नियुक्त लिपिकों से जुड़ा है, जिनकी नियुक्ति और नियमित वेतनमान के लिए कम्प्यूटर योग्यता से संबंधित शर्तों को लेकर विवाद सामने आया था। कर्मचारियों की ओर से यह तर्क रखा गया था कि सहायक ग्रेड-3 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए हिन्दी मुद्रलेखन और कम्प्यूटर डिप्लोमा की शर्त को विकल्प के रूप में पढ़ा जाना चाहिए, न कि दोनों को अनिवार्य योग्यता माना जाए।

मामले में लिपिक कर्मचारी संघ की ओर से स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नवंबर 2024 में दिए गए ज्ञापन को भी महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया था। संघ का कहना है कि उसके ज्ञापन में सामान्य प्रशासन विभाग के 17 फरवरी 2004 के परिपत्र और 2013 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कम्प्यूटर योग्यता रखने वाले कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से नियमित वेतनमान दिए जाने की मांग की गई थी।

‘/’ को लेकर अदालत की अहम व्याख्या

संघ के मुताबिक हाईकोर्ट ने आदेश के पैरा 6 और 7 में नियुक्ति आदेश में इस्तेमाल किए गए ‘/’ चिह्न को ‘या’ के अर्थ में माना है, ‘एवं’ के अर्थ में नहीं। याचिकाकर्ता के पास नियुक्ति से पहले ही कम्प्यूटर डिप्लोमा होने के आधार पर नियमित वेतनमान को वैध माना गया।

इसी आधार पर 13 मई 2019 को जारी वसूली आदेश को निरस्त कर 8 सितंबर 2017 से नियमित वेतनमान बहाल करने का निर्देश दिया गया। बिना नोटिस वेतन से की गई वसूली के मामले में भी कर्मचारी को राहत मिली है।

रोहित तिवारी बोले— आदेश का लाभ दिलाएंगे

लिपिक कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने कहा कि हाईकोर्ट का यह आदेश उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके वेतन से कम्प्यूटर योग्यता अथवा परीक्षा के आधार पर वसूली की गई है या पदोन्नति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि संघ आदेश की प्रति सभी संबंधित विभागाध्यक्षों के समक्ष रखकर समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को इसका लाभ दिलाने की मांग करेगा।

उन्होंने कहा कि संघ की ओर से स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को दिया गया ज्ञापन भी मामले में महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में सामने आया है। उनके अनुसार संघ का प्रयास केवल मांग पत्र देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मामलों में उपलब्ध कानूनी रास्तों पर भी आगे कार्रवाई की जाएगी।