CG Bilaspur High Court News:बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के कोरिया नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष अनिल कुमार प्रजापति के ओबीसी जाति प्रमाणपत्र को जिला स्तरीय जाति छानबीन समिति द्वारा रद्द किए जाने के मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने उन्हें वैधानिक अपील का अवसर दिया है।

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर उच्च स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति के समक्ष अपील प्रस्तुत करें। साथ ही निर्धारित अवधि में अपील के साथ अंतरिम राहत के लिए आवेदन देने पर वर्ष 2021 में हाई कोर्ट से मिला अंतरिम संरक्षण एक माह तक जारी रखने का आदेश दिया गया है।

मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। अनिल कुमार प्रजापति को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, मनेंद्रगढ़ ने 13 नवंबर 2019 को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का जाति प्रमाणपत्र जारी किया था। बाद में मनेंद्रगढ़ निवासी प्रकाश त्रिपाठी ने उनके जाति प्रमाणपत्र और सामाजिक स्थिति को लेकर आपत्ति दर्ज कराई।

शिकायत के आधार पर जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति ने 18 जून 2021 को अनिल प्रजापति को नोटिस जारी कर संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए कहा था।

नोटिस के बाद अनिल प्रजापति समिति के समक्ष उपस्थित हुए और अपने ओबीसी दर्जे के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत किए। समिति ने दस्तावेजों पर विचार करने के बाद 27 अगस्त 2021 को आदेश जारी कर उनका जाति प्रमाणपत्र रद्द कर दिया। समिति के अनुसार, वे छत्तीसगढ़ में ओबीसी वर्ग के लाभ के लिए आवश्यक पात्रता साबित नहीं कर पाए थे। इस आदेश को चुनौती देते हुए अनिल प्रजापति ने अधिवक्ता रोहित शर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जिला स्तरीय समिति के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता के पास वैधानिक वैकल्पिक उपाय उपलब्ध है।

वे उच्च स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति के समक्ष अपील कर सकते हैं। राज्य की ओर से इसी आधार पर हाई कोर्ट में सीधे दायर याचिका की सुनवाई पर आपत्ति जताई गई।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रोहित शर्मा और अभिषेक के. सिंह ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता विवेक वर्मा और प्रकाश त्रिपाठी की ओर से अधिवक्ता शिखर शर्मा उपस्थित हुए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने उच्च स्तरीय समिति के समक्ष वैधानिक उपाय अपनाने पर सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने वर्ष 2021 में हाई कोर्ट से मिले अंतरिम संरक्षण का भी उल्लेख किया।

हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड पर पाया कि 27 सितंबर 2021 को समन्वय पीठ ने 27 अगस्त 2021 के जिला स्तरीय समिति के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाई थी। उस समय यह भी विचाराधीन था कि याचिकाकर्ता को उचित सुनवाई का अवसर मिला था या नहीं और छत्तीसगढ़ सामाजिक प्रास्थिति प्रमाणपत्र अधिनियम, 2013 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।

अब हाई कोर्ट ने अनिल प्रजापति को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर उच्च स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति के समक्ष अपील दाखिल करने का निर्देश दिया है। वे अपील के साथ अंतरिम राहत या रोक के लिए आवेदन भी प्रस्तुत कर सकते हैं।

कोर्ट के आदेश के अनुसार, यदि निर्धारित 15 दिन की अवधि में अपील और अंतरिम राहत का आवेदन दाखिल कर दिया जाता है, तो 27 सितंबर 2021 को हाई कोर्ट की समन्वय पीठ द्वारा दिया गया अंतरिम संरक्षण अपील दायर करने की तारीख से एक माह तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान उच्च स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति अंतरिम राहत के आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय ले सकेगी।