CG Highcourt Decision-हाईकोर्ट का फैसला: शादीशुदा महिला की रजामंदी से बने शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं, आरोपी की दोषमुक्ति बरकरार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में यौन अपराधों से जुड़े कानून की व्याख्या को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि कोई महिला बालिग है, शादीशुदा है और उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाए गए हैं, तो ऐसे मामले को दुष्कर्म (रेप) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने एक आरोपी युवक को राहत देते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया है।

CG Highcourt Decision- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े कानूनों की व्याख्या करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई महिला बालिग है, विवाहित है और उसकी अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाए गए हैं, तो ऐसे मामले को दुष्कर्म (रेप) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कहा कि केवल आरोप के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब सहमति स्पष्ट रूप से मौजूद हो। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने एक आरोपी युवक को राहत देते हुए निचली अदालत के उसे बरी करने के फैसले को सही ठहराया है।
CG Highcourt Decision/यह पूरा मामला वर्ष 2022 का है और बेमेतरा जिले से संबंधित है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक शादीशुदा महिला और आरोपी युवक के बीच आपसी परिचय था और समय के साथ उनके बीच घनिष्ठता बढ़ गई, जिसके परिणामस्वरूप दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए। बाद में महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि युवक ने उसे शादी का झांसा दिया और उसके साथ छल किया। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और बाद में कोर्ट में चालान पेश किया गया।
इस मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने सभी गवाहों के बयानों, मेडिकल रिपोर्ट और पेश किए गए साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन किया था। जांच और सुनवाई के दौरान यह साबित नहीं हो सका कि आरोपी ने महिला के साथ किसी भी प्रकार की जबरदस्ती की थी या उसे डरा-धमकाकर संबंध बनाए थे।
ट्रायल कोर्ट ने पाया कि महिला अपनी मर्जी से इस रिश्ते में थी और इसी आधार पर आरोपी युवक को दोषमुक्त कर दिया गया था। हालांकि, ट्रायल कोर्ट के इस फैसले से असंतुष्ट होकर महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आरोपी को बरी किए जाने के खिलाफ अपील की अनुमति मांगी।
हाईकोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि महिला की सहमति किसी दबाव, धमकी या धोखे के माध्यम से हासिल की गई थी।
CG Highcourt Decision/ अदालत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि महिला बालिग होने के साथ-साथ पहले से विवाहित थी, जिसे सामाजिक और कानूनी परिणामों की समझ थी। कोर्ट ने कहा कि जब संबंध आपसी सहमति से बनाए गए हों, तो बाद में उसे अपराध की श्रेणी में नहीं लाया जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने महिला की याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया और ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को दी गई राहत को बरकरार रखा।




