बिलासपुर…गांवों के विकास की फाइलों में दर्ज आंकड़े अब काफी नहीं होंगे। स्वीकृत काम कब शुरू हुआ, कितनी प्रगति हुई और उसका लाभ ग्रामीणों तक कब पहुंचा—अब इसी कसौटी पर योजनाओं की रफ्तार परखी जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने अधिकारियों को उपलब्ध समय का पूरा इस्तेमाल करने के निर्देश देते हुए साफ कर दिया कि वित्तीय वर्ष के करीब सात महीने ही शेष हैं और खेती के चरम दौर के करीब 45 दिन विकास कार्यों की गति प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में काम टालने की गुंजाइश कम है।

संभाग आयुक्त कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के सामने गांवों में चल रहे और अटके कामों की स्थिति रखी गई। विकसित भारत-जी राम जी, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण और पीएम जनमन आवास योजना की प्रगति पर विशेष नजर रही।

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मंजूरी के बाद भी काम अटका तो सवाल उठेगा

ग्राम पंचायतवार स्वीकृत कार्यों, मानव दिवस और वास्तविक प्रगति की समीक्षा के दौरान सचिव ने अधिकारियों से कामों को गति देने को कहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि स्वीकृति के बाद काम शुरू होने में अनावश्यक देरी न हो और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज उपलब्धियां जमीन पर भी दिखाई दें।

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विकसित भारत-जी राम जी योजना के लिए राज्य में करीब 5,500 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान का हवाला देते हुए उन्होंने उपलब्ध समय को महत्वपूर्ण बताया। इस योजना के स्वीकृत कार्यों के साथ मनरेगा के अधूरे कामों में भी श्रमिकों को रोजगार से जोड़ने की बात कही गई। ग्राम सभा की मंजूरी और निर्माण की गुणवत्ता को अनिवार्य बताते हुए शिकायतों पर सख्ती के संकेत भी दिए गए।

हजारों काम सामने, अब रफ्तार की बारी

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समीक्षा में 2,107 बालिका शौचालय, 233 सामुदायिक मुक्तिधाम, 575 मुक्तिधाम शेड एवं प्रतीक्षालय और 1,017 बोरवेल रिचार्ज के प्रस्तावित काम सामने आए। बारिश के बाद इन कामों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

यानी ग्रामीण विकास के एजेंडे में कामों की कमी नहीं है, चुनौती अब उन्हें समय पर पूरा करने की है। मनरेगा के अधूरे कामों से लेकर लंबित केवाईसी और प्रगतिरत कार्यों तक की स्थिति देखी गई। गुणवत्ता में लापरवाही और शिकायतों को लेकर भी अधिकारियों को गंभीर रहने के निर्देश दिए गए।

अधूरे घर सबसे बड़ी चुनौती

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में अधूरे मकानों को पहले पूरा करने पर जोर दिया गया। जिन आवासों का निर्माण शुरू हो सकता है, उन्हें तत्काल शुरू करने और भुगतान संबंधी अड़चनों वाले मामलों को अलग से चिन्हित कर दूर करने के निर्देश दिए गए।

रोजगार सहायकों और आवास मित्रों को लक्ष्य देकर काम की नियमित निगरानी की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया। मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण और पीएम जनमन आवास योजना के स्वीकृत मकानों को भी तय समय में पूरा कराने पर जोर रहा।

योजना का मतलब तभी, जब लाभ पहुंचे

बैठक में आरसेटी और आईएमटी के माध्यम से हितग्राहियों को प्रशिक्षण और आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। ग्रामीण विकास की योजनाओं का अंतिम लक्ष्य कागज पर प्रगति दर्ज करना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की जिंदगी में उसका असर दिखना है।

बैठक में संभागायुक्त सुनील कुमार जैन, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, डिप्टी कमिश्नर स्मृति तिवारी सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।